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Bilaspur News: फोरलेन के लिए अधिग्रहित की निजी भूमि और मुआवजा आवंटन राशि की रिपोर्ट में विरोधाभास

Fri, 04 Jul 2025 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 04 Jul 2025 11:36 PM IST
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Difference of Rs 86 crore and 147 hectares of land in the report of four-lane private land acquisition
कीरतपुर.नेरचौक परियोजना के लिए निजी भूमि अधिग्रहण की रिपोर्ट की प्रति। स्रोत: शिकायतकर्ता
एक्सक्लूसिव
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- पीडब्ल्यूडी शिमला, भूमि अधिग्रहण अधिकारी बिलासपुर की रिपोर्ट में आवंटन राशि में 86 करोड़ और अधिग्रहित भूमि में 147 हेक्टेयर का अंतर
- आरटीआई में ली गई जानकारी से सवालों के घेरे में आई भू अधिग्रहण प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के निजी भूमि अधिग्रहण को लेकर सरकारी दस्तावेजों में भारी विरोधाभास सामने आया है। दो विभागों से ली गई आरटीआई की जानकारी में 86 करोड़ रुपये का अंतर और अधिग्रहित भूमि के क्षेत्रफल में 147 हेक्टेयर का फर्क पाया गया है। ऐसे में भू अधिग्रहण का यह मामला अब पूरी तरह संदेह के घेरे में आ गया है।
भूमि अधिग्रहण से संबंधित पहली रिपोर्ट भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के निजी भूमि अधिग्रहण अधिकारी बिलासपुर ने 15 जून 2021 को दी थी। इसमें बताया गया था कि परियोजना में कीरतपुर से नेरचौक तक 10 अरब 98 करोड़ 44 लाख 15 हजार 366 रुपये मुआवजे के तौर पर आवंटित हुए हैं। वहीं, 30 अप्रैल 2025 को जन सूचना अधिकारी कार्यालय मुख्य अभियंता-सह-परियोजना निदेशक राज्य सड़क परियोजना, हिमाचल प्रदेश सड़क विकास निगम, हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग, भवन निर्माण, निगम विहार, शिमला-2 की ओर से जारी रिपोर्ट 16 जून 2025 को आरटीआई में मिली। इसमें आवंटित राशि 11 अरब 59 करोड़ 42 लाख 61 हजार 88 रुपये बताई गई। यानी दोनों आंकड़ों में 86 करोड़ 67 लाख 80 हजार 947 रुपये का अंतर है।
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सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 2020-21 में पूरी हो चुकी थी। ऐसे में 86 करोड़ रुपये का मुआवजा किसे और क्यों दिया गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। साल 2022 में तत्कालीन परियोजना निदेशक मंडी ने केंद्रीय सूचना आयुक्त को शपथ पत्र देकर बताया था कि परियोजना में 318.47 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया है। वहीं, अब लोक निर्माण विभाग के अनुसार अधिग्रहण सिर्फ 171.2735 हेक्टेयर भूमि का ही हुआ है। इस तरह 147 हेक्टेयर भूमि का फर्क सवाल खड़े करता है कि या तो आंकड़े गलत हैं या फिर मामले में गड़बड़ी का है। वहीं, अब शिकायतकर्ता का कहना है कि जब 2021 के बाद भूमि का अधिग्रहण ही नहीं हुआ तो इस राशि का मुआवजा आवंटन हुआ कहां। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल ने कहा कि अब उन्होंने इसका ब्योरा एनएचएआई से वर्ष वार मांगा है।
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इनसेट---
लोक निर्माण विभाग के अनुसार कितनी राशि आई, कितनी खर्च हुई का पूरा ब्योरा
कुल स्वीकृत मुआवजा : 11,85,11,96,313
एनएचएआई से प्राप्त राशि : 11,59,42,61,088
अदायगी 31 दिसंबर 2023 तक : 11,59,41,19,774
शेष बकाया : 1,41,314
इनसेट---
150 इंतकाल, 144 केंद्र के पक्ष में, लेकिन अवाॅर्डों का कोई रिकॉर्ड नहीं
इस परियोजना में अब तक 150 भूमि इंतकाल दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 144 केंद्र सरकार के पक्ष में हो चुके हैं, जबकि 6 अभी लंबित हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कुल कितने अवाॅर्ड जारी किए गए हैं, जिससे अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

कीरतपुर.नेरचौक परियोजना के लिए निजी भूमि अधिग्रहण की रिपोर्ट की प्रति। स्रोत: शिकायतकर्ता

कीरतपुर.नेरचौक परियोजना के लिए निजी भूमि अधिग्रहण की रिपोर्ट की प्रति। स्रोत: शिकायतकर्ता

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