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पदनाम पार्ट टाइम वर्कर, कार्य डेली वेज की तरह : यूनियन
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- वर्कर बोले-काम अधिक और वेतन मात्र 5625 रुपये मासिक
-सरकार से शोषण बंद स्थायी नीति की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर यूनियन की जिला बैठक का आयोजन बिलासपुर में किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान विपन कुमार ने की। सभी वर्करों ने समस्याओं पर चर्चा की और सरकार से आग्रह किया कि उनकी समस्याओं को दूर किया जाए।
वर्करों ने बताया कि पदनाम उन्हें पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर दिया गया है, जबकि कार्य उनसे डेली वेज की तरह लिया जा रहा है। उनसे छह घंटे से अधिक कार्य लिया जा रहा है। वर्करों ने बताया कि उन्हें 5625 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है और केवल दस माह ही उन्हें यह वेतन मिलता है। इस कारण उन्हें घर चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें 2020 की पॉलिसी के आधार पर वेतन दिया जा रहा है। उस समय यह करीब 30 रुपये था। वर्तमान में यह 50 रुपये प्रति घंटा है, लेकिन उन्हें नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है और मिड-डे मील का कार्य भी कराया जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों का अनसुना किया जा रहा है। यूनियन ने सरकार से आग्रह किया कि उनकी समस्याओं को ध्यान में रखकर इसका समाधान किया जाए और उनका शोषण बंद कर उनके लिए स्थायी नीति बनाई जाए। इस मौके पर यूनियन उपप्रधान नीलम, मीडिया प्रभारी हेमराज, कोषाध्यक्ष संदेश कुमारी, रामलोक और देशराज सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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-सरकार से शोषण बंद स्थायी नीति की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर यूनियन की जिला बैठक का आयोजन बिलासपुर में किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान विपन कुमार ने की। सभी वर्करों ने समस्याओं पर चर्चा की और सरकार से आग्रह किया कि उनकी समस्याओं को दूर किया जाए।
वर्करों ने बताया कि पदनाम उन्हें पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर दिया गया है, जबकि कार्य उनसे डेली वेज की तरह लिया जा रहा है। उनसे छह घंटे से अधिक कार्य लिया जा रहा है। वर्करों ने बताया कि उन्हें 5625 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है और केवल दस माह ही उन्हें यह वेतन मिलता है। इस कारण उन्हें घर चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें 2020 की पॉलिसी के आधार पर वेतन दिया जा रहा है। उस समय यह करीब 30 रुपये था। वर्तमान में यह 50 रुपये प्रति घंटा है, लेकिन उन्हें नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा उन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है और मिड-डे मील का कार्य भी कराया जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों का अनसुना किया जा रहा है। यूनियन ने सरकार से आग्रह किया कि उनकी समस्याओं को ध्यान में रखकर इसका समाधान किया जाए और उनका शोषण बंद कर उनके लिए स्थायी नीति बनाई जाए। इस मौके पर यूनियन उपप्रधान नीलम, मीडिया प्रभारी हेमराज, कोषाध्यक्ष संदेश कुमारी, रामलोक और देशराज सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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