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Bilaspur News: जिले में जगह-जगह सुनाई जा रही गुग्गा जाहरवीर की गाथा
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गुग्गा गायन मंडलियां घर-घर जाकर कर रहीं गुणगान
धमणा गांव के भूपराम कई वर्षों से निभा रहे परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर हो या गांव, जिले में इन दिनों जगह-जगह गुग्गा जाहरवीर की गाथा सुनने को मिल रही है। गुग्गा गायन मंडलियां घर-घर जाकर डमरू व अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ गुग्गा जाहरवीर की महिमा का गुणगान कर रही हैं। बिलासपुर शहर के नजदीकी धमणा गांव के भूपेंद्र उर्फ भूपराम की अगुवाई में ऐसी ही एक मंडली बीते कई वर्षों से यह परंपरा निभा रही है।
मान्यता के अनुसार गुग्गा जाहरवीर ने चूरू (राजस्थान) के ददरेवा गांव के राजा जेवर सिंह व बाछल देवी के घर में जन्म लिया था। उनका जन्म गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से हुआ था। उन्हें सांपों के देवता व रक्षक के रूप में जाना जाता है। रक्षाबंधन पर्व से लेकर अगले 10 दिनों तक गुग्गा गायन मंडलियां घर-घर जाकर उनकी गाथा सुनाती हैं। माना जाता है कि उनकी गाथा सुनने से घर में जहरीले सांपों का डर नहीं रहता है। साथ ही इससे जीवन में कष्टों, दुखों व बीमारियों से भी निजात मिलती है। दसवें दिन गुग्गा जाहरवीर के मंदिरों में भेंट चढ़ाई जाती है। वहां से पवित्र मिट्टी घर लाई जाती है। बिलासपुर के गेहड़वीं व बरमाणा में गुग्गा जाहरवीर के मंदिरों में इन दिनों लोगों की खूब भीड़ उमड़ती है। गोगामेड़ी के नाम से उनका मुख्य मंदिर राजस्थान के हनुमानगढ़ में है, जिसे हिंदू-मुस्लिम समुदाय की साझा आस्था के प्रतीक के रूप में पहचाना जाता है।
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धमणा गांव के भूपराम कई वर्षों से निभा रहे परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर हो या गांव, जिले में इन दिनों जगह-जगह गुग्गा जाहरवीर की गाथा सुनने को मिल रही है। गुग्गा गायन मंडलियां घर-घर जाकर डमरू व अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ गुग्गा जाहरवीर की महिमा का गुणगान कर रही हैं। बिलासपुर शहर के नजदीकी धमणा गांव के भूपेंद्र उर्फ भूपराम की अगुवाई में ऐसी ही एक मंडली बीते कई वर्षों से यह परंपरा निभा रही है।
मान्यता के अनुसार गुग्गा जाहरवीर ने चूरू (राजस्थान) के ददरेवा गांव के राजा जेवर सिंह व बाछल देवी के घर में जन्म लिया था। उनका जन्म गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से हुआ था। उन्हें सांपों के देवता व रक्षक के रूप में जाना जाता है। रक्षाबंधन पर्व से लेकर अगले 10 दिनों तक गुग्गा गायन मंडलियां घर-घर जाकर उनकी गाथा सुनाती हैं। माना जाता है कि उनकी गाथा सुनने से घर में जहरीले सांपों का डर नहीं रहता है। साथ ही इससे जीवन में कष्टों, दुखों व बीमारियों से भी निजात मिलती है। दसवें दिन गुग्गा जाहरवीर के मंदिरों में भेंट चढ़ाई जाती है। वहां से पवित्र मिट्टी घर लाई जाती है। बिलासपुर के गेहड़वीं व बरमाणा में गुग्गा जाहरवीर के मंदिरों में इन दिनों लोगों की खूब भीड़ उमड़ती है। गोगामेड़ी के नाम से उनका मुख्य मंदिर राजस्थान के हनुमानगढ़ में है, जिसे हिंदू-मुस्लिम समुदाय की साझा आस्था के प्रतीक के रूप में पहचाना जाता है।
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