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जिमीकंद की खेती बदलेगी किसानों की तकदीर : डॉ. हरविंदर
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श्री नयना देवी जी पहुंचे कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति को सम्मानित करते मंदिर न्यास अधिकारी। सं
श्री नयनादेवी जी (बिलासपुर)। जिला बिलासपुर की जिमीकंद की खेती किसानों की तकदीर और तस्वीर बदलेगी और इस जिमीकंद को राष्ट्रीय स्तर तक लेकर जाएंगे। यह बात श्री नयनादेवी जी पहुंचे पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर हरविंदर सिंह चौधरी ने कही।
कुलपति डॉक्टर हरविंदर सिंह चौधरी ने मां नयनादेवी जी के दरबार में पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि बिलासपुर में जिमीकंद के अलावा उड़द की दाल, चना की खेती और गुणवत्ता को लेकर कृषि विश्वविद्यालय प्रयासरत है और इस खेती से किसानों को बहुत ज्यादा फायदा मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि जिला बिलासपुर का बरठीं क्षेत्र गन्ने की फसल के लिए जाना जाता था। यहां की शक्कर बहुत मशहूर थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां की गन्ने की फसल पूरी तरह से खराब हो रही थी। अब कृषि विश्वविद्यालय की सहायता से किसानों ने गन्ने की फसल का सुधार किया है और अब फिर से वहां पर गन्ने की खेती भरपूर मात्रा में हो रही है।
उन्होंने कहा कि रोहड़ू क्षेत्र के किसानों का राष्ट्रीय स्तर पर पहचान लाल चावल के लिए कायम है, इसका फायदा किसानों को मिला है। उन्होंने कहा कि पहले वहां का लाल चावल 40 से 50 रुपये किलो बिकता था, लेकिन आज की तारीख में उनका यह लाल चावल 250 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है इससे किसानों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलकर रख दिया है। इस मौके पर मंदिर न्यास की तरफ से स्थानीय पुजारी महेश कुमार और हरीश कुमार ने उन्हें माताजी की चुनरी और फोटो भेंट की।
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कुलपति डॉक्टर हरविंदर सिंह चौधरी ने मां नयनादेवी जी के दरबार में पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि बिलासपुर में जिमीकंद के अलावा उड़द की दाल, चना की खेती और गुणवत्ता को लेकर कृषि विश्वविद्यालय प्रयासरत है और इस खेती से किसानों को बहुत ज्यादा फायदा मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि जिला बिलासपुर का बरठीं क्षेत्र गन्ने की फसल के लिए जाना जाता था। यहां की शक्कर बहुत मशहूर थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां की गन्ने की फसल पूरी तरह से खराब हो रही थी। अब कृषि विश्वविद्यालय की सहायता से किसानों ने गन्ने की फसल का सुधार किया है और अब फिर से वहां पर गन्ने की खेती भरपूर मात्रा में हो रही है।
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उन्होंने कहा कि रोहड़ू क्षेत्र के किसानों का राष्ट्रीय स्तर पर पहचान लाल चावल के लिए कायम है, इसका फायदा किसानों को मिला है। उन्होंने कहा कि पहले वहां का लाल चावल 40 से 50 रुपये किलो बिकता था, लेकिन आज की तारीख में उनका यह लाल चावल 250 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है इससे किसानों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलकर रख दिया है। इस मौके पर मंदिर न्यास की तरफ से स्थानीय पुजारी महेश कुमार और हरीश कुमार ने उन्हें माताजी की चुनरी और फोटो भेंट की।
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