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ट्रकों को दिया जा रहा है 15 टन से अधिक भार

Mon, 18 Mar 2019 10:43 PM IST
Devender Devender Kumar Kumar
Updated Mon, 18 Mar 2019 10:43 PM IST
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ट्रकों को दिया जा रहा है 15 टन से अधिक भार
मिर्जापुर-रीवा मार्ग पर जाम में खड़े ट्रक
सरोज पाठक
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बरमाणा(बिलासपुर)। एशिया की सबसे बड़ी ट्रक यूनियन बीडीटीएस में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना हो रही है। यूनियन से सीमेंट लेकर जाने वाले कुछ ट्रकों को 15 टन या इससे अधिक भार दिया जा रहा है। जबकि नियम अनुसार एक ट्रक केवल 12 टन तक का भार ले जा सकता है लेकिन यूनियन और कंपनी की मिली भगत के कारण कुछ ट्रकों में अधिक सीमेंट भेज रही है। इससे जहां अन्य ट्रक ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना हो रही है। जबकि सीमेंट कंपनी को इसका सीधा लाभ पहुंच रहा है। कुछ ट्रक ऑपरेटरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह सब कार्य यूनियन और कंपनी की मिली भगत से हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि एक ट्रक में 12 टन से अधिक का भार नहीं ले जा सकते हैं। इस संबंध में कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय मंत्रालय ने भी अधिसूचना जारी की है लेकिन बीडीटीएस और एसीसी मिल कर इन आदेशों की सरेआम अवहेलना कर रही है। ‘अमर उजाला’ के हाथ लगे दस्तावेज से साफ हो रहा है कि यूनियन और कंपनी कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए 15 टन से भी अधिक का भार दे रही है।
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इनसेट...
ट्रकों में अधिक भार देने से सीधा कंपनी को लाभ हो रहा है क्योंकि 12 टन किराये को विभिन्न श्रेणी में बांटा गया है। 15 टन सीमेंट ले जाने पर एक टन किराये का सीधा लाभ कंपनी को हो रहा है क्योंकि 12 टन के बाद किराये को विभिन्न श्रेणिायों में बांटा गया है। इससे किराये में 25 फीसदी तक कटौती हो रही है।
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ट्रक ऑपरेटरों को भी इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है क्योंकि अधिक सीमेंट ले जाने के कारण हर रोज करीब 40 ट्रकों की मांग भी कम हो रही है। यह समस्या 12 टन से अधिक भार ले जाने के कारण खड़ी हुई है।
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ट्रकों में ओवरलोडिंग के कारण जहां आए दिन हादसे हो रहे है। वहीं पर्यावरण और सड़कों को भी इसका सीधा नुकसान हो रहा है। जबकि आपात स्थिति में भी आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि उक्त ट्रक अधिक भार होने के कारण कई बार रोगी वाहन तक को पास नहीं दे पाते हैं।

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यूनियन के प्रधान जीत राम गौतम का कहना है कि ढुलान नियम अनुसार हो रहा है लेकिन कई बार एसीसी मजबूरी में 12 टन से अधिक सीमेंट भेजती है। हालांकि यूनियन 12 टन से अधिक भार ट्रक भेजती है।
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