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Bilaspur News: पूर्व विधायक के पीएसओ को जारी पिस्टल लौटाने के आदेश

Wed, 26 Aug 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 11:55 PM IST
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जांच पूरी होने के बाद पुलिस लाइन के शस्त्र भंडार में जमा होगा हथियार
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पुलिस लाइन के आर्म्स स्टोर ने अदालत में दायर किया था आवेदन
एसआई संजीव कुमार को पीएसओ ड्यूटी के दौरान जारी हुई थी पिस्टल

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पूर्व विधायक बंबर ठाकुर के पीएसओ के तौर पर ड्यूटी कर चुके एसआई संजीव कुमार को जारी सरकारी पिस्टल को अब पुलिस लाइन के शस्त्र भंडार में जमा करवाया जाएगा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पुलिस लाइन बिलासपुर के आर्म्स स्टोर की ओर से दायर आवेदन को मंजूर करते हुए सरकारी पिस्टल नंबर एफवाईजी-265, उसकी मैगजीन और कब्जे में लिए गए कारतूसों को सक्षम अधिकारी को लौटाने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने यह आदेश 25 अगस्त को पारित किया। पुलिस लाइन के आर्म्स स्टोर की ओर से अदालत में दिए आवेदन में बताया गया कि उक्त पिस्टल एसआई संजीव कुमार को पूर्व विधायक बंबर ठाकुर के पीएसओ के रूप में ड्यूटी के दौरान जारी की गई थी। मौजूदा आपराधिक मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पिस्टल को कब्जे में लेकर मालखाने में जमा कर दिया था। आवेदन में कहा गया था कि पिस्टल सरकारी संपत्ति है और पुलिस विभाग को इसकी आवश्यकता आधिकारिक ड्यूटी के लिए है। इसलिए इसे लंबे समय तक मालखाने में रखने के बजाय नियमानुसार पुलिस लाइन के शस्त्र भंडार में वापस किए जाने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि पिस्टल सरकारी संपत्ति है और पुलिस लाइन बिलासपुर से जारी की गई थी। ऐसे सरकारी हथियार को लंबे समय तक मालखाने में रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है, खासकर तब जब उसकी पहचान और स्थिति को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखा जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने आवेदन मंजूर कर लिया। हालांकि, अदालत ने हथियार वापस करने से पहले जरूरी जांच पूरी करने की शर्त रखी है। आदेश के अनुसार, यदि पिस्टल या कारतूसों की कोई फोरेंसिक अथवा बैलिस्टिक जांच अभी बाकी है तो पहले उसे पूरा किया जाएगा। इसके बाद ही पिस्टल, मैगजीन और कब्जे में लिए गए कारतूस पुलिस लाइन के सक्षम अधिकारी को उचित रसीद पर सौंपे जाएंगे। अदालत ने आदेश में साफ किया है कि रिलीज से पहले पिस्टल, मैगजीन और गोला-बारूद की विस्तृत सूची तैयार करनी होगी। पिस्टल को नियमानुसार पुलिस लाइन के आर्म्स स्टोर में जमा करवाया जाएगा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत जब भी पिस्टल, मैगजीन या कारतूस पेश करने का निर्देश देगी, संबंधित प्राधिकारी को उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। साथ ही पिस्टल के पहचान नंबर अथवा उसकी पहचान से जुड़ी किसी अन्य विशेषता में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिस्टल को पुलिस लाइन के शस्त्र भंडार में लौटाने से आपराधिक मामले के गुण-दोष पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ेगा। अदालत ने आवेदन का निपटारा करते हुए आदेश की प्रति मुख्य मामले की फाइल के साथ टैग करने के निर्देश भी दिए हैं।
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