{"_id":"6a99c2a5f569d4ce7605b0d4","slug":"bilaspur-tops-the-state-in-hiv-risk-assessment-bilaspur-news-c-92-1-bls1001-166861-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: एचआईवी जोखिम आकलन में बिलासपुर प्रदेशभर में अव्वल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: एचआईवी जोखिम आकलन में बिलासपुर प्रदेशभर में अव्वल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रेकफ्री अभियान में 30 अगस्त तक 3,550 युवाओं ने कराया सेल्फ रिस्क असेसमेंट, मंडी दूसरे और सोलन तीसरे स्थान पर
अभियान में युवाओं की बढ़ी भागीदारी, रोजाना औसतन 187 आकलन
34 रेड रिबन क्लबों के जरिये चल रहा एचआईवी जागरूकता अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चल रहे इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन-2026 में बिलासपुर जिले ने सेल्फ रिस्क असेसमेंट के मामले में प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है। इसके अलावा मंडी दूसरे और सोलन जिला तीसरे स्थान पर रहा। युवाओं को एचआईवी संक्रमण के संभावित जोखिम के प्रति जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे ब्रेकफ्री अभियान के तहत बिलासपुर जिले में 30 अगस्त तक 3,550 सेल्फ रिस्क असेसमेंट किए जा चुके हैं। प्रदेश के किसी भी जिले में यह सबसे अधिक संख्या है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा ने बताया कि युवाओं में एचआईवी संक्रमण से जुड़े जोखिम को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभियान 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर शुरू किया गया था। अभियान 12 अक्तूबर तक चलेगा। जिले में 34 रेड रिबन क्लबों के माध्यम से युवाओं को अभियान से जोड़ा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रेड रिबन क्लबों और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी से अभियान को गति मिली है। अभियान के तहत शिक्षण संस्थानों में वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, नारा लेखन, जागरूकता रैलियां और अन्य गतिविधियां करवाई जा रही हैं। इनके माध्यम से युवाओं को एचआईवी से बचाव, जोखिम की पहचान, जांच और समय पर उपचार की जानकारी दी जा रही है। विभाग का उद्देश्य एचआईवी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर युवाओं तक सही और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना है।
मंडी में 2,057 सेल्फ रिस्क असेसमेंट, लाहौल-स्पीति में एक भी नहीं
30 अगस्त तक मंडी में 2,057 और सोलन में 1,147 सेल्फ रिस्क असेसमेंट हुए हैं। हमीरपुर में 973, शिमला में 802, ऊना में 598, कांगड़ा में 520, कुल्लू में 485, चंबा में 342, सिरमौर में 255 और किन्नौर में 188 आकलन दर्ज किए गए। लाहौल-स्पीति में अभी कोई आकलन नहीं हुआ है। प्रदेशभर में कुल 10,917 सेल्फ रिस्क असेसमेंट किए जा चुके हैं। बिलासपुर में रोजाना औसतन 187 आकलन हो रहे हैं। मंडी में यह आंकड़ा 108 और सोलन में 60 प्रतिदिन है।
क्यूआर कोड से खुद जान सकते हैं जोखिम
ब्रेकफ्री अभियान के तहत युवा क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन प्रश्नावली में पूछे गए सवालों के जवाब देते हैं। जवाबों के आधार पर सेल्फ रिस्क असेसमेंट किया जाता है। इससे युवा अपने एचआईवी संक्रमण के संभावित जोखिम स्तर को समझ सकते हैं। जरूरत होने पर उन्हें जांच और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियान में युवाओं की बढ़ी भागीदारी, रोजाना औसतन 187 आकलन
34 रेड रिबन क्लबों के जरिये चल रहा एचआईवी जागरूकता अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चल रहे इंटेंसिफाइड आईईसी कैंपेन-2026 में बिलासपुर जिले ने सेल्फ रिस्क असेसमेंट के मामले में प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है। इसके अलावा मंडी दूसरे और सोलन जिला तीसरे स्थान पर रहा। युवाओं को एचआईवी संक्रमण के संभावित जोखिम के प्रति जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे ब्रेकफ्री अभियान के तहत बिलासपुर जिले में 30 अगस्त तक 3,550 सेल्फ रिस्क असेसमेंट किए जा चुके हैं। प्रदेश के किसी भी जिले में यह सबसे अधिक संख्या है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा ने बताया कि युवाओं में एचआईवी संक्रमण से जुड़े जोखिम को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभियान 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर शुरू किया गया था। अभियान 12 अक्तूबर तक चलेगा। जिले में 34 रेड रिबन क्लबों के माध्यम से युवाओं को अभियान से जोड़ा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रेड रिबन क्लबों और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी से अभियान को गति मिली है। अभियान के तहत शिक्षण संस्थानों में वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, नारा लेखन, जागरूकता रैलियां और अन्य गतिविधियां करवाई जा रही हैं। इनके माध्यम से युवाओं को एचआईवी से बचाव, जोखिम की पहचान, जांच और समय पर उपचार की जानकारी दी जा रही है। विभाग का उद्देश्य एचआईवी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर युवाओं तक सही और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना है।
मंडी में 2,057 सेल्फ रिस्क असेसमेंट, लाहौल-स्पीति में एक भी नहीं
30 अगस्त तक मंडी में 2,057 और सोलन में 1,147 सेल्फ रिस्क असेसमेंट हुए हैं। हमीरपुर में 973, शिमला में 802, ऊना में 598, कांगड़ा में 520, कुल्लू में 485, चंबा में 342, सिरमौर में 255 और किन्नौर में 188 आकलन दर्ज किए गए। लाहौल-स्पीति में अभी कोई आकलन नहीं हुआ है। प्रदेशभर में कुल 10,917 सेल्फ रिस्क असेसमेंट किए जा चुके हैं। बिलासपुर में रोजाना औसतन 187 आकलन हो रहे हैं। मंडी में यह आंकड़ा 108 और सोलन में 60 प्रतिदिन है।
विज्ञापन
क्यूआर कोड से खुद जान सकते हैं जोखिम
ब्रेकफ्री अभियान के तहत युवा क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन प्रश्नावली में पूछे गए सवालों के जवाब देते हैं। जवाबों के आधार पर सेल्फ रिस्क असेसमेंट किया जाता है। इससे युवा अपने एचआईवी संक्रमण के संभावित जोखिम स्तर को समझ सकते हैं। जरूरत होने पर उन्हें जांच और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जाता है।
विज्ञापन