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बिलासपुर: बीमार जुड़वा बच्चों की देखभाल के लिए महिला प्रहरी को कोर्ट से राहत, 80 दिन की अतिरिक्त छुट्टी मंजूर

Tue, 27 Oct 2026 09:23 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही Published by: प्रिया वर्मा Updated Tue, 27 Oct 2026 09:23 AM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर केंद्रीय जेल में पदस्थ महिला प्रहरी को उनके बीमार जुड़वा बच्चों की देखभाल के लिए 80 दिन की अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी देने का निर्देश दिया है। महिला प्रहरी ने 120 दिन की छुट्टी की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।

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Bilaspur HC Grants 80 More Days of Child-Care Leave to Woman Jail Guard Caring for Sick Twin Babies
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर केंद्रीय जेल में तैनात महिला प्रहरी मंदा तिवारी को उनके बीमार जुड़वा बच्चों की देखभाल के लिए 80 दिन की अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी प्रदान करने का निर्देश जारी किया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने इस मामले में आदेश पारित किया। अदालत ने बच्चों की कम उम्र और उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए महिला कर्मचारी को यह राहत दी है। याचिकाकर्ता मंदा तिवारी ने उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर कर 120 दिन की बाल देखभाल छुट्टी स्वीकृत करने की मांग की थी।

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याचिका में बाल देखभाल छुट्टी का आग्रह
याचिकाकर्ता की तरफ से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने बताया कि बिलासपुर केंद्रीय जेल में इसी साल 18 सितंबर को महिला प्रहरी के पद पर मंदा तिवारी की नियुक्ति हुई थी।  उन्होंने 10 सितंबर, 2025 को जुड़वा बच्चों का जन्म दिया था। दोनों बच्चे वर्तमान में लगभग एक वर्ष के हैं और अस्वस्थ रहने के कारण उन्हें नियमित चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। पूर्व में सक्षम अधिकारी ने एक अक्तूबर  को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को केवल 20 दिन की छुट्टी मंजूर की थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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अदालत ने स्वीकृत छुट्टियों को कम माना
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि बच्चों के पालन-पोषण और देखभाल के लिए प्रहरी को 13 अप्रैल से 11 जुलाई  तक अवकाश दिया गया था। इसके बाद, उच्च न्यायालय ने 21 जुलाई को एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें 60 दिन की अतिरिक्त छुट्टी की मंजूरी दी थी। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए अदालत में पक्ष रखा गया कि सक्षम प्राधिकारी पहले ही 20 दिन का अवकाश स्वीकृत कर चुका है। हालांकि अदालत ने बच्चों की कमजोर स्थिति को देखते हुए इस अवधि को कम माना।
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सेवा नियमों और स्वास्थ्य का हवाला
अदालत में सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 38-ग का उल्लेख किया गया। इस नियम के तहत महिला शासकीय कर्मचारियों को अपने संपूर्ण सेवाकाल में अधिकतम 730 दिन की बाल देखभाल छुट्टी प्राप्त करने का प्रविधान है। नियमानुसार एक कैलेंडर वर्ष में ऐसी छुट्टी तीन से अधिक बार मंजूर नहीं की जा सकती। न्यायाधीश ने मामले में प्रस्तुत चिकित्सकीय दस्तावेज और बच्चों की उम्र पर विचार किया। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए पहले स्वीकृत 20 दिन की छुट्टी के अतिरिक्त 80 दिन की बाल देखभाल छुट्टी देने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को प्रदान किया।

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