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प्रदेश में मत्स्य आखेट से हटा प्रतिबंध, मछुआरों ने शुरू किया जाल लगाना
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश में मत्स्य आखेट से प्रतिबंध हट गया है। हालांकि मछुआरों की उम्मीद के मुताबिक इस बार मछली अधिक मात्रा में जाल में नहीं फंस रही हैं। सीजन के शुरू होते ही कम उत्पादन से मछुआरे निराश हो रहे हैं।
मत्स्य आखेट 16 जून से 15 अगस्त तक बंद किया था। 16 अगस्त को सीजन के पहले दिन 26.733 मीट्रिक टन का मत्स्य उत्पादन हुआ है। गोविंद सागर झील से 8600 किलोग्राम, कोलडैम से 67 किलोग्राम, पौंग झील से 13430 किलोग्राम तथा चमेरा और रणजीत सागर से 4636 किलोग्राम मछली पकड़ी गई।
प्रतिबंध के दौरान अवैध मत्स्य आखेट के कुल 186 मामले सामने आए। इनसे विभाग ने मुआवजे के रूप में 1.45 लाख रुपये प्राप्त किए। पिछले वर्ष 70 एमएम आकार से अधिक का मत्स्य बीज इन झीलों में संग्रहीत किया था।
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निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य विभाग सतपाल मेहता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के जलाशयों, सामान्य नदी नालों और उनकी सहायक नदियों में 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली पकड़कर अपनी रोजी रोटी कमाने में लगे हैं। प्रदेश के 5 जलाशयों गोविंद सागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम और रणजीत सागर जिसका क्षेत्रफल 43785 हेक्टेयर के करीब है।
इनमें 5300 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के सामान्य जलाशयों जिनकी लंबाई 2400 किलोमीटर के करीब है में 6000 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने के कार्य में लगे हैं। इन सभी मछुआरा परिवारों को निरंतर मछली मिलती रहे और लोगों को प्रोटीन युक्त प्राणी आहार मछली के रूप में मिलता रहे, इसका दायित्व हिमाचल प्रदेश मत्स्य पालन विभाग का है।
जाल में कम फंस रही मछली
सीजन शुरू होते ही गोविंद सागर झील मछुआरों ने जाल बिछाना शुरू कर दिया है। मछुआरे गाह, डैहर, ऋषिकेश और बैहना जट्टा से मछली पकड़कर ला रहे हैं। सीजन की शुरुआत में सबसे बड़ी 32 किलोग्राम की मछली पकड़ी गई।
लूहणू घाट पर इन मछलियों को बेचा जा रहा है। मछुआरों से 150 रुपए प्रति क्विंटल थोक भाव में मछलियों की खरीद की जा रही है। मछुआरे कश्मीर ने बताया कि इस बार उत्पादन उम्मीद से बहुत कम मात्रा में है। यह उत्पादन हर वर्ष कम होता जा रहा है। सिल्वर किस्म की मछली तो नामात्र रह गई है। वर्ष 2013-14 में मछली उत्पादन 1492 मीट्रिक टन हुआ था जो कम होकर वर्ष 2019-20 237 मीट्रिक टन रह गया है।
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बिलासपुर। प्रदेश में मत्स्य आखेट से प्रतिबंध हट गया है। हालांकि मछुआरों की उम्मीद के मुताबिक इस बार मछली अधिक मात्रा में जाल में नहीं फंस रही हैं। सीजन के शुरू होते ही कम उत्पादन से मछुआरे निराश हो रहे हैं।
मत्स्य आखेट 16 जून से 15 अगस्त तक बंद किया था। 16 अगस्त को सीजन के पहले दिन 26.733 मीट्रिक टन का मत्स्य उत्पादन हुआ है। गोविंद सागर झील से 8600 किलोग्राम, कोलडैम से 67 किलोग्राम, पौंग झील से 13430 किलोग्राम तथा चमेरा और रणजीत सागर से 4636 किलोग्राम मछली पकड़ी गई।
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प्रतिबंध के दौरान अवैध मत्स्य आखेट के कुल 186 मामले सामने आए। इनसे विभाग ने मुआवजे के रूप में 1.45 लाख रुपये प्राप्त किए। पिछले वर्ष 70 एमएम आकार से अधिक का मत्स्य बीज इन झीलों में संग्रहीत किया था।
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निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य विभाग सतपाल मेहता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के जलाशयों, सामान्य नदी नालों और उनकी सहायक नदियों में 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली पकड़कर अपनी रोजी रोटी कमाने में लगे हैं। प्रदेश के 5 जलाशयों गोविंद सागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम और रणजीत सागर जिसका क्षेत्रफल 43785 हेक्टेयर के करीब है।
इनमें 5300 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के सामान्य जलाशयों जिनकी लंबाई 2400 किलोमीटर के करीब है में 6000 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने के कार्य में लगे हैं। इन सभी मछुआरा परिवारों को निरंतर मछली मिलती रहे और लोगों को प्रोटीन युक्त प्राणी आहार मछली के रूप में मिलता रहे, इसका दायित्व हिमाचल प्रदेश मत्स्य पालन विभाग का है।
जाल में कम फंस रही मछली
सीजन शुरू होते ही गोविंद सागर झील मछुआरों ने जाल बिछाना शुरू कर दिया है। मछुआरे गाह, डैहर, ऋषिकेश और बैहना जट्टा से मछली पकड़कर ला रहे हैं। सीजन की शुरुआत में सबसे बड़ी 32 किलोग्राम की मछली पकड़ी गई।
लूहणू घाट पर इन मछलियों को बेचा जा रहा है। मछुआरों से 150 रुपए प्रति क्विंटल थोक भाव में मछलियों की खरीद की जा रही है। मछुआरे कश्मीर ने बताया कि इस बार उत्पादन उम्मीद से बहुत कम मात्रा में है। यह उत्पादन हर वर्ष कम होता जा रहा है। सिल्वर किस्म की मछली तो नामात्र रह गई है। वर्ष 2013-14 में मछली उत्पादन 1492 मीट्रिक टन हुआ था जो कम होकर वर्ष 2019-20 237 मीट्रिक टन रह गया है।