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मेंदला और कांडी गांव का अधिग्रहण करेगा एनटीपीसी
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:06 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बरमाणा (बिलासपुर)। कोलबांध झील के पानी के रिसाव के बाद खतरे के साये में रह रहे धन्यारा गांव पंचायत के दो गांवों मेंदला व कांडी का सर्वे ज्यूलॉजिकल विभाग की टीम ने किया है जिसकी रिपोर्ट प्रशासन और सरकार को दी जानी है। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में दोनों गांवों का अधिग्रहण करने को कहा गया है क्योंकि इन गांवों के लोगों को खतरा है, पहाड़ी कभी भी दरक सकती है। ऐसे में लोगों का यहां रहना खतरे से खाली नहीं है।
वहीं, इसी पहाड़ी में स्वाड़ व रोपड़ू गांवों के लोग भी खतरे के साये में जीने को विवश हैं। गांव के नत्थू राम, चमन लाल, बृजलाल, मस्तराम, देवीराम, हेमराज, नरीया राम, हुकम चंद, संतोष कुमार, टेक चंद व सीताराम का कहना है कि जो इंजीनियर यहां पर कांडी व मेंदला गांव का सर्वे करके गए उन्होंने यह साफ किया है कि उन्हें केवल मेंदला व कांडी गांव का ही सर्वे करने के आदेश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इंजीनियरों ने उन्हें बताया था कि पूरी की पूरी पहाड़ी को खतरा है, कभी भी पूरा पहाड़ दरक कर कोलबांध में समा सकता है। जबकि अधिकारिक तौर पर इसकी कोई भी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जब तक इंजीनियर दोबारा से इस पहाड़ी का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट नहीं सौंप देते तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। जबकि स्वाड़ व रोपड़ू गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव खतरे की जद में है। इनका भी अधिग्रहण एनटीपीसी द्वारा किया जाना चाहिए।
करीब एक सप्ताह पहले ज्यूलॉजिकल विभाग की टीम यहां पहुंची थी जिसके इंजीनियरों ने एक सप्ताह तक पहाड़ी का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट बनाई है। ‘अमर उजाला’ ने चार अक्तूबर 2016 व 20 मार्च 2018 के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद कांडी व मेंदला गांव का सर्वे किया गया है। अब इन दोनों गांवों का अधिग्रहण एनटीपीसी करेगा।
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एनटीपीसी के लोक संपर्क अधिकारी प्रवीण भारती का कहना है कि मेेंदला व कांडी गांव का ज्यूलॉजिकल विभाग ने सर्वे किया है, जिसकी रिपोर्ट वह प्रशासन व सरकार को देगा। उन्होंने बताया कि जैसे ही संबंधित प्रशासन व भारत सरकार से निर्देश आता है तो आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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बरमाणा (बिलासपुर)। कोलबांध झील के पानी के रिसाव के बाद खतरे के साये में रह रहे धन्यारा गांव पंचायत के दो गांवों मेंदला व कांडी का सर्वे ज्यूलॉजिकल विभाग की टीम ने किया है जिसकी रिपोर्ट प्रशासन और सरकार को दी जानी है। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में दोनों गांवों का अधिग्रहण करने को कहा गया है क्योंकि इन गांवों के लोगों को खतरा है, पहाड़ी कभी भी दरक सकती है। ऐसे में लोगों का यहां रहना खतरे से खाली नहीं है।
वहीं, इसी पहाड़ी में स्वाड़ व रोपड़ू गांवों के लोग भी खतरे के साये में जीने को विवश हैं। गांव के नत्थू राम, चमन लाल, बृजलाल, मस्तराम, देवीराम, हेमराज, नरीया राम, हुकम चंद, संतोष कुमार, टेक चंद व सीताराम का कहना है कि जो इंजीनियर यहां पर कांडी व मेंदला गांव का सर्वे करके गए उन्होंने यह साफ किया है कि उन्हें केवल मेंदला व कांडी गांव का ही सर्वे करने के आदेश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इंजीनियरों ने उन्हें बताया था कि पूरी की पूरी पहाड़ी को खतरा है, कभी भी पूरा पहाड़ दरक कर कोलबांध में समा सकता है। जबकि अधिकारिक तौर पर इसकी कोई भी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जब तक इंजीनियर दोबारा से इस पहाड़ी का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट नहीं सौंप देते तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। जबकि स्वाड़ व रोपड़ू गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव खतरे की जद में है। इनका भी अधिग्रहण एनटीपीसी द्वारा किया जाना चाहिए।
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करीब एक सप्ताह पहले ज्यूलॉजिकल विभाग की टीम यहां पहुंची थी जिसके इंजीनियरों ने एक सप्ताह तक पहाड़ी का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट बनाई है। ‘अमर उजाला’ ने चार अक्तूबर 2016 व 20 मार्च 2018 के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद कांडी व मेंदला गांव का सर्वे किया गया है। अब इन दोनों गांवों का अधिग्रहण एनटीपीसी करेगा।
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एनटीपीसी के लोक संपर्क अधिकारी प्रवीण भारती का कहना है कि मेेंदला व कांडी गांव का ज्यूलॉजिकल विभाग ने सर्वे किया है, जिसकी रिपोर्ट वह प्रशासन व सरकार को देगा। उन्होंने बताया कि जैसे ही संबंधित प्रशासन व भारत सरकार से निर्देश आता है तो आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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