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लोगों की भागीदारी से ही मेले-उत्सव होते हैं सफल : विवेक भाटिया
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बिलासपुर। घुमारवीं स्थित सीर खड्ड के किनारे एतिहासिक मेला मैदान में पांच दिवसीय जिला स्तरीय ग्रीष्मोत्सव घुमारवीं का शुभारंभ उपायुक्त विवेक भाटिया ने विधिवत रूप से पूजा-अर्चना करने के उपरांत खुंटा गाड़ कर व बैल पूजन और ध्वज फहराकर किया। इससे पहले शोभा यात्रा का भी आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से ही मेले अथवा उत्सवों के आयोजन सफल होते हैं। मेले के दौरान निकाली जाने वाली शोभा यात्रा जहां पारस्परिक भाईचारे की भावना का सशक्त संदेश संप्रेषित करती है, वहीं देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
उन्होंने स्थानीय नागरिकों से आग्रह किया कि घुमारवीं ग्रीष्मोत्सव की भव्यता और लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करें ताकि निरंतर प्रगति करता यह मेला हिमाचल के अग्रणी मेलों में शुमार हो सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आयोजित किए जाने वाले मेले, पर्व और त्योहार स्थानीय लोगों की आनबान और शान हैं।
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उन्होंने कहा कि मेलों के आयोजन से जहां हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार और संवर्धन होता है वहीं राष्ट्रीय, एकता, सद्भावना व बंधुत्व की भावना को भी बल मिलता है।
उपमंडलाधिकारी एवं जिला स्तरीय ग्रीष्मोत्सव समिति के अध्यक्ष घुमारवीं शशिपाल शर्मा ने मुख्यातिथि को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मेले व उत्सव हमारी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है जिन्हें सजोए रखना हम सब का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि उत्सव के दौरान आयोजित होने वाली खेल स्पर्धाओं व अन्य प्रतियोगिताओं को आयोजित करवाने में स्थानीय बाशिंदों व व्यवसायी वर्ग की ओर से प्रायोजित करवाना एक अतुलनीय उदाहरण है। इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं, महिला मंडल वाला भुड़, मॉ संतोषी आईटीआई, महिला मंडल छिब्बर की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर भारी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से ही मेले अथवा उत्सवों के आयोजन सफल होते हैं। मेले के दौरान निकाली जाने वाली शोभा यात्रा जहां पारस्परिक भाईचारे की भावना का सशक्त संदेश संप्रेषित करती है, वहीं देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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उन्होंने स्थानीय नागरिकों से आग्रह किया कि घुमारवीं ग्रीष्मोत्सव की भव्यता और लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करें ताकि निरंतर प्रगति करता यह मेला हिमाचल के अग्रणी मेलों में शुमार हो सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आयोजित किए जाने वाले मेले, पर्व और त्योहार स्थानीय लोगों की आनबान और शान हैं।
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उन्होंने कहा कि मेलों के आयोजन से जहां हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार और संवर्धन होता है वहीं राष्ट्रीय, एकता, सद्भावना व बंधुत्व की भावना को भी बल मिलता है।
उपमंडलाधिकारी एवं जिला स्तरीय ग्रीष्मोत्सव समिति के अध्यक्ष घुमारवीं शशिपाल शर्मा ने मुख्यातिथि को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मेले व उत्सव हमारी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है जिन्हें सजोए रखना हम सब का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि उत्सव के दौरान आयोजित होने वाली खेल स्पर्धाओं व अन्य प्रतियोगिताओं को आयोजित करवाने में स्थानीय बाशिंदों व व्यवसायी वर्ग की ओर से प्रायोजित करवाना एक अतुलनीय उदाहरण है। इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं, महिला मंडल वाला भुड़, मॉ संतोषी आईटीआई, महिला मंडल छिब्बर की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर भारी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।