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मनरेगा देता है 100 दिन के रोजगार की गारंटी: संतराम
Updated Sun, 08 Jul 2018 10:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। ग्रामीण कामगार संगठन एवं एटक जिला परिषद बिलासपुर ने गोपाल कृष्ण मंदिर दनोह में मनरेगा, सूचना का अधिकार नियम, वनाधिकार नियम और श्रमिक कल्याण बोर्ड व इसके लाभों के बारे में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 100 के करीब किसानों और कामगारों ने हिस्सा लिया।
ग्रामीण कामगार संगठन के राज्य संयोजक व बाली चौकी से जिला परिषद सदस्य कामरेड संतराम ने बताया कि मनरेगा, सूचना का अधिकार व वनाधिकार नियम अति सुंदर कानून है और जो सीधे तौर पर जनता को शक्ति प्रदान करते हैं। जहां मनरेगा 100 दिन रोजगार की गारंटी देता है वहीं सूचना का अधिकार अधिनियम जनमानस को सरकार द्वारा किए गए फैसलों, निर्णयों व खर्चों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है।
वन अधिकार नियम की प्रस्तावना में ऐतिहासिक न्याय की बात कही है जो जनता की जंगलों में भागीदारी को सुनिश्चित करता है और 2005 से पहले लोगों द्वारा वन भूमि पर अपने रहने के लिए घर का निर्माण या अन्य तरह के निर्माण नियमित करने का अधिकार देता है।
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इसके अलावा कामरेड संतराम ने श्रमिक कल्याण बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया कि किसी भी पंजीकृत मजदूर की या उसके बच्चों की शादी पर 35000 रुपये, गर्भवती महिला को 25000 रुपये, दो लाख का नि:शुल्क बीमा, आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों को 3000 रुपये तक है, बच्चों को 8000 रुपये, कॉलेज के बच्चों को 10000 रुपये, अन्य प्रोफेशनल कोर्स के लिए 15000 रुपये, पीएचडी और बीएड के लिए 25000 रुपये की सुविधा श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा दी जाती है।
कार्यशाला को पूर्व विधायक केके कौशल, कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव लेखराम धीमान, सह-सचिव धर्मेंद्र रावत, ग्रामीण कामगार संगठन के अध्यक्ष जगदीश कुमार, सुशील शर्मा व सुरेश चौधरी ने भी संबोधित किया। कार्यशाला का संचालन एटक के जिला महासचिव प्रवेश चंदेल ने किया।
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बिलासपुर। ग्रामीण कामगार संगठन एवं एटक जिला परिषद बिलासपुर ने गोपाल कृष्ण मंदिर दनोह में मनरेगा, सूचना का अधिकार नियम, वनाधिकार नियम और श्रमिक कल्याण बोर्ड व इसके लाभों के बारे में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 100 के करीब किसानों और कामगारों ने हिस्सा लिया।
ग्रामीण कामगार संगठन के राज्य संयोजक व बाली चौकी से जिला परिषद सदस्य कामरेड संतराम ने बताया कि मनरेगा, सूचना का अधिकार व वनाधिकार नियम अति सुंदर कानून है और जो सीधे तौर पर जनता को शक्ति प्रदान करते हैं। जहां मनरेगा 100 दिन रोजगार की गारंटी देता है वहीं सूचना का अधिकार अधिनियम जनमानस को सरकार द्वारा किए गए फैसलों, निर्णयों व खर्चों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है।
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वन अधिकार नियम की प्रस्तावना में ऐतिहासिक न्याय की बात कही है जो जनता की जंगलों में भागीदारी को सुनिश्चित करता है और 2005 से पहले लोगों द्वारा वन भूमि पर अपने रहने के लिए घर का निर्माण या अन्य तरह के निर्माण नियमित करने का अधिकार देता है।
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इसके अलावा कामरेड संतराम ने श्रमिक कल्याण बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया कि किसी भी पंजीकृत मजदूर की या उसके बच्चों की शादी पर 35000 रुपये, गर्भवती महिला को 25000 रुपये, दो लाख का नि:शुल्क बीमा, आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों को 3000 रुपये तक है, बच्चों को 8000 रुपये, कॉलेज के बच्चों को 10000 रुपये, अन्य प्रोफेशनल कोर्स के लिए 15000 रुपये, पीएचडी और बीएड के लिए 25000 रुपये की सुविधा श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा दी जाती है।
कार्यशाला को पूर्व विधायक केके कौशल, कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव लेखराम धीमान, सह-सचिव धर्मेंद्र रावत, ग्रामीण कामगार संगठन के अध्यक्ष जगदीश कुमार, सुशील शर्मा व सुरेश चौधरी ने भी संबोधित किया। कार्यशाला का संचालन एटक के जिला महासचिव प्रवेश चंदेल ने किया।