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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   big conditions on changing in salt of pharmaceutical

दवा के साल्ट में बदलाव को शर्तें कड़ी

Tue, 19 Nov 2013 12:40 PM IST
अमर उजाला, शिमला
अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 19 Nov 2013 12:40 PM IST
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big conditions on changing in salt of pharmaceutical
देश में वैक्सीन का उत्पादन करने वाली 500 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को दवा में किसी भी बदलाव से पूर्व कसौली के सीआरआई स्थित सीडीएल (सेंट्रल ड्रग्स लैब, वैक्सीन) से मंजूरी लेनी होगी।
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बिना मंजूरी किसी तरह का बदलाव नहीं हो सकेगा।

इससे पहले ड्रग्स कंट्रोलर जनरल आफिस नई दिल्ली से मंजूरी प्राप्त की जा सकती थी।

28 अक्तूबर को भारत के वैक्सीन उत्पादकों की सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है।

यह बैठक एफडीए भवन, कोटला रोड, नई दिल्ली में हुई। इसकी सूचना कसौली स्थित सीडीएल लैब प्रबंधन को मिल चुकी है।

सीडीएल प्रभारी अरुण भारद्वाज ने बताया कि ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया डा. जीएन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि किसी भी ह्यूमन वैक्सीनेशन के उत्पादन में बदलाव से पूर्व सीडीएल कसौली को आवेदन करना अनिवार्य होगा। मंजूरी के बाद ही संबंधित वैक्सीन को मार्केट में उतारा जा सकता है। इसमें पांच मुख्य बिंदुओं को शामिल किया गया है। देश भर के वैक्सीन उत्पादकों को सूचना जारी कर दी है।
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1905 में शुरू हुआ उत्पादन
देश के एकमात्र सीआरआई (केंद्रीय अनुसंधान केंद्र) कसौली की स्थापना 1905 में हुई।

इसे पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता था।

1911 में डा. सेंपल ने पहली एंटी रैबीज वैक्सीन का अविष्कार किया, इसका टिशू भेड़ के दिमाग से लिया गया था।

वर्तमान में बैक्टीरियल, वायरल वैक्सीन और सिरम का उत्पादन किया जा रहा है।

इसमें डीपीटी, टिटनेस, कोलरा, टायफायड और येलोफीवर की वैक्सीन शामिल हैं।
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