फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bhota Radha Soami Hospital problem in the operation of Bhota Charitable Hospital there is talk of shifting

Bhota Radha Soami Hospital: भोटा चैरिटेबल अस्पताल के संचालन पर फंसा पेच, शिफ्ट होने की चर्चा; जानें पूरा मामला

Thu, 21 Nov 2024 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 21 Nov 2024 05:00 AM IST
सार

राधास्वामी सत्संग ब्यास चैरिटेबल अस्पताल को लेकर बड़ी खबर है। ब्यास प्रबंधन इस अस्पताल के स्टाफ और संपत्तियों को डेराब्यास अस्पताल में शिफ्ट करने की योजना पर विचार कर रहा है। लेकिन क्यों जानें सब कुछ खबर में।

विज्ञापन
Bhota Radha Soami Hospital problem in the operation of Bhota Charitable Hospital there is talk of shifting
राधास्वामी सत्संग ब्यास चैरिटेबल अस्पताल भोटा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राधास्वामी सत्संग ब्यास चैरिटेबल अस्पताल भोटा के संचालन को लेकर पेच फंस गया है। ब्यास प्रबंधन की ओर से 45 बेड की सुविधा वाले इस अस्पताल को अपग्रेड करने की योजना के तहत जमीन को महाराज जगत सिंह रिलीफ सोसायटी के नाम हस्तांतरित करने का आग्रह सरकार से किया गया था। इस अस्पताल को अपग्रेड करने के लिए मशीनरी और अन्य जरूरी उपकरणों की खरीद के लिए टैक्स का भुगतान करोड़ों रुपये में बन रहा है।

विज्ञापन


ऐसे में अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए ब्यास प्रबंधन ने सरकार से आग्रह किया था कि अस्पताल भवन की जमीन के हिस्से को महाराज जगत सिंह रिलीफ सोसायटी के नाम ट्रांसफर कर दिया जाए, ताकि अस्पताल को अपग्रेड किया जा सके। ब्यास प्रबंधन की इस मांग को पूरा करने में हिमाचल प्रदेश सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट आड़े आ रहा है। सरकार की ओर से रियायत मिलने पर ही जमीन हस्तातंरण संभव है, लेकिन इसमें धारा 118 की उलझन भी पेश आ सकती है।
विज्ञापन




ब्यास प्रबंधन ने प्रदेश सरकार के समक्ष इस मसले को रखा है। जिला प्रशासन हमीरपुर की ओर से इस विषय पर मंडलायुक्त मंडी को पत्राचार किया गया है। मंडलायुक्त की ओर से यह मसला अब कानून विभाग के पास पहुंचा है। ब्यास प्रबंधन ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सुक्खू के समक्ष इस विषय को रखा है। पहले आठ नवंबर तक ब्यास प्रबंधन की मांग पर फैसला लिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन कानूनी पेच के चलते मामला उलझ गया है। कानूनी पेच को सुलझाने के लिए प्रदेश सरकार और प्रबंधन में तीस नवंबर की तक सहमति बनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


चर्चा यह भी है कि यदि जमीन के हस्तातंरण की बात 30 नवंबर तक सिरे नहीं चढ़ती है तो ब्यास प्रबंधन इस अस्पताल के स्टाफ और संपत्तियों को डेराब्यास अस्पताल में शिफ्ट करने की योजना पर विचार कर रहा है। बड़सर, भोरंज, हमीरपुर और नादौन, सरकाघाट, घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र की इन पंचायतों के लोगों को निशुल्क उपचार और सस्ती दरों पर दवाइयां उपलब्ध होती हैं। जबकि इंडोर में दाखिल होने वाले मरीजों के उपचार से लेकर खाने-पीने का खर्च भी ब्यास प्रबंधन उठाता है।

अस्पताल में हर विशेषज्ञ, 200 कर्मियों का स्टाफ
चैरिटेबल अस्पताल में लगभग हर रोग का विशेषज्ञ मौजूद है। पथरियों, हर्नियां के ऑपरेशन के लिए हर तीन माह बाद डेराब्यास अस्पताल से टीम आती है। अस्पताल में 200 कर्मचारियों का स्टाफ है। यह अस्पताल साल 1999 से यहां पर संचालित किया जा रहा है। ब्यास प्रबंधन की ओर से देश में महज तीन अस्पताल चलाए जा रहे हैं। चैरिटेबल अस्पताल सिंकदरपुर, डेराब्यास और भोटा में संचालित किया जा रहा है। अस्पताल का संचालन महाराज जगत सिंह रिलीफ सोसायटी कर रही है। करोड़ों रुपये का खर्च कर इन अस्पतालों को ब्यास प्रबंधन संचालित कर रहा है।

डीसी हमीरपुर अमरजीत सिंह ने कहा कि जमीन को महाराज जगत सिंह सोसायटी को हस्तांतरण के लिए मंडलायुक्त को पत्राचार किया गया है। इस विषय पर सरकारी स्तर पर हर निर्णय लिया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed