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HP High Court: हाईकोर्ट में जवाब न देने पर प्रदेश सरकार को लगाई 50 हजार कॉस्ट, जानें क्या है पूरा मामला

Sun, 22 Sep 2024 12:42 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 22 Sep 2024 12:42 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश सरकर को हाईकोर्ट ने 3 अक्तूबर तक 50 हजार जमा कराने के आदेश दिए हैं। वहीं झील में अवैध मक डंपिंग को रोकने, दोषियों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी 30 अक्तूबर तक सरकार को हाईकोर्ट में देनी होगी।

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50 thousand cost imposed on the state government for not giving reply in Himachal High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बिलासपुर की गोबिंद सागर झील, उसके सहायक नालों में अवैध मक डंपिंग मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकर को 3 अक्तूबर तक 50 हजार जमा कराने के आदेश दिए हैं। वहीं झील में अवैध मक डंपिंग को रोकने, दोषियों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी 30 अक्तूबर तक सरकार को हाईकोर्ट में देनी होगी।

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फोरलेन प्रभावित एवं विस्थापित समिति ने किरतुपर-नेरचौक फोरलेन के किनारे गोबिंद सागर झील, उसके सहायक नालों में की गई अवैध मक डंपिंग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसी याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए थे कि मक डंपिग को रोकने और दोषियों पर कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में फाइल करे, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस बारे में कोई जवाब हाईकोर्ट में फाइल नहीं किया। आदेशों के अनुसार जवाब फाइल न करने पर मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को 50 हजार रुपये की जो कॉस्ट लगाई है इसे जमा करने के लिए तीन अक्तूबर तक का समय दिया गया है। 30 अक्तूबर को दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कर स्टेटस रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि इस जनहित याचिका में उठाया गया मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन से संबंधित है। फोरलेन निर्माण के दौरान गोबिंद सागर झील, उसकी सहायक नदियों, नालों में मक डंपिंग की गई है। इससे पर्यावरण को नुकसान हुआ है। 
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इसी मामले को लेकर समिति हाईकोर्ट गई है। वहीं मामले की सुनवाई में समय पर जवाब फाइल न करने पर इस माह के पहले सप्ताह में हाईकोर्ट ने सरकार को 50 हजार की कॉस्ट लगाई थी। इस कॉस्ट को जमा करने के लिए 3 अक्तूबर तक का समय दिया गया है। वहीं मामले से संबंधित दोषियों पर कार्रवाई, स्टेटस रिपोर्ट 30 अक्तूबर को फाइल करनी होगी।

उद्योग विभाग के प्रिंसिपल सचिव और चीफ कंजरवेटर ने जवाब देने के लिए मांगे दो सप्ताह 
जिले के पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में पेड़ कटान की एवज में नए पेड़ और सीईटीपी प्लांट न लगने के मामले में आखिरकार एनजीटी नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश के चीफ कंजरवेटर व उद्योग विभाग के प्रिंसिपल सचिव पेश हुए हैं। हिमाचल प्रदेश एडवोकेट जनरल सहित विभाग की ओर से प्रस्तुत अधिवक्ताओं ने आगामी दो सप्ताह में मामले के संबंध में जवाब देने का समय मांगा। वहीं, एनजीटी ने तीन सप्ताह में विस्तारपूर्वक जवाब दायर करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई अब 24 अक्तूबर को रखी गई है। इससे पूर्व पिछली छह सितंबर की सुनवाई में दोनों आला अधिकारियों वन विभाग के चीफ कंजरवेटर और उद्योग विभाग के प्रिंसिपल सचिव को दस-दस हजार जुर्माना व 19 सितंबर की तारीख पर प्रस्तुत होने के निर्देश जारी किए थे। 19 सितंबर को हुई सुनवाई में एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण प्रधान पीठ) नई दिल्ली में उद्योग विभाग के प्रिंसिपल सचिव आरडी नजीम व वन विभाग के प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर पवनेश कुमार पेश हुए। 
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