फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Youth has the power that's why success is kissing steps

युवाओं में हैं दम इसलिए कामयाबी चूम रही कदम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 12:51 AM IST
विज्ञापन
Youth has the power that's why success is kissing steps
युवा देश की रीढ़ और भविष्य माने जाते हैं। देश उसी दिशा में चलता है, जो युवा तय करते हैं। युवा किसी क्षेत्र में अगर कुछ बेहतर करने की ठान लें तो कामयाबी भी उनके कदम चूमती है, बशर्ते अपने मुकाम को हासिल करने के लिए वे पूरी मेहनत और लग्न के साथ आगे बढ़ें।
विज्ञापन

जिले के भी कुछ युवा ऐसे हैं, जिन्होंने न केवल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया बल्कि वे दूसरे युवाओं के लिए भी मिसाल बने। इन युवाओं ने अपनी मेहनत के बूते मुकाम हासिल कर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नाम कमाया है। बेटियों में दीपिका ठाकुर का नाम सबसे पहले याद आता है। जिन्होंने हॉकी में भारतीय टीम की कप्तानी की। भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन आवार्ड से नवाजा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर पंकज चुघ, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नीरज गोयत भी जिले की शान और युवाओं के आदर्श हैं।
विज्ञापन

शहर की बेटी दीपिका ठाकुर पर सभी को नाज है। हाल ही में दीपिका ठाकुर को उनकी प्रतिभा के लिए अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रीय हॉकी टीम की उप कप्तान दीपिका ठाकुर रेलवे की कपूरथला वर्कशॉप में मुख्य अधीक्षक हैं। जबकि उनकी शादी करनाल में हुई है। भारतीय महिला हॉकी टीम की उप कप्तान दीपिका ठाकुर का नाम 2017 में भी अर्जुन अवार्ड के लिए चर्चा में था। लेकिन उस समय उन्हें यह सम्मान नहीं मिल पाया। जिसके बाद 2020 में खेल मंत्रालय की पुरस्कार चयन समिति ने दीपिका के नाम की सिफारिश अवॉर्ड के लिए की। दीपिका ठाकुर का जन्म बेहद साधारण परिवार में हुआ। उनके स्वर्गवासी पिता राम नारायण ठाकुर यमुनानगर स्थित पेपर मिल में काम करते थे, जबकि मां ज्ञानवती देवी गृहिणी हैं। उनका बचपन पेपर मिल में ही व्यतीत हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

बचपन से ही उन्हें खेल में रुचि थी। पेपर मिल के मैदान में खिलाड़ियों को देख अपने लक्ष्य के लिए रास्ता तैयार करती रहीं। स्कूल में ही उन्होंने हॉकी थाम ली थी। उन्हें हॉकी घुमाते व खेलते देख सभी ने उसे कॉचिंग व ट्रेनिंग दिलवाने की बात कही। जिसके बाद वे यमुनानगर में कोच दविंद्र साहनी के नेतृत्व में कोचिंग लेनी लगीं। आगे की पढ़ाई के लिए वे चंडीगढ़ चली गईं। यहां कोच जसविंद्र सिंह ने दीपिका को निखारा। इस दौरान उन्होंने कई जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मैच खेले और अपनी कुशलता साबित की।
वर्ष 2004 में वह पल आया जिसे दीपिका सहित परिजनों को बेसब्री से इंतजार था। दीपिका को अपनी मंजिल का पहला पड़ाव मिला और उनका चयन राष्ट्रीय टीम के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर
पोजिशन पर बेहतर खेलने का दम रखने वाली दीपिका 240 इंटरनेशनल मैच खेल चुकी हैं। दीपिका ने अपने खेल से भारतीय महिला हॉकी को खास मुकाम तक पहुंचाया है। वे भारतीय महिला हॉकी टीम की उप कप्तानी भी कर चुकी हैं। अपने 16 साल के कॅरिअर में उन्होंने हर मैच में अपना एक नया अंदाज पेश किया। इस दौरान उन्होंने विशेष उपलब्धियां भी प्राप्त की। दीपिका ने एशियन चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन किया और विजेता बनीं। वहीं जापान में हुई एशियन गेम्स में मेजबान टीम को हराकर देश को कांस्य पदक दिलवाया। दीपिका आज लड़कियों के हौसलों को परवान दे रही हैं। वे लड़कियों का आदर्श हैं और उन्हें मानकर शहर की लड़कियां अपनी मंजिल का रास्ता तय कर रही हैं।
पंकज चुघ अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी हैं, जो कि घर पर ही अपनी व परिवार की फिटनेस करवा रहे हैं। कभी योग से कभी जुम्बा से तो कभी कसरत से परिवार का ख्याल रख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय यूरोपियन मास्टर्स गेम्स, जोकि इटली के टोरिनो शहर में जुलाई 2019 में हुई थी, इसमें पंकज चुघ ने भारतीय मास्टर्स फुटबॉल टीम 40 प्लस के कोच एवं खिलाड़ी के रूप मे टीम का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय फुटबॉल टीम 40 प्लस ने पंकज चुघ के नेतृत्व में टीम ने सिल्वर मेडल अर्जित कर देश व रेलवे का नाम रोशन किया था। इससे पूर्व पंकज चुघ कॉलेज में भी फुटबॉल से नाकामी को किक मारकर जिंदगी से बाहर कर चुके हैं। जिला व प्रदेश स्तर पर कई मैच खेलने के बाद उन्होंने रेलवे नौकरी कर ली। रेलवे में नौकरी के बाद भी फुटबॉल के प्रति प्रतिभा व प्रेम कम नहीं हुआ। उन्होंने युवा खिलाड़ी तैयार किए और रेलवे की ओर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैच में भाग लेकर जिले, प्रदेश व देश का नाम रोशन किया। पंकज चुघ ने बताया कि उनका आदर्श उनके पिता नरेंद्र चुघ हैं, जिन्होंने उन्हें कभी हार मानने नहीं दिया।

शहर के मुक्केबाज नीरज गोयत किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। जिला स्तरीय प्रतियोगिता से शुरू हुए मुक्केबाज अब विश्व में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। कई राजकीय, राष्ट्रीय सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं नीरज जीत चुके हैं। नीरज जिले के युवाओं के लिए आदर्श हैं, जिसे आदर्श मानते हुए जिले के युवा भी इसमें अपना भाग्य बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। रेलवे में कार्यरत नीरज कई अंतरराष्ट्रीय मैच जीत चुके हैं। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के मुक्केबाजों ने उन्हें चुनौती थी। जिसके बाद वे इस चुनौती की तैयारी कर रहे थे कि बीच में कोरोना के कारण प्रतियोगिताएं बंद हो गईं। वहीं, हाल ही में नीरज गोयत ने दुबई में क्रिप्टो फाइट नाइट दुबई में अफ्रीकन मुक्केबाज को धूल चटाकर देश का नाम रोशन किया। वहीं नीरज ने सुपर स्टार फरहान अख्तर के साथ तूफान मूवी में भी मुक्केबाज की भूमिका में काम किया है। वहीं अनुराग कश्यप की मुक्केबाज मूवी से उन्होंने बॉलीवुड में प्रवेश किया था। वर्ष 2017 में भी उन्होंने नेटफ्लिक्स के साथ ‘अल्टीमेट बस्टमास्टर’ में काम किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed