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तीन दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का रंगारंग आगाज

Tue, 28 Feb 2017 11:48 PM IST
yamuna nagar beauro
yamuna nagar beauro Updated Tue, 28 Feb 2017 11:48 PM IST
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x - फोटो : amar uajala, yamuna nagar
गणपति शिक्षण संस्थान में मंगलवार को तीन दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का रंगारंग आगाज हुआ। इसका आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के सौजन्य से हो रहा है।
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बता दें कि सांग महोत्सव तीन मार्च तक मनाया जाएगा, जिसमें प्रदेश के चार विभिन्न कॉलेजों के प्रतिभागी हिस्सा लेकर हरिणायवीं संस्कृति की छटा बिखेरेंगे।
महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि बिलासपुर सरपंच चंद्रमोहन कटारिया ने दीप प्रज्वलित करके किया। कहा हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर बचाने व बढ़ाने हेतु कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का यह प्रयास सराहनीय है। संस्थान के डायरेक्टर जगमोहन ओबराय ने बताया हरियाणा के लोक नाट्य सांग, जिनका आधार रागनियां ही थी। धीरे-धीरे विलुप्त होते गए, परंतु आज रत्नावली के माध्यम से सांग फिर से जीवंत हो चुके हैं। इसी कला को जीवंत प्रस्तुत करने के लिए गणपति शिक्षण संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव के पहले दिवस पर राजकीय कॉलेज जींद की टीम ने पंडित मांगेराम द्वारा रचित जयमल फत्ता नामक सांग प्रस्तुत किया।
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संस्थान के चेयरमैन मनीष गर्ग ने बताया हरियाणा की लुप्त होती हुई संगीत शैलियों व धुनों को वापस लाने के लिए रत्नावली कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग का अथक प्रयास है। अब तक पूरे प्रदेश के युवा कलाकार और सांस्कृति प्रेमी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। रत्नावली की यह महायात्रा कई पड़ावों से होकर आई है। हरियाणा की चिरस्थापित कलाओं जैसे हरियाणवीं रागनियों सांग एवं लघुकथाएं, लोक गीत, भजन के साथ रत्नावली ने अपनी विधाओं में साहित्य से लेकर सामान्य ज्ञान, नृत्य, संगीत, लोक नाटय, ललित कलाओं एवं हरियाणवीं पॉप आदि नवीन कलाओं को भी अपनाया है। सांग महोत्सव की मुख्य बात यह है रत्नावली सांग महोत्सव में शिक्षण संस्थानों के युवा छात्र-छात्राएं ही हरियाणवीं संस्कृति से ओत-प्रोत कार्यक्रम में हिस्सा लेकर मुख्य भूमिका निभाते हैं। आधुनिकता के साथ चलते हुए रत्नावली अब सोसल नेटवर्किंग व इंटरनेट पर भी प्रभावशाली रूप से उपस्थित है। यह नाम देश-विदेश में हरियाणा की लोक संस्कृति एवं कला के दर्पण के रूप में जाना जाता है।
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बेटियों को हर क्षेत्र में बढ़ने के लिए किया प्रोत्साहित
राजकीय कालेज जींद के संचालक रणधीर सिंह ने सांग की शुरुआत एक रागनी गाकर की, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। जयमल फत्ता जोधपुर में राजा बिरमदेव राज किया करते थे। उनका छोटा भाई था मालदेव, दोनों भाई काबुल कंधार की लड़ाई में जाते हैं और वहां से चारे चीजे जीतकर लाते हैं, भूरा हाथी, जलियर घोड़ा, बोर कली का पलंग व रानी का डौला। मालदेव लड़ाई बीच में छोड़कर आ जाता है, इसलिए ये चार चीजें बीरमदेव के पास रह जाती हैं। कुछ दिन बाद बीरमदेव की मौत हो जाती है तो मालदेव भाभी से चार चीजों में अपना हक जताता है और धन-दौलत के चक्कर में भाई के लड़के जयमल को मरवाने का षड्यंत्र रचता है, लेकिन सच्चाई की ही जीत होती है। अंत में मालदेव की हार हुई और चारों चीजें जयमल को मिल जाती हैं। टीम के निदेशक उस्मान खान एवं कलाकार बिंटू, विजेंद्र सिंह, कपिल, प्रदीप, गुरनाम, प्रवेश, मनीया एवं शिव ने कथित सांग प्रस्तुत करदर्शकों को समां बांधा। सांग के समापन पर चेयरमैन मनीष बिंद्रा ने कलाकार टीम को पुरस्कार  देकर सम्मानित किया। मौके पर महासचिव सुभाष गौड, मास्टर चतरसिंह, डॉ. जगमोहन ऑबराय, हिमांशु गौड, पंकज ठाकुर, दिलबाग सिंह सहित सभी अध्यापक मौजूद रहे।
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