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Yamuna Nagar News: बेटे के अंतिम संस्कार के लिए तरसे पिता, गुरप्रीत की बेटी कर रही इंतजार

Fri, 21 Aug 2026 03:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 21 Aug 2026 03:23 AM IST
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Father yearns for son's last rites; Gurpreet's daughter is waiting.
गुरप्रीत सिंह। फाइल फोटो
छछरौली। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख क्या होगा कि उसका जवान बेटा दुनिया से चला जाए, लेकिन वह उसे अंतिम विदाई भी न दे सके। यमुनानगर जिले के पंजेटो गांव में गुरप्रीत सिंह के परिवार की हालत कुछ ऐसी ही है। 19 जुलाई को यूक्रेन में रूसी मिसाइल हमले में गुरप्रीत की मौत हो गई थी। इस हादसे को करीब एक माह बीत चुका है। अब तक उसका शव घर नहीं पहुंच पाया है। एक ओर जहां गुरप्रीत की पत्नी छह माह की मासूम बेटी के साथ पति के शव का इंतजार कर रही है वहीं उसके पिता बेटे के अंतिम संस्कार के लिए शव आने का इंतजार कर रहे हैं।
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गुरप्रीत के पिता कीर्तन सिंह सड़क हादसे में पहले ही दिव्यांग हो चुके हैं। बेटे की मौत के बाद उनकी सबसे बड़ी इच्छा अब सिर्फ इतनी है कि वह गुरप्रीत को आखिरी बार देख सकें और अपने हाथों से उसका अंतिम संस्कार करें। परिवार का कहना है कि उन्हें मुआवजे या किसी अन्य आर्थिक सहायता से पहले अपने बेटे का शव चाहिए, ताकि पूरे रीति-रिवाज के साथ उसे अंतिम विदाई दी जा सके।
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डेढ़ माह पहले गया था विदेश
परिजनों के अनुसार गुरप्रीत करीब डेढ़ माह पहले मर्चेंट नेवी में नाविक के पद पर नौकरी करने के लिए यूक्रेन गया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह नौकरी कर घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी कम अवधि में ही उसकी मौत की खबर आ जाएगी। करीब डेढ़ साल पहले ही गुरप्रीत की शादी हुई थी। उसकी पत्नी और छह माह की मासूम बेटी अब उसके लौटने का इंतजार कर रही है। गुरप्रीत के पिता पहले ही सड़क हादसे में दिव्यांग हो चुके हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है। घर में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं होने के कारण बेटे की मौत ने परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया है।
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सरकार से शव जल्द भारत लाने की गुहार:
गुरप्रीत के माता-पिता और पत्नी ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर शव जल्द भारत लाने की गुहार लगाई है। परिजनों का कहना है कि करीब एक महीने से वे बेटे के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहे हैं। परिवार चाहता है कि गुरप्रीत का शव जल्द गांव लाया जाए, ताकि उसके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके। परिजनों की आंखें अब सरकार की ओर टिकी हैं। उनका कहना है कि बेटे को खोने का दर्द तो जिंदगी भर रहेगा, लेकिन कम से कम उन्हें अंतिम बार उसका चेहरा देखने और अपने हाथों से अंतिम विदाई देने का अवसर मिलना चाहिए। छह माह की मासूम बेटी के सिर से पिता का साया उठ चुका है और परिवार अब उसके शव के लौटने का इंतजार कर रहा है। संवाद

गुरप्रीत सिंह। फाइल फोटो

गुरप्रीत सिंह। फाइल फोटो

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