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टिवन सिटी से निकलने वाले कूड़े से अब बनेगी बिजली और खाद
yamunanagar beuro
Updated Fri, 26 May 2017 11:27 PM IST
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- फोटो : yamunanagar
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ट्विन सिटी से निकलने वाले कूड़े से अब खाद के साथ-साथ बिजली बनाई जाएगी। प्रदेश सरकार के निर्देश पर निगम प्रशासन ने इस दिशा में कवायद शुरू कर दी है। बंद पड़े सालिड वेस्ट मेनजमेंट प्लांट की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। वहीं, प्लांट के आसपास जमा सैकड़ों टन कूड़ा भी खप जाएगा। कूड़े से बिजली बनाने के साथ-साथ कूड़े से खाद भी बनाई जाएगी।
ट्विन सिटी से प्रतिदिन करीब 250 टन कूड़ा निकलता है। संसाधनों व स्टाफ की कमी के चलते इसमें से लगभग आधा कूड़ा ही उठ पा रहा है। ट्विन सिटी से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने के लिए अंबाला रोड पर कैल गांव के नजदीक करीब एक दशक पहले 23 करोड़ की लागत से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया था। पिछले 10 सालों में यह प्लांट बमुश्किल दो साल ही चल पाया है। स्थिति यह है कि प्लांट के आसपास कूड़े के पहाड़ बन चुके हैं। प्लांट के भीतर और आसपास पड़े सैकड़ों टन कूड़े को आग लगाई जा रही है। इससे आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है। प्लांट पूरी तरह कूड़े से अट जाने पर सफाई कर्मचारी शहर में इधर-उधर खाली जगहों पर कूड़ा फेंक रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।
नहीं बिक पाई प्लांट में बनी खाद
यमुनानगर व जगाधरी शहर से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने के लिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू किया गया था ताकि तत्कालीन नगर परिषदों की आय हो सके। लेकिन प्लांट में कुछ दिन ही कूड़े से खाद बन पाई। जानकारों के मुताबिक प्लांट में बनी खाद की नियमित बिक्री नहीं हो पाई। इससे प्लांट में खाद बनाने का काम बंद कर दिया गया।
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प्लांट न चल पाने से कबाड़ हो रही मशीनरी
नगर निगम बनने से पहले यमुनानगर और जगाधरी शहर मेें अलग-अलग नगर परिषदें थी। उस दौरान यमुनानगर व जगाधरी शहर से निकलने वाले कूड़े को इधर-उधर खाली प्लाटों में ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर शहर के बाहरी इलाकों में डंप कर दिया जाता था। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार की स्कीम के तहत जगाधरी में कैल गांव के नजदीक करीब 23 करोड़ की लागत से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया गया था। इस प्लांट में कूड़े को अलग-अलग कर इससे खाद बनाई जाती थी। पहले तो प्लांट शुरू होने में ही कई साल लग गए। प्लांट शुरू होने के बाद कभी स्टाफ, कभी पेमेंट तो कभी बिजली कनेक्शन कट जाने से अधिकतर प्लांट की मशीनें बंद ही रही। मौजूदा समय में भी करीब एक साल से प्लांट बंद पड़ा है। इससे प्लांट की मशीनरी भी कबाड़ हो रही है।
प्रदेश के बंद पड़े सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को दोबारा चालू करने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। वेस्ट मैनजमेंट प्लांट में खाद बनाने के साथ-साथ कूड़े से बिजली बनाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए प्रदेश में विभिन्न कलस्टर बनाए गए हैं। यमुनानगर, पेहवा व कुरुक्षेत्र का एक कलस्टर बनाया गया है।
गिरीश अरोड़ा, आयुक्त, यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम
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ट्विन सिटी से प्रतिदिन करीब 250 टन कूड़ा निकलता है। संसाधनों व स्टाफ की कमी के चलते इसमें से लगभग आधा कूड़ा ही उठ पा रहा है। ट्विन सिटी से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने के लिए अंबाला रोड पर कैल गांव के नजदीक करीब एक दशक पहले 23 करोड़ की लागत से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया था। पिछले 10 सालों में यह प्लांट बमुश्किल दो साल ही चल पाया है। स्थिति यह है कि प्लांट के आसपास कूड़े के पहाड़ बन चुके हैं। प्लांट के भीतर और आसपास पड़े सैकड़ों टन कूड़े को आग लगाई जा रही है। इससे आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है। प्लांट पूरी तरह कूड़े से अट जाने पर सफाई कर्मचारी शहर में इधर-उधर खाली जगहों पर कूड़ा फेंक रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।
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नहीं बिक पाई प्लांट में बनी खाद
यमुनानगर व जगाधरी शहर से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने के लिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू किया गया था ताकि तत्कालीन नगर परिषदों की आय हो सके। लेकिन प्लांट में कुछ दिन ही कूड़े से खाद बन पाई। जानकारों के मुताबिक प्लांट में बनी खाद की नियमित बिक्री नहीं हो पाई। इससे प्लांट में खाद बनाने का काम बंद कर दिया गया।
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प्लांट न चल पाने से कबाड़ हो रही मशीनरी
नगर निगम बनने से पहले यमुनानगर और जगाधरी शहर मेें अलग-अलग नगर परिषदें थी। उस दौरान यमुनानगर व जगाधरी शहर से निकलने वाले कूड़े को इधर-उधर खाली प्लाटों में ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर शहर के बाहरी इलाकों में डंप कर दिया जाता था। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार की स्कीम के तहत जगाधरी में कैल गांव के नजदीक करीब 23 करोड़ की लागत से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया गया था। इस प्लांट में कूड़े को अलग-अलग कर इससे खाद बनाई जाती थी। पहले तो प्लांट शुरू होने में ही कई साल लग गए। प्लांट शुरू होने के बाद कभी स्टाफ, कभी पेमेंट तो कभी बिजली कनेक्शन कट जाने से अधिकतर प्लांट की मशीनें बंद ही रही। मौजूदा समय में भी करीब एक साल से प्लांट बंद पड़ा है। इससे प्लांट की मशीनरी भी कबाड़ हो रही है।
प्रदेश के बंद पड़े सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को दोबारा चालू करने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। वेस्ट मैनजमेंट प्लांट में खाद बनाने के साथ-साथ कूड़े से बिजली बनाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए प्रदेश में विभिन्न कलस्टर बनाए गए हैं। यमुनानगर, पेहवा व कुरुक्षेत्र का एक कलस्टर बनाया गया है।
गिरीश अरोड़ा, आयुक्त, यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम