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Yamuna Nagar News: मां के कालरात्रि की पूजा से मिलेगा अभयदान
Fri, 04 Apr 2025 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 04 Apr 2025 01:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। नवरात्र के पांचवें दिन षष्ठी तिथि को मां के कात्यायनी स्वरूप की पूजा हुई। इस दौरान मंदिरों में काफी भीड़ देखने को मिली। शहर सहित जिले के तमाम मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा है। भक्तों के लिए तड़के चार बजे ही मंदिरों के कपाट खोल दिए गए थे। भोर में ही भक्तों ने आदिशक्ति मां दुर्गा की स्तुति कर शीश नवाया।
मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़ से नगरी जय माता दी के घोष से गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने महाशक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा के सम्मुख ज्योति प्रज्ज्वलित कर परिवार के मंगल की कमाना की। दिनभर मंदिरों में भक्तों का आना जारी रहा। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। नवरात्र के छठे दिन सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा के रौद्र रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।
वीरवार सुबह से ही जिले के सभी मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिली। पौराणिक व ऐतिहासिक मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शहर में सबसे ज्यादा भीड़ जगाधरी के ऐतिहासिक देवी भवन और यमुनानगर जगाधरी स्टेशन स्थित श्रीमूर्तिदेवी मंदिर में देखने को मिल रही है। नवरात्र के चलते सभी मंदिरों में प्रात: व संध्याकालीन विशेष पूजन व आरती की जा रही है। सुबह-शाम आरती के समय मंदिरों में सबसे ज्यादा भीड़ हो रही है।
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मंदिरों के अलावा लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। प्रात: स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर भक्तों ने मां कात्यायनी की पूजा की। मां कात्यायनी की पूजा से वैवाहिक जीवन व विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। वहीं, शुक्रवार को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। यह मां का रौद्ररूप है, जो माता रानी ने दुष्टों का नाश करने के लिए धारण किया था। मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा भक्तों को ज्ञात-अज्ञात सभी शत्रुओं से रक्षा करती है और बिगड़े काम बनते हैं।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां के सातवें रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। यह मां का रौद्ररूप दुष्टों का नाश व भक्तों की रक्षा करने वाला है। मां कालरात्रि की पूजा व उपासना को लेकर कई भ्रांतियां हैं। परंतु मां यह क्रुध रूप दुष्टों का नाश कर धर्म की स्थापना व भक्तों पर ममता व करुणा बरसाने वाला है। मां कालरात्रि की पूजा से भक्तों को अभयदान मिलता है।
शत्रु व अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। मां के इस रूप की पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रात: उठकर स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चौकी पर गंगाजल छिड़कर शुद्धि करें आसन बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करें। कलश पूजन करने के बाद दीप प्रज्ज्वलित करें।
उसके बाद मां कालरात्रि को जल, फूल, अक्षत, धूप, दीप, गंध, फल, कुमकुम, सिंदूर इत्यादि अर्पित करें। मां को लाल पुष्प अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए लाल पुष्प अर्पित करें। गुड़हल का पुष्प अर्पित करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इसके बाद मां का ध्यान कर मंत्र उच्चारण करें। दुर्गा चालीसा, मां कालरात्रि की कथा का पाठ करें। आरती से पूजन का समापन करें। मां को गुड़ या गुड़ से बने पदार्थों का भोग लगाना चाहिए। पूजन के बाद मां से भूल व गलतियों की क्षमायाचना करें।
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जगाधरी। नवरात्र के पांचवें दिन षष्ठी तिथि को मां के कात्यायनी स्वरूप की पूजा हुई। इस दौरान मंदिरों में काफी भीड़ देखने को मिली। शहर सहित जिले के तमाम मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा है। भक्तों के लिए तड़के चार बजे ही मंदिरों के कपाट खोल दिए गए थे। भोर में ही भक्तों ने आदिशक्ति मां दुर्गा की स्तुति कर शीश नवाया।
मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़ से नगरी जय माता दी के घोष से गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने महाशक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा के सम्मुख ज्योति प्रज्ज्वलित कर परिवार के मंगल की कमाना की। दिनभर मंदिरों में भक्तों का आना जारी रहा। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। नवरात्र के छठे दिन सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा के रौद्र रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।
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वीरवार सुबह से ही जिले के सभी मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिली। पौराणिक व ऐतिहासिक मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शहर में सबसे ज्यादा भीड़ जगाधरी के ऐतिहासिक देवी भवन और यमुनानगर जगाधरी स्टेशन स्थित श्रीमूर्तिदेवी मंदिर में देखने को मिल रही है। नवरात्र के चलते सभी मंदिरों में प्रात: व संध्याकालीन विशेष पूजन व आरती की जा रही है। सुबह-शाम आरती के समय मंदिरों में सबसे ज्यादा भीड़ हो रही है।
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मंदिरों के अलावा लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। प्रात: स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर भक्तों ने मां कात्यायनी की पूजा की। मां कात्यायनी की पूजा से वैवाहिक जीवन व विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। वहीं, शुक्रवार को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। यह मां का रौद्ररूप है, जो माता रानी ने दुष्टों का नाश करने के लिए धारण किया था। मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा भक्तों को ज्ञात-अज्ञात सभी शत्रुओं से रक्षा करती है और बिगड़े काम बनते हैं।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां के सातवें रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। यह मां का रौद्ररूप दुष्टों का नाश व भक्तों की रक्षा करने वाला है। मां कालरात्रि की पूजा व उपासना को लेकर कई भ्रांतियां हैं। परंतु मां यह क्रुध रूप दुष्टों का नाश कर धर्म की स्थापना व भक्तों पर ममता व करुणा बरसाने वाला है। मां कालरात्रि की पूजा से भक्तों को अभयदान मिलता है।
शत्रु व अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। मां के इस रूप की पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रात: उठकर स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चौकी पर गंगाजल छिड़कर शुद्धि करें आसन बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करें। कलश पूजन करने के बाद दीप प्रज्ज्वलित करें।
उसके बाद मां कालरात्रि को जल, फूल, अक्षत, धूप, दीप, गंध, फल, कुमकुम, सिंदूर इत्यादि अर्पित करें। मां को लाल पुष्प अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए लाल पुष्प अर्पित करें। गुड़हल का पुष्प अर्पित करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इसके बाद मां का ध्यान कर मंत्र उच्चारण करें। दुर्गा चालीसा, मां कालरात्रि की कथा का पाठ करें। आरती से पूजन का समापन करें। मां को गुड़ या गुड़ से बने पदार्थों का भोग लगाना चाहिए। पूजन के बाद मां से भूल व गलतियों की क्षमायाचना करें।