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Yamuna Nagar News: पश्चिम बंगाल में वोट डालने गए मजदूर नहीं लौटे, उद्यमियों पर दोहरी मार
Wed, 06 May 2026 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 06 May 2026 01:25 AM IST
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यमुनानगर में प्लाईवुड फैक्टरी के बाहर खड़ी लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्राली। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले की प्लाईवुड इंडस्ट्री इन दिनों दोहरी मार झेल रही है। एक ओर ईरान-अमेरिका और इस्राइल के बीच चल रहे तनाव के कारण प्लाईवुड में इस्तेमाल होने वाला केमिकल महंगे दामों पर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट डालने गए मजदूर अभी तक नहीं लौटे हैं। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है और उद्योगपति मुश्किलों से जूझ रहे हैं।
जिले में प्लाईवुड की करीब 350 इकाइयां संचालित हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के मजदूर काम करते हैं। इनमें से लगभग 30 प्रतिशत मजदूर पश्चिम बंगाल से आते हैं। चुनाव के चलते ये मजदूर अपने गृह राज्य वोट डालने के लिए गए थे, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद अब तक नहीं लौटे हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले उम्मीद थी कि चार मई को चुनावी परिणाम आने के बाद मजदूर पांच मई तक लौट आएंगे, लेकिन अब उनके 15 मई के आसपास ही आने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है, जिसके चलते वहां जश्न का माहौल बना हुआ है।
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इसी वजह से मजदूर अपने घरों में ही रुक गए हैं और लौटने में देरी कर रहे हैं। इस स्थिति ने यहां की फैक्टरियों में कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इकाइयों में उत्पादन घट गया है, जबकि कुछ जगहों पर काम लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है।
मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर श्रमिकों का इंतजाम करना पड़ रहा है। हालांकि, स्थानीय मजदूरों को डेली वेज पर रखना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। इससे पहले ही कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उद्योग दबाव में था, अब श्रमिक संकट ने स्थिति और गंभीर कर दी है।
वहीं प्लाईवुड निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के चलते इसकी कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। ऐसे में उद्योग पहले ही घाटे के दौर से गुजर रहा था, और अब मजदूरों की कमी ने परेशानी को और बढ़ा दिया है।
पश्चिम बंगाल में वोट डालने के लिए मजदूर गए थे। अभी तक वह नहीं लौटे हैं। चुनावी नतीजों के बाद माना जा रहा है कि मजदूर कम से कम 10 दिन और नहीं आएंगे। सभी की नजरें मजदूरों की वापसी पर टिकी हैं। उनके लौटने के बाद ही उत्पादन पटरी पर लौटने की उम्मीद है। - जेके बिहानी, अध्यक्ष, प्लाईवुड एसोसिएशन यमुनानगर।
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यमुनानगर। जिले की प्लाईवुड इंडस्ट्री इन दिनों दोहरी मार झेल रही है। एक ओर ईरान-अमेरिका और इस्राइल के बीच चल रहे तनाव के कारण प्लाईवुड में इस्तेमाल होने वाला केमिकल महंगे दामों पर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वोट डालने गए मजदूर अभी तक नहीं लौटे हैं। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है और उद्योगपति मुश्किलों से जूझ रहे हैं।
जिले में प्लाईवुड की करीब 350 इकाइयां संचालित हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के मजदूर काम करते हैं। इनमें से लगभग 30 प्रतिशत मजदूर पश्चिम बंगाल से आते हैं। चुनाव के चलते ये मजदूर अपने गृह राज्य वोट डालने के लिए गए थे, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद अब तक नहीं लौटे हैं।
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उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले उम्मीद थी कि चार मई को चुनावी परिणाम आने के बाद मजदूर पांच मई तक लौट आएंगे, लेकिन अब उनके 15 मई के आसपास ही आने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है, जिसके चलते वहां जश्न का माहौल बना हुआ है।
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इसी वजह से मजदूर अपने घरों में ही रुक गए हैं और लौटने में देरी कर रहे हैं। इस स्थिति ने यहां की फैक्टरियों में कामकाज को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इकाइयों में उत्पादन घट गया है, जबकि कुछ जगहों पर काम लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है।
मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर श्रमिकों का इंतजाम करना पड़ रहा है। हालांकि, स्थानीय मजदूरों को डेली वेज पर रखना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। इससे पहले ही कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उद्योग दबाव में था, अब श्रमिक संकट ने स्थिति और गंभीर कर दी है।
वहीं प्लाईवुड निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के चलते इसकी कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। ऐसे में उद्योग पहले ही घाटे के दौर से गुजर रहा था, और अब मजदूरों की कमी ने परेशानी को और बढ़ा दिया है।
पश्चिम बंगाल में वोट डालने के लिए मजदूर गए थे। अभी तक वह नहीं लौटे हैं। चुनावी नतीजों के बाद माना जा रहा है कि मजदूर कम से कम 10 दिन और नहीं आएंगे। सभी की नजरें मजदूरों की वापसी पर टिकी हैं। उनके लौटने के बाद ही उत्पादन पटरी पर लौटने की उम्मीद है। - जेके बिहानी, अध्यक्ष, प्लाईवुड एसोसिएशन यमुनानगर।