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Yamuna Nagar News: कड़ाके की ठंड में महिलाओं में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा
Mon, 19 Jan 2026 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 19 Jan 2026 01:06 AM IST
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सिविल अस्पताल की ओपीडी में लगी भीड़। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। कड़ाके की ठंड गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा रही है। इससे विशेष कर ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ा है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इससे अधिक और तेजी से प्रभावित हो रहीं हैं। महिलाओं में चिड़चिड़ापन, पोस्टपार्टम ब्लूज (उदासी, घबराहट, अकेलापन) के मामले बढ़े हैं।
जिला नागरिक अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि इन दिनों ऐसी परेशानियां लेकर सात से आठ महिलाएं अस्पताल पहुंच रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कड़ाके की ठंड और धूप की कमी है। उन्होंने बताया कि कई दिन से धूप न निकलने के कारण शरीर में विटामिन-डी की कमी, पीड़ा, नींद की कमी इत्यादि मामले सामान्य रूप से देखने को मिल रहे हैं।
इसके अलावा ठंड से रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न से हृदय रोग, सांस की समस्याएं (निमोनिया, ब्रोंकियोलाइटिस) जोड़ों का दर्द और हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान गिरना) दिक्कतें भी आम हो रही हैं। यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से स्वास्थ्य पर असर डालती हैं। यदि किसी को ऐसे लक्ष्य दिखे तो पर्याप्त सावधानी और चिकित्सीय परामर्श अवश्य लें।
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उन्होंने बताया कि सर्दियों में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं में देखने को मिलता है। बुखार, लगातार थकान, मुंह और आंखों का सूखना, धूप में निकलने पर खुजली, त्वचा पर चकत्ते, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इत्यादि लक्ष्ण अधिक सामने आते हैं। इसके अलावा ठंड में महिलाओं में गर्भपात की घटनाएं भी अधिक देखी जाती हैं।
ऐसे लक्षण दिखते ही चिकित्सीय सलाह लें और इलाज करवाएं। कड़ाके की ठंड, लगातार धूप न निकलना के साथ घरेलू काम, पानी संबंधी काम करने से शरीर पर इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसी सर्दी में गर्म पानी का इस्तेमाल करें। ऑटोइम्यून बीमारियों के बढ़ने के कई कारण हैं। इनमें जीवनशैली में बदलाव, वायु प्रदूषण, विटामिन-डी की कमी और हाइजीन हाइपोथिसिस इत्यादि कारक शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि विटामिन-डी के लिए कैप्सूल, लिक्वेड और टेबलेट उपलब्ध हैं। इनका सेवन करके इसकी कमी पूरी की जा सकती है। इसके साथ संतुलित आहार लें, जंक फूड का प्रयोग बिल्कुल न करें। मौसमी सब्जियां व फल खाने से बहुत फायदा होगा।
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जगाधरी। कड़ाके की ठंड गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा रही है। इससे विशेष कर ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ा है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इससे अधिक और तेजी से प्रभावित हो रहीं हैं। महिलाओं में चिड़चिड़ापन, पोस्टपार्टम ब्लूज (उदासी, घबराहट, अकेलापन) के मामले बढ़े हैं।
जिला नागरिक अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि इन दिनों ऐसी परेशानियां लेकर सात से आठ महिलाएं अस्पताल पहुंच रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कड़ाके की ठंड और धूप की कमी है। उन्होंने बताया कि कई दिन से धूप न निकलने के कारण शरीर में विटामिन-डी की कमी, पीड़ा, नींद की कमी इत्यादि मामले सामान्य रूप से देखने को मिल रहे हैं।
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इसके अलावा ठंड से रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न से हृदय रोग, सांस की समस्याएं (निमोनिया, ब्रोंकियोलाइटिस) जोड़ों का दर्द और हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान गिरना) दिक्कतें भी आम हो रही हैं। यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से स्वास्थ्य पर असर डालती हैं। यदि किसी को ऐसे लक्ष्य दिखे तो पर्याप्त सावधानी और चिकित्सीय परामर्श अवश्य लें।
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उन्होंने बताया कि सर्दियों में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं में देखने को मिलता है। बुखार, लगातार थकान, मुंह और आंखों का सूखना, धूप में निकलने पर खुजली, त्वचा पर चकत्ते, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इत्यादि लक्ष्ण अधिक सामने आते हैं। इसके अलावा ठंड में महिलाओं में गर्भपात की घटनाएं भी अधिक देखी जाती हैं।
ऐसे लक्षण दिखते ही चिकित्सीय सलाह लें और इलाज करवाएं। कड़ाके की ठंड, लगातार धूप न निकलना के साथ घरेलू काम, पानी संबंधी काम करने से शरीर पर इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसी सर्दी में गर्म पानी का इस्तेमाल करें। ऑटोइम्यून बीमारियों के बढ़ने के कई कारण हैं। इनमें जीवनशैली में बदलाव, वायु प्रदूषण, विटामिन-डी की कमी और हाइजीन हाइपोथिसिस इत्यादि कारक शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि विटामिन-डी के लिए कैप्सूल, लिक्वेड और टेबलेट उपलब्ध हैं। इनका सेवन करके इसकी कमी पूरी की जा सकती है। इसके साथ संतुलित आहार लें, जंक फूड का प्रयोग बिल्कुल न करें। मौसमी सब्जियां व फल खाने से बहुत फायदा होगा।