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महागौरी की पूजा संग कन्या भोज सिद्ध करेगा मनोरथ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 01:27 AM IST
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With the prayer of Mahagauri, the girl's feast will prove the desire , Yamunanagar
ग्रीन पार्क कॉलोनी में संकीर्तन के दौरान भजन करते श्रद्धालु। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। आठवां नवरात्र बुधवार को है। अष्टमी पर मां महागौरी और कंजक पूजन का विधान है। कंजक पूजन के दौरान कन्याओं को भोजन करवा कर नवरात्र व्रत पूर्ण किए जाते हैं। इसे दुर्गाष्टमी व महाष्टमी भी कहा जाता है। यह दिन मां महागौरी को समर्पित है।
पंडित उदयवीर शास्त्री ने बताया कि महागौरी आदि शक्ति पर्वती का रूप है। माता का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां गौरी दांपत्य प्रेम की देवी हैं। मां महागौरी की पूजा करते समय पीले या सफेद वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। महागौरी का पूजन करते समय पीले फूल अर्पित करने चाहिए। वहीं दंपति मां महागौरी की पूजा एक साथ करें तो आपसी प्रेम के साथ घर में सुख, संपदा, शांति का वास होता है।
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वहीं सातवें नवरात्र पर मंगलवार को श्रद्धालुओं ने मां के महाकाली स्वरूप की पूजा की। इस दौरान विभिन्न कॉलोनियों में संकीर्तन व भजन संध्याएं भी की गई। शहर की ग्रीन पार्क कॉलोनी में देवेंद्र मेहता के घर ग्रीन पार्क महिला संकीर्तन मंडली की ओर से भजन संध्या की गई। इस दौरान महिलाओं ने भजनों से मां की महिमा का गुणगान किया। संकीर्तन में अल्का मेहता, तुषार मेहता, कंचन मेहता, ज्योति मेहता, डिम्पी, मधु दत्ता, ललिता, मंजू बहल, पूनम भल्ला सहित अन्य उपस्थित रहे।
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इस तरह करें मां महागौरी की पूजा
पंडित उदयवीर शास्त्री ने बताया कि सुबह सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होएं। पीले अथवा सफेद स्वच्छ कपड़े धारण करें। इसके बाद चौकी पर माता महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित क गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। इसके बाद चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद महाष्टमी या दुर्गाष्टमी व्रत का संकल्प लें और मंत्र का जाप करते हुए मां महागौरी समेत समस्त देवी-देवताओं का ध्यान करें। अब मां महागौरी का आह्वान, आसन, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दूर्वा, आभूषण, फूल, धूप, दीप, फल, पान, दक्षिणा, आरती इत्यादि अर्पित करें। 108 बार मां के महामंत्र का जाप करें।

इस तरह करें कंजक पूजन
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि दुर्गा अष्टमी एवं नवमी दोनों दिन ही कंजक पूजन का विधान है। व्रत धारण के अनुरूप कंजक पूजन किया जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है। चूंकि मां वैष्णो ने कन्या रूप में ही भक्त को दर्शन दिए और अन्य कन्याओं को भोजन करवाया था। उन्होंने बताया कि बालिकाओं का ही कंजक पूजन किया जाता है। 11 वर्ष से कम आयु की कन्याओं को बालिका कहा जाता है। कंजक पूजन के लिए कन्याओं को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें। आगमन पर जल लेकर अपने हाथों से उनके चरण पखारें। इसके बाद पूजन स्थल के पास उन्हें आसान दें। उसके सामने धूप दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद मां महागौरी को लगाया गए व्यंजनों के भोग का प्रसाद कन्याओं को परोसे। कन्याओं के भोजन के बाद उन्हें सामर्थ अनुसार दक्षिणा व उपहार दें। उनके सामने शीश झुका कर नमन करें और आशीर्वाद लें।
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