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सैकड़ों गांवों में लंपी वायरस का प्रकोप
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साढौरा स्थित गोशाला में लंपी वायरस की चपेट में आए गोवंश को देखते प्रबंधक। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लंपी वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। पशुपालन विभाग से मिल रहे आंकड़े और भी डराने वाले हैं। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले के 488 गांवों में लंपी वायरस पांव पसार लिए हैं। जबकि जिले में कुल गांवों की संख्या 655 हैं। यानि 75 प्रतिशत गांवों को लंपी वायरस चपेट में ले चुका हैं। यदि रोकथाम नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह बीमारी हर गांव तक फैल सकती है।
वहीं तेजी से बढ़ रहे संक्रमण से पशुपालक चिंतित हैं। डॉक्टरों के पास जाते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि बीमारी में पशुओं को वैक्सीन नहीं लगा सकते। वैक्सीन लगाई तो बीमारी और भी ज्यादा फैल सकती है। ऐसे में पशुपालक केवल अपने स्तर पर ही बीमार पशुओं की जान को बचाने का प्रयास करने में लगे हैं।
लंबी वायरस के संक्रमण को रोक पाने में पशुपालन विभाग पूरी तरह से बेबस नजर आ रहा है। विभाग में पहले ही पशु चिकित्सकों का काफी टोटा है। डाक्टरों के पास लगातार पशुपालकों के फोन आ रहे हैं, लेकिन वह पूरे दिन में भी बीमार पशुओं का चेकअप करने नहीं जा पा रहे। जब डॉक्टर मौके पर नहीं जा पाते तो वह लोगों को एक ही जवाब दे रहे हैं कि बीमार पशु को दूसरे स्वस्थ्य पशुओं से अलग कर दें।
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पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके पशु बाड़ों में इतनी जगह नहीं है कि वह बीमार व स्वस्थ पशुओं को अलग-अलग बांध सकें। किसी के पास एक कमरा है तो किसी के पास खुला बरामदा। बीमार व स्वस्थ पशु सारा दिन एक ही जगह पर बंधे रहते हैं। जिस कारण संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। रही सही कसर लावारिस पशुओं ने पूरी कर दी है। लावारिस गोवंश भी लंपी वायरस की चपेट में है। संक्रमित पशु दिनभर गांवों की गली-गली घूमते हैं। कई बार तो गली में बंधे स्वस्थ पशुओं के पास ही बैठ जाते हैं, जिससे संक्रमण बहुत तीव्र गति से फैल रहा है।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि जिले के 488 गांवों के पशुओं में लंपी वायरस फैल चुका है। काफी पशु बीमारी से ठीक भी हो रहे हैं। पशुपालक जहां पर पशुओं को बांधते हैं वहां अच्छी तरह से साफ सफाई रखें। ताकि वायरस वहां न फैले। विभाग के डॉक्टर भी गांवों में बीमार पशुओं पर नजर रखे हुए हैं।
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यमुनानगर। लंपी वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। पशुपालन विभाग से मिल रहे आंकड़े और भी डराने वाले हैं। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले के 488 गांवों में लंपी वायरस पांव पसार लिए हैं। जबकि जिले में कुल गांवों की संख्या 655 हैं। यानि 75 प्रतिशत गांवों को लंपी वायरस चपेट में ले चुका हैं। यदि रोकथाम नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह बीमारी हर गांव तक फैल सकती है।
वहीं तेजी से बढ़ रहे संक्रमण से पशुपालक चिंतित हैं। डॉक्टरों के पास जाते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि बीमारी में पशुओं को वैक्सीन नहीं लगा सकते। वैक्सीन लगाई तो बीमारी और भी ज्यादा फैल सकती है। ऐसे में पशुपालक केवल अपने स्तर पर ही बीमार पशुओं की जान को बचाने का प्रयास करने में लगे हैं।
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लंबी वायरस के संक्रमण को रोक पाने में पशुपालन विभाग पूरी तरह से बेबस नजर आ रहा है। विभाग में पहले ही पशु चिकित्सकों का काफी टोटा है। डाक्टरों के पास लगातार पशुपालकों के फोन आ रहे हैं, लेकिन वह पूरे दिन में भी बीमार पशुओं का चेकअप करने नहीं जा पा रहे। जब डॉक्टर मौके पर नहीं जा पाते तो वह लोगों को एक ही जवाब दे रहे हैं कि बीमार पशु को दूसरे स्वस्थ्य पशुओं से अलग कर दें।
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पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके पशु बाड़ों में इतनी जगह नहीं है कि वह बीमार व स्वस्थ पशुओं को अलग-अलग बांध सकें। किसी के पास एक कमरा है तो किसी के पास खुला बरामदा। बीमार व स्वस्थ पशु सारा दिन एक ही जगह पर बंधे रहते हैं। जिस कारण संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। रही सही कसर लावारिस पशुओं ने पूरी कर दी है। लावारिस गोवंश भी लंपी वायरस की चपेट में है। संक्रमित पशु दिनभर गांवों की गली-गली घूमते हैं। कई बार तो गली में बंधे स्वस्थ पशुओं के पास ही बैठ जाते हैं, जिससे संक्रमण बहुत तीव्र गति से फैल रहा है।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि जिले के 488 गांवों के पशुओं में लंपी वायरस फैल चुका है। काफी पशु बीमारी से ठीक भी हो रहे हैं। पशुपालक जहां पर पशुओं को बांधते हैं वहां अच्छी तरह से साफ सफाई रखें। ताकि वायरस वहां न फैले। विभाग के डॉक्टर भी गांवों में बीमार पशुओं पर नजर रखे हुए हैं।