Yamunanagar: विरोध के बाद भी कोटला की पंचायत ने स्कूल के अंदर बनाया नाला, लापरवाही से बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
कोटला में स्कूल के आसपास पानी की निकासी न होने से गांव के घरों व खेतों का पानी स्कूल में प्रवेश कर जाता है। इस बारे में कई बार विभाग को अवगत करवाया गया है, परंतु समाधान न हो पाने के कारण अब बारिश होने से स्कूल में ज्यादा पानी आ गया है
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यमुनानगर के ब्लॉक साढौरा के कोटला राजकीय प्राथमिक पाठशाला में अब बारिश और नाले से जो हालात बने हैं, वह पंचायत की देन हैं। प्रबंधक कमेटी के विरोध के बाद भी पंचायत ने नियमों को ताक पर रख स्कूल के अंदर से डेढ़ साल पहले लगभग 250 फीट लंबा नाला बना दिया। नियमानुसार स्कूल के अंदर से नाला नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में विद्यार्थियों की पाठशाला लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। स्कूल में पानी जमा हो जाने के कारण कमरों में दरारें पड़ने लगी हैं जो बच्चों के लिए खतरा बन सकती है। इस समस्या के बारे में प्राइमरी स्कूल के इंचार्ज की तरफ से शिक्षा विभाग को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन समाधान नहीं हो पाया।
स्कूल में घुस रहा खेत का भी पानी
स्कूल के आसपास पानी की निकासी न होने से गांव के घरों व खेतों का पानी स्कूल में प्रवेश कर जाता है। इस बारे में कई बार विभाग को अवगत करवाया गया है, परंतु समाधान न हो पाने के कारण अब बारिश होने से स्कूल में ज्यादा पानी आ गया है। बारिश और नाले का गंदा पानी स्कूल ग्राउंड के अलावा प्राइमरी पाठशाला की कमरों में भर गया है जिससे वहां रखा सामान खराब होने लगा है। स्कूल की टाट पट्टी, बैंच, दस्तावेज व खेल आदि का सामान भी खराब हो गया। स्कूल के अंदर से गुजर रहे नाले का गंदा पानी बारिश के पानी के साथ अब स्कूल में बनी आंगनबाड़ी में भी घुस आया है। जिसके चलते वहां का सामान भी तैरने लगा है। व्यवस्था न होने के चलते अब आंगनबाड़ी को गांव के ग्राम सचिवालय में शिफ्ट किया गया है।
बच्चे बीमार हुए तो उठाया मुद्दा
कोटला गांव के ही सतिंद्र कुमार के बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। जब टूटे नाले के गंदे पानी के चलते बच्चे बीमार होने लगे तो उन्होंने स्कूल से गुजर रहे नाले को बंद करने का मुद्दा उठाया। सतिंद्र कुमार ने बताया कि नाला नियमों को ताक पर रख बनाया गया है। उन्होंने इसकी जानकारी के लिए शिक्षा विभाग में आरटीआई भी लगाई थी जिसमें जवाब मिला स्कूल प्रबंधक कमेटी के एतराज के बाद भी यह नाला बनाया गया है। वहीं लापरवाही और अनदेखी का खामियाजा आज विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
कहीं और से नहीं थी निकासी
गांव की निवर्तमान सरपंच नसीमा खातुन का कहना है कि पहले यहीं से पानी निकल रहा था और कहीं से पानी की निकासी नहीं थी। इसलिए यहीं पर नाला बनाया गया। नाले के ऊपर पक्की स्लैब भी डाली गई है। जब नाला बन रहा था किसी ने भी कोई विरोध नहीं किया था। अप्रूवल लेकर ही नाला बनाया गया है।
बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
राजकीय प्राथमिक पाठशाला के इंचार्ज मदन बताते हैं कि डेढ़ साल पहले नाला बनाया गया था और एक साल से नाला टूटा पड़ा है। इसका गंदा पानी स्कूल में आ रहा है जिससे बदबू आती है। स्कूल के बाहर तो क्या अंदर बैठना मुश्किल हो गया है। इस समस्या के बारे में बाकायदा शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को भी शिकायत दी जा चुकी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। बारिश के दिनों में कमरों में पानी भरने से सेकेंडरी स्कूल के बरामदे या फिर व्यायामशाला की टीन के नीचे बच्चों को पढ़ाया जाता है।
इस समस्या के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन समस्या गंभीर है। बच्चों के भविष्य को देखते हुए इस समस्या का समाधान कराया जाएगा। अगर स्कूल की बिल्डिंग नीचे है तो प्रस्ताव बनाकर भरत कराया जाएगा। -प्रेम सिंह पूनिया, जिला शिक्षा अधिकारी।