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मॉडल संस्कृति स्कूल में दाखिला लेने पर हंगामा
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कैंप स्थित मॉडल संस्कृति स्कूल में मंगलवार को सीबीएसआई के दाखिले किए जा रहे थे और यहां अभिभावकों हिंदी माध्यम में दाखिला न मिलने को लेकर हंगामा किया। इस दौरान अभिभावकों ने जमकर नारेबाजी की। अभिभावकों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही वार्ड-17 की पार्षद वीना शर्मा और वार्ड-13 की पार्षद निर्मल चौहान भी मौके पर पहुंच गई। हंगामा इतना बढ़ गया कि जिला शिक्षा अधिकारी को मौके पर आना पड़ा। यहां लोगों ने जिला शिक्षा अधिकारी के सामने समस्या रखी।
अभिभावक रजनी, मोनिका, प्रीति, सोनिया, नवीन, रवि कुमार ने बताया कि यह क्षेत्र का सबसे बड़ा स्कूल है। जिसमें कैंप, पुराना हमीदा, जम्मू कॉलोनी, गांधीनगर, चांदपुर, जोड़िया तक के बच्चे पढ़ते हैं। सरकार ने इसे मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा दे दिया है। जिससे लोग खुश हैं, लेकिन ऐसा करने से कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए हैं। अभिभावकों ने कहा कि सरकार ने इसे अंग्रेजी माध्यम बना दिया है, जबकि हिंदी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों को अब यहां दाखिला नहीं मिल रहा है। यह क्षेत्र का सबसे बड़ा स्कूल है और यहां पर बच्चों की संख्या भी अधिक है। अब सीबीएसई माध्यम होने के बाद उनके बच्चों को यहां दाखिला नहीं दिया जा रहा है।
पार्षद निर्मल चौहान व वीना शर्मा ने कहा कि सीबीएसई माध्यम से सभी बच्चे नहीं बढ़ना चाहते हैं। शिक्षा सभी का मौलिक अधिकार है। अब हिंदी माध्यम से शिक्षा पाने के इच्छुक विद्यार्थियों को दूर जाना होगा। उन्होंने कहा कि यहां पर अधिकतर निम्म स्तर के लोग रहते हैं। वे न तो सीबीएसई की फीस दे सकते हैं और खर्च वहन कर सकते हैं। ऐसे में वे बच्चों को हिंदी माध्यम में पढ़ाना चाहते हैं।
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सरकार ने इसे मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा दिया है। इसी नियम के तहत यहां पर दाखिले किए जा रहे हैं। जबकि अभिभावक यहां पर हिंदी माध्यम में दाखिले की मांग लेकर पहुंचे थे। अभिभावकों की समस्या को निदेशालय तक पहुंचाया जा रहा है। निर्देश होंगे कार्य किया जाएगा। कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रह पाएगा।
सतपाल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी।
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अभिभावक रजनी, मोनिका, प्रीति, सोनिया, नवीन, रवि कुमार ने बताया कि यह क्षेत्र का सबसे बड़ा स्कूल है। जिसमें कैंप, पुराना हमीदा, जम्मू कॉलोनी, गांधीनगर, चांदपुर, जोड़िया तक के बच्चे पढ़ते हैं। सरकार ने इसे मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा दे दिया है। जिससे लोग खुश हैं, लेकिन ऐसा करने से कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए हैं। अभिभावकों ने कहा कि सरकार ने इसे अंग्रेजी माध्यम बना दिया है, जबकि हिंदी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों को अब यहां दाखिला नहीं मिल रहा है। यह क्षेत्र का सबसे बड़ा स्कूल है और यहां पर बच्चों की संख्या भी अधिक है। अब सीबीएसई माध्यम होने के बाद उनके बच्चों को यहां दाखिला नहीं दिया जा रहा है।
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पार्षद निर्मल चौहान व वीना शर्मा ने कहा कि सीबीएसई माध्यम से सभी बच्चे नहीं बढ़ना चाहते हैं। शिक्षा सभी का मौलिक अधिकार है। अब हिंदी माध्यम से शिक्षा पाने के इच्छुक विद्यार्थियों को दूर जाना होगा। उन्होंने कहा कि यहां पर अधिकतर निम्म स्तर के लोग रहते हैं। वे न तो सीबीएसई की फीस दे सकते हैं और खर्च वहन कर सकते हैं। ऐसे में वे बच्चों को हिंदी माध्यम में पढ़ाना चाहते हैं।
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सरकार ने इसे मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा दिया है। इसी नियम के तहत यहां पर दाखिले किए जा रहे हैं। जबकि अभिभावक यहां पर हिंदी माध्यम में दाखिले की मांग लेकर पहुंचे थे। अभिभावकों की समस्या को निदेशालय तक पहुंचाया जा रहा है। निर्देश होंगे कार्य किया जाएगा। कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रह पाएगा।
सतपाल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी।