फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Types of penance explained to Jain devotees

Yamuna Nagar News: जैन श्रद्धालुओं को बताए तप के प्रकार

Sun, 15 Sep 2024 03:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 15 Sep 2024 03:07 AM IST
विज्ञापन
Types of penance explained to Jain devotees
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 57वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता में श्रीकृष्ण महाराज ने कहा है कि तप तीन प्रकार का होता है, राजसिक, तामसिक और सात्विक तप।
उन्होंने बताया कि जो तप मनोकामना पूर्ण करने के लिए किया जाता है उसे राजसिक तप कहते हैं जो तप किसी को कष्ट देने के लिए किया जाता है या किसी का अहित करने के लिए किया जाता है वह तामसिक तप कहलाता है। जो तप कर्म निर्जरा के लिए और सिर्फ आत्म कल्याण के लिए किया जाता है वह सात्विक तप कहलाता है।
विज्ञापन

कपड़े को शुद्ध करना हो तो साबुन पानी से धोकर हम कर लेते हैं, लोहा आग में तपकर शुद्ध किया जाता है,सोने को शुद्ध करने के लिए अग्नि में तपाया जाता है।आग में तप कर ही सोना कुंदन बनता है। हर चीज को शुद्ध करने का अलग-अलग तरीका होता है कोई चीज पानी से कोई चीज पेट्रोल से और कोई चीज अग्नि से साफ होती है, ऐसे ही आत्मा की शुद्धि तपस्या से होती है महा साध्वी श्री ने कहा हमें सिर्फ कर्मों की निर्जरा करने के लिए ही तप करना चाहिए।तप के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं
विज्ञापन
विज्ञापन

शारीरिक तप, यह तप शारीरिक साधनों द्वारा किया जाता है, जैसे कि योग, प्राणायाम, और शारीरिक संयम। मानसिक तप, यह तप मानसिक साधनों द्वारा किया जाता है, जैसे कि ध्यान, एकाग्रता, और मानसिक संयम। आध्यात्मिक तप, यह तप आध्यात्मिक साधनों द्वारा किया जाता है, जैसे कि प्रार्थना, जप, और आध्यात्मिक संयम।
इन तीनों प्रकार के तप का उद्देश्य आत्म-सुधार, आत्म-ज्ञान, और आत्म-विकास होता है। इसके अलावा, तप के और भी कई प्रकार हो सकते हैं, जैसे कि नियमित तप, यह तप नियमित रूप से किया जाता है। अनियमित तप, यह तप अनियमित रूप से किया जाता है। संयम तप, यह तप संयम और आत्मनियंत्रण के माध्यम से किया जाता है।

वैराग्य तप, यह तप वैराग्य और त्याग के माध्यम से किया जाता है। अंत में साध्वी महाराज ने कहा कि गुरुओं की शरण में जाकर, सत्संग का साथ पाकर शुद्ध मन और अंतःकरण से यदि व्यक्ति आत्म कल्याण के लिए तप करता है तो निश्चित रूप से वह मोक्ष की प्राप्ति करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed