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मिड डे मिल पकाने के लिए स्कूलों को जारी किए दो करोड़, आज से मिलेगा भोजन
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यमुनानगर। एक माह के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद आज सभी राजकीय और निजी स्कूल खुल रहे हैं। सरकार और मुख्यालय ने एक जुलाई से स्कूलों में विद्यार्थियों को मिड-डे-मील परोसने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने इसके लिए बजट राशि भी जारी कर दी है। सरकार की ओर से जिले के 1100 स्कूलों के लिए दो करोड़ की राशि खातों में भेज दी गई है।
कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल बंद थे। इसके चलते विद्यार्थियों को मिड-डे-मील नहीं मिल पा रहा था। उसकी जगह राशन दिया जा रहा था। अब संक्रमण का प्रभाव कम होने और स्थिति सामान्य होने पर नियमित रूप से स्कूल खुल रहे हैं। ऐसे में सरकार ने विद्यार्थियों को मध्यांतर भोजन स्कूल में करवाने के आदेश दिए हैं। आदेशों को लेकर सभी प्रभारियों ने स्कूल का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया। इसके अलावा विभाग ने प्रतिदिन मिड-डे-मील पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या पोर्टल पर अपडेट करने के भी निर्देश दिए हैं। जिलास्तर पर योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए अधिकारियों ने इसकी जानकारी अपने व्हाट्सएप ग्रुप में भी शेयर करने को कहा है।
एक जुलाई से स्कूल खोलने के निर्देश हैं। वहीं स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन भी पकाया जाना है। ऐसे में अधिकारी, अध्यापक, कर्मचारी सभी इसकी तैयारी में जुटे रहे। अंतिम दिन अध्यापकों ने स्कूलों में कक्षा के कमरों, रसोई घर इत्यादि की सफाई की। शौचालयों की सफाई करवाई गई। सुबह से लेकर दोपहर तक अध्यापक इसमें व्यस्त रहे। इसके अलावा अधिकारियों ने प्रभारियों की बैठक लेकर उन्हें दिशा निर्देश भी दिए।
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प्राइमरी की 4.97 और मिडल की 7.45 रुपये भोजन लागत
सरकार की ओर से विभाग को भोजन की लागत जारी कर दी गई है। सरकार की ओर दो श्रेणियों में लागत विभाजित की गई है। मिड-डे-मील पकाने के लिए प्राइमरी और मिडल दो श्रेणियों में विद्यार्थियों को बांटा गया है। पहली से पांचवीं तक प्राइमरी के बच्चों को प्रतिदिन सौ ग्राम और छठी से आठवीं के बच्चों को डेढ़ सौ ग्राम पौष्टिक भोजन दिया जाना है। इस हिसाब से प्राइमरी के एक बच्चे का खाना बनाने के लिए 4.97 रुपये और मिडल के लिए 7.45 रुपये निर्धारित किए गए हैं। जिले में पहली से आठवीं तक के कुल 76845 बच्चों को मिड-डे-मील दिया जाना है।
वर्जन
एक जुलाई से स्कूल खुल रहे हैं। जिसकी सभी तैयारी कर ली गई है। मिड-डे-मील के लिए सरकार की ओर से पाक लागत भेज दी गई है। यह राशि सभी स्कूलों में वितरित कर दी गई है। बच्चों की संख्या के अनुसार प्रभारी इस धनराशि का प्रयोग करेंगे।
-पिरथी सैनी, उप जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल बंद थे। इसके चलते विद्यार्थियों को मिड-डे-मील नहीं मिल पा रहा था। उसकी जगह राशन दिया जा रहा था। अब संक्रमण का प्रभाव कम होने और स्थिति सामान्य होने पर नियमित रूप से स्कूल खुल रहे हैं। ऐसे में सरकार ने विद्यार्थियों को मध्यांतर भोजन स्कूल में करवाने के आदेश दिए हैं। आदेशों को लेकर सभी प्रभारियों ने स्कूल का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया। इसके अलावा विभाग ने प्रतिदिन मिड-डे-मील पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या पोर्टल पर अपडेट करने के भी निर्देश दिए हैं। जिलास्तर पर योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए अधिकारियों ने इसकी जानकारी अपने व्हाट्सएप ग्रुप में भी शेयर करने को कहा है।
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एक जुलाई से स्कूल खोलने के निर्देश हैं। वहीं स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन भी पकाया जाना है। ऐसे में अधिकारी, अध्यापक, कर्मचारी सभी इसकी तैयारी में जुटे रहे। अंतिम दिन अध्यापकों ने स्कूलों में कक्षा के कमरों, रसोई घर इत्यादि की सफाई की। शौचालयों की सफाई करवाई गई। सुबह से लेकर दोपहर तक अध्यापक इसमें व्यस्त रहे। इसके अलावा अधिकारियों ने प्रभारियों की बैठक लेकर उन्हें दिशा निर्देश भी दिए।
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प्राइमरी की 4.97 और मिडल की 7.45 रुपये भोजन लागत
सरकार की ओर से विभाग को भोजन की लागत जारी कर दी गई है। सरकार की ओर दो श्रेणियों में लागत विभाजित की गई है। मिड-डे-मील पकाने के लिए प्राइमरी और मिडल दो श्रेणियों में विद्यार्थियों को बांटा गया है। पहली से पांचवीं तक प्राइमरी के बच्चों को प्रतिदिन सौ ग्राम और छठी से आठवीं के बच्चों को डेढ़ सौ ग्राम पौष्टिक भोजन दिया जाना है। इस हिसाब से प्राइमरी के एक बच्चे का खाना बनाने के लिए 4.97 रुपये और मिडल के लिए 7.45 रुपये निर्धारित किए गए हैं। जिले में पहली से आठवीं तक के कुल 76845 बच्चों को मिड-डे-मील दिया जाना है।
वर्जन
एक जुलाई से स्कूल खुल रहे हैं। जिसकी सभी तैयारी कर ली गई है। मिड-डे-मील के लिए सरकार की ओर से पाक लागत भेज दी गई है। यह राशि सभी स्कूलों में वितरित कर दी गई है। बच्चों की संख्या के अनुसार प्रभारी इस धनराशि का प्रयोग करेंगे।
-पिरथी सैनी, उप जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।