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वास्तविक सुख बाहरी परिस्थितियों से नहीं : भावना
Mon, 02 Nov 2026 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 02 Nov 2026 12:56 AM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में साध्वी भावना भारती ने कहा कि हर मनुष्य सुख को केवल बाहरी परिस्थितियों, भौतिक वस्तुओं व सांसारिक उपलब्धियों में खोजता रहता है। वास्तविक सुख का स्रोत तो स्वयं उसके भीतर विद्यमान है।
साध्वी ने कहा कि यदि हम इन शब्दों के भाव को समझें तो सुख का संबंध सुंदर विचारों से है। जब मनुष्य के मन और मस्तिष्क में सुंदर, सकारात्मक एवं पवित्र विचारों का वास होता है, तो वह सुख का अनुभव करता है। इसके विपरीत जब मन में दूषित, नकारात्मक व विकृत विचार उत्पन्न होते हैं, तो वही मनुष्य दुख की अनुभूति करने लगता है।
उन्होंने कहा कि एक ही परिस्थिति में एक व्यक्ति प्रसन्न रह सकता है, जबकि दूसरा व्यक्ति दुखी हो सकता है। यदि सुख-दुख का आधार केवल बाहरी परिस्थितियां होतीं, तो एक समान परिस्थिति में सभी की अनुभूति भी समान होती। वास्तव में परिस्थितियां नहीं, बल्कि उन्हें देखने का हमारा दृष्टिकोण और मन की स्थिति हमारे सुख-दुख का निर्धारण करती है।
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साध्वी ने कहा कि मनुष्य जब तक अपने मन को सकारात्मक बनाने और विचारों को पवित्र करने का वास्तविक मार्ग नहीं जानता, तब तक वह स्थायी सुख की प्राप्ति नहीं कर सकता। यह आत्मिक परिवर्तन पूर्ण सद्गुरु की शरण में जाकर ही संभव है। गुरु का ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित करवाता है और उसे परमात्मा से जुड़ने का दिव्य मार्ग प्रदान करता है।
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में साध्वी भावना भारती ने कहा कि हर मनुष्य सुख को केवल बाहरी परिस्थितियों, भौतिक वस्तुओं व सांसारिक उपलब्धियों में खोजता रहता है। वास्तविक सुख का स्रोत तो स्वयं उसके भीतर विद्यमान है।
साध्वी ने कहा कि यदि हम इन शब्दों के भाव को समझें तो सुख का संबंध सुंदर विचारों से है। जब मनुष्य के मन और मस्तिष्क में सुंदर, सकारात्मक एवं पवित्र विचारों का वास होता है, तो वह सुख का अनुभव करता है। इसके विपरीत जब मन में दूषित, नकारात्मक व विकृत विचार उत्पन्न होते हैं, तो वही मनुष्य दुख की अनुभूति करने लगता है।
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उन्होंने कहा कि एक ही परिस्थिति में एक व्यक्ति प्रसन्न रह सकता है, जबकि दूसरा व्यक्ति दुखी हो सकता है। यदि सुख-दुख का आधार केवल बाहरी परिस्थितियां होतीं, तो एक समान परिस्थिति में सभी की अनुभूति भी समान होती। वास्तव में परिस्थितियां नहीं, बल्कि उन्हें देखने का हमारा दृष्टिकोण और मन की स्थिति हमारे सुख-दुख का निर्धारण करती है।
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साध्वी ने कहा कि मनुष्य जब तक अपने मन को सकारात्मक बनाने और विचारों को पवित्र करने का वास्तविक मार्ग नहीं जानता, तब तक वह स्थायी सुख की प्राप्ति नहीं कर सकता। यह आत्मिक परिवर्तन पूर्ण सद्गुरु की शरण में जाकर ही संभव है। गुरु का ब्रह्मज्ञान मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित करवाता है और उसे परमात्मा से जुड़ने का दिव्य मार्ग प्रदान करता है।