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Yamuna Nagar News: पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए कर रहे टोटके

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2025 12:37 AM IST
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tricks to protect animals from diseases
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। कुछ दिन पहले जिले में कहीं-कहीं पशुओं में मुंह-खुर बीमारी के लक्षण मिले थे। जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा। यह बीमारी और पशुओं को अपनी चपेट में न ले इससे पशुपालकों में डर का माहौल देखा जा रहा है। इससे बचने के लिए पशुपालक तरह-तरह के टोटके अपना रहे हैं। कहीं पशुओं के पास मछलियों को लटकाया जा रहा है तो कहीं मरे हुए पक्षियों को। यह टोटके पशुओं में लगने वाली बीमारियों को रोकने में कितने कारगर है इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पशुपालकों को घबराने की बिलकुल भी जरूरत नहीं हैं। इस बीमारी के कहीं भी ज्यादा केस नहीं हैं।
मुंह, खुर की बीमारी अक्सर पशुओं में आती है। इस बीमारी में पशुओं का मुंह पक जाता है। जिससे मुंह में छाले पड़ जाते हैं। जब तक यह बीमारी रहती है तब तक पशुओं के मुंह से लार टपकती रहती है। पशु की हालत इतनी खराब हो जाती है वह हरा चारा भी खाना छोड़ देते हैं। कई पशुओं को तो बुखार भी हो जाता है। चारा नहीं खाने से पशु दूध देना कम कर देता है। दूध उत्पादन कम होने से पशुपालकों को काफी नुकसान होता है।
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वहीं खुर की बीमारी होने पर पशुओं के पांवों में जख्म हो जाते हैं। जख्मों से खून बहने लगता है। पशुओं को उठने-बैठने में काफी परेशानी होती है। जख्मों पर बैठने वाली मक्खियां पशुओं को परेशान कर देती हैं। दूसरे पशु इसकी चपेट में न आ जाए इसके लिए संक्रमित पशुओं को अलग बांधना पड़ता है। यह बीमारी काफी खतरनाक होती है इसलिए पशुपालन विभाग की तरफ से हर साल सभी पशुओं को मुंह खुर की बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाई जाती है।
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नगर निगम के डेयरी कांप्लेक्स दड़वा के प्रधान जितेंद्र लांबा ने बताया कि करीब दो सप्ताह पहले उनकी भैंसों में मुंह-खुर की बीमारी लग गई थी। पशुओं ने चारा खाना छोड़ दिया तो दूध कम होने से उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ता। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों से पशुओं का उपचार कराया। अब पशु ठीक हुए हैं तो राहत मिली है। किसी ने डेयरी संचालकों को बताया था कि यदि मरी हुई मछलियों व पक्षियों को पशुओं के पास लटका दिया जाएगा तो यह बीमारी दोबारा पशुओं को नहीं लगती। इसलिए डेयरी कांप्लेक्स में काफी पशुपालक इस टोटके को अपना रहे हैं।

दिसंबर व जनवरी में मिलते चुनिंदा केस : डॉ. सतबीर सैनी
पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉक्टर सतबीर सैनी ने बताया कि पशुओं को मुंह-खुर बीमारी से बचाने के लिए हर साल वैक्सीन लगाई जाती है। दिसंबर व जनवरी माह में कहीं-कहीं चुनिंदा केस ही इस बीमारी के मिलते हैं। इसलिए पशुपालकों को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इस बीमारी में कोई टोटका काम नहीं करता। यदि किसी पशु में इस बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत पशुपालन विभाग के चिकित्सकों से संपर्क करें।
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