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Yamuna Nagar News: अंग्रेजों से बचाने के लिए भवन को दिया देवी मंदिर का रूप

Tue, 23 Sep 2025 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 23 Sep 2025 12:37 AM IST
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To protect it from the British, the building was given the form of a Devi temple.
मंदिर में स्थापित मां मनसा देवी की मूर्ति। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। करीब 225 साल पुराना जगाधरी का देवी भवन मंदिर नवरात्र में हर किसी की आस्था का केंद्र है। यहां क्षेत्र के ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालु में मंदिर में विराजमान माता मनसा देवी के चरणों में नतमस्तक होने आते हैं। मंदिर में शिव परिवार और श्रीकृष्ण-राधा की मूर्ति भी विराजमान है। वर्ष 1797 में मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था, जो 1803 में पूर्ण हुआ। मंदिर के निर्माण में बूड़िया रियासत के वजीर जवाहर मल खत्री का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बताते हैं कि 1797 से पहले बूड़िया रियासत के समय यहां पर एक सराय हुआ करती थी। यहां बने कमरों में यात्री व देर रात आने वाले लोग शरण लेते थे। देवी मंदिर का जो भवन है उसे एक आलीशान रूप दिया जा रहा था। मंदिर का निर्माण एक किले की तरह ही किया जा रहा था। उसी दौरान अंग्रेज भवन पर कब्जा लेने आए थे, लेकिन मंदिर की भव्यता और लोगों की आस्था ने उनके कदम रोक दिए और अंग्रेज बिना कब्जा लिए ही लौट गए थे।
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इसकी भनक जब बूड़िया रियासत के वजीर जवाहर मल खत्री को लगी तो उन्होंने इस भवन को मंदिर का रूप दे दिया। वर्ष 1803 में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने पर यहां मां मनसा देवी की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा की गई। आज मंदिर की भव्यता व मान्यता दूर-दराज तक विख्यात है।
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प्राचीन मंदिर होने के कारण शहर के बाजार को भी इसी नाम से जाना जाता है। उस दिन के बाद मंदिर के प्रति आस्था दिनोंदिन बढ़ती चली गई। मंदिर में नियमित रूप से पूजा अर्चना होने से न केवल आसपास के बल्कि दूर दराज के लोग भी यहां नतमस्तक होने लगे। मंदिर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात का विशेष ख्याल रखा जाता है।
मंदिर में वर्ष में दो बार मेला लगता है। नवरात्र की अष्टमी व नवमी के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं को माता के दर्शन के लिए लाइनों में व्यवस्था की जाती है। प्रांगण में शिव परिवार, राधा कृष्ण और काली माता की प्रतिमा भी विराजमान है और इनके प्रति भी लोगों की गहन आस्था है। मान्यता है कि माता मनसा देवी के चरणों में सच्चे दिल से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। लोग दूर-दराज से यहां अपनी सूखना उतारने के लिए आते हैं।

सुबह चार बजे खुल जाते हैं कपाट : अभिनव
देवी भवन मंदिर के पुजारी अभिनव ने बताया कि नवरात्र में सुबह व शाम दोनों समय माता की आरती की जा रही है। सुबह चार बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं। यहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। चैत्र व शारदीय नवरात्रो में यहां पर मेले का आयोजन होता है। नवरात्र के लिए मंदिर को रंग बिरंगी रोशनी से सजाया गया है।
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