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वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मुख्यमंत्री ने जिले के अधिकारियों को दिए विकास कार्य पूर्ण करने के निर्देश
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीडियो कांफ्रेंस से जिला उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली । उनके साथ उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जय प्रकाश दलाल भी मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जिले के विकास कार्यों का जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होेंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे जलभराव की स्थिति के स्थायी समाधान के लिए वाटर रिचार्ज पंप के लक्ष्य को पूरा करें और योजनाएं भी तैयार करें। उन्होंने धान व बाजरा खरीद की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मंडियों में किसानों को शेड्यूल के अनुसार फसल बेचने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। गेट पास कटने के 72 घंटे के बाद किसान की फसल का भुगतान करवाया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करें। उपायुक्त यह सुनिश्चित करें कि पराली प्रबंधन के जरिए बनाई गई गांठों को व्यवस्थित तरीके से प्लांटों तक पहुंचाया जाए। पराली की गांठ खरीदने और प्लांट तक यातायात व्यवस्था की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी गठित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक बार सभी उपकरणों के भौतिक सत्यापन का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा शेष रह चुके उपकरणों का सत्यापन 18 अक्टूबर तक करवा लिया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिस जिला में पराली जलाने की घटना होती है, वहां के उपायुक्त बनाई गई कमेटी की प्रतिदिन की रिपोर्ट प्राप्त करें और चालान भी करें। उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से कहा कि वे पहले यह सुनिश्चित करें कि जहां सरसों की बिजाई होनी है, उस क्षेत्र में डीएपी, एनपीके व एसएसपी खाद की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर करें। सरसों बिजाई क्षेत्र की रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय को भेजे ताकि खाद की आपूर्ति करवाई जा सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि ज्यादा बारिश और जलभराव के कारण जो सड़कें टूट गई हैं, उनकी मरम्मत 30 नवंबर तक हर हालत में कर ली जाए। इस मौके पर उपायुक्त पार्थ गुप्ता, नगर निगम कमिश्नर अजय सिंह तोमर, एसडीएम सुशील कुमार, डॉ. इंन्द्रजीत, जसपाल सिंह गिल, रामफल कटारिया, आरएस मित्तल, एलसी चौहान, कार्यकारी विनोद कुमार, कुशल पाल बूरा, डीडीए डॉ. जसविन्द्र सिंह और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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उन्होेंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे जलभराव की स्थिति के स्थायी समाधान के लिए वाटर रिचार्ज पंप के लक्ष्य को पूरा करें और योजनाएं भी तैयार करें। उन्होंने धान व बाजरा खरीद की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मंडियों में किसानों को शेड्यूल के अनुसार फसल बेचने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। गेट पास कटने के 72 घंटे के बाद किसान की फसल का भुगतान करवाया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करें। उपायुक्त यह सुनिश्चित करें कि पराली प्रबंधन के जरिए बनाई गई गांठों को व्यवस्थित तरीके से प्लांटों तक पहुंचाया जाए। पराली की गांठ खरीदने और प्लांट तक यातायात व्यवस्था की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी गठित होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि एक बार सभी उपकरणों के भौतिक सत्यापन का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा शेष रह चुके उपकरणों का सत्यापन 18 अक्टूबर तक करवा लिया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिस जिला में पराली जलाने की घटना होती है, वहां के उपायुक्त बनाई गई कमेटी की प्रतिदिन की रिपोर्ट प्राप्त करें और चालान भी करें। उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से कहा कि वे पहले यह सुनिश्चित करें कि जहां सरसों की बिजाई होनी है, उस क्षेत्र में डीएपी, एनपीके व एसएसपी खाद की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर करें। सरसों बिजाई क्षेत्र की रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय को भेजे ताकि खाद की आपूर्ति करवाई जा सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि ज्यादा बारिश और जलभराव के कारण जो सड़कें टूट गई हैं, उनकी मरम्मत 30 नवंबर तक हर हालत में कर ली जाए। इस मौके पर उपायुक्त पार्थ गुप्ता, नगर निगम कमिश्नर अजय सिंह तोमर, एसडीएम सुशील कुमार, डॉ. इंन्द्रजीत, जसपाल सिंह गिल, रामफल कटारिया, आरएस मित्तल, एलसी चौहान, कार्यकारी विनोद कुमार, कुशल पाल बूरा, डीडीए डॉ. जसविन्द्र सिंह और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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