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सुरक्षा के लिए लगाएं सीमेंटेड ब्लॉक बहने से हथिनीकुंड बैराज और तटबंध के लिए खतरा बढ़ा
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यमुना में वीरवार को जलस्तर घटने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है और लोगों को भी लगा कि आफत टल गई, लेकिन इस पानी के उतर जाने के बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसने सभी को चौंका दिया है। दरअसल बुधवार को एक लाख 60 हजार क्यूसेक जो पानी यमुना नदी में आया था, उसने हथनीकुंड बैराज के तटबंध की सुरक्षात्मक सरंचना यानी स्पर और स्टड को क्षतिग्रस्त कर दिया और इसको काफी नुकसान पहुंचाया है। अब यह आशंका जताई जा रही है कि यदि सुरक्षात्मक संरचना के लिए बनाएं गए सीसी ब्लॉक की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो यह पानी को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। ऐसे में अगर एक बार फिर से पहाड़ों में बरसात हुई तो तटबंध भी क्षतिग्रस्त होगा। जिसकी चलते तटबंध में दरार आ सकती है और यह टूट भी सकता है। यदि तटबंध टूटा तो यमुना का सारा पानी जिले में घुस जाएगा और बाढ़ जैसे हालात हो जाएंगे। वहीं हथिनीकुंड बैराज को भी नुकसान पहुंच सकता है। इस साल पुणे स्थित जल आयोग के रिसर्च सेंटर से अनुमति नहीं मिलने की वजह से सिंचाई विभाग की तरफ से हथिनीकुंड बैराज और तटबंध की सुरक्षा के लिए मरम्मत का कोई काम भी नहीं हुआ। जिसके चलते सीमेंटेड ब्लॉक डेढ़ लाख क्यूसेक का बहाव भी नहीं झेल सके और स्थिति खतरनाक बन गई।
सिंचाई विभाग की तरफ से प्रोजेक्ट बनाकर जल आयोग के रिसर्च सेंटर में भेजा गया था, लेकिन वहां से अनुमति नहीं मिली। जिसके चलते हथिनी कुंड बैराज पर इस बार मरम्मत कार्य नहीं हो पाया। अब हथिनी कुंड बैराज की सुरक्षा राम भरोसे है। जब तक वहां से अनुमति नहीं मिल मिलती, तब तक सिंचाई विभाग यहां कोई कार्य नहीं कर सकता। मरम्मत कार्य न होना हथिनी कुंड बैराज के लिए खतरे की घंटी है। विभागीय जानकारी के अनुसार जब से यह पुल बनकर तैयार हुआ है तब से हर वर्ष 4 से 5 करोड़ रुपये का यहां मरम्मत कार्य करवाया जाता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लगभग 20 दिन पहले भी विभाग की तरफ से यहां पर होने वाले मरम्मत कार्यों के लिए अनुमति मांगी गई थी। हर बार इसकी मंजूरी वाटर कमीशन रिसर्च सेंटर द्वारा ही दी जाती है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब रिसर्च सेंटर की तरफ से अनुमति नहीं मिली।
सिंचाई विभाग की तरफ से लगाए गए सूचना पटों को भी लोग अनदेखा कर यमुना में उतर रहे हैं। यहां कुछ लोग मछलियां पकड़ रहे हैं तो कुछ नहा रहे हैं, लेकिन विभाग की तरफ से अलर्ट जारी किया हुआ है कि कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर यमुना में उतर रहे हैं।
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सिंचाई विभाग यमुना जल सेवाएं के एसडीओ धर्मपाल सिंह ने बताया कि हथिनी कुंड बैराज के नीचे व आसपास मरम्मत कार्य करवाने के लिए पुणे के रिसर्च सेंटर से अनुमति लेनी पड़ती है। हर वर्ष हथिनी कुंड बैराज पर लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिवर्ष मरम्मत कार्य होता आया है। हमने प्रपोजल बनाकर रिसर्च सेंटर भेजा हुआ है। जैसे ही अनुमति मिलेगी तो बरसात के सीजन के बाद मरम्मत कार्य करवा दिया जाएगा। अभी बारिश चल रही है, इसलिए कार्य संभव नहीं है। हथिनी कुंड बैराज पुल की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है।
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सिंचाई विभाग की तरफ से प्रोजेक्ट बनाकर जल आयोग के रिसर्च सेंटर में भेजा गया था, लेकिन वहां से अनुमति नहीं मिली। जिसके चलते हथिनी कुंड बैराज पर इस बार मरम्मत कार्य नहीं हो पाया। अब हथिनी कुंड बैराज की सुरक्षा राम भरोसे है। जब तक वहां से अनुमति नहीं मिल मिलती, तब तक सिंचाई विभाग यहां कोई कार्य नहीं कर सकता। मरम्मत कार्य न होना हथिनी कुंड बैराज के लिए खतरे की घंटी है। विभागीय जानकारी के अनुसार जब से यह पुल बनकर तैयार हुआ है तब से हर वर्ष 4 से 5 करोड़ रुपये का यहां मरम्मत कार्य करवाया जाता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लगभग 20 दिन पहले भी विभाग की तरफ से यहां पर होने वाले मरम्मत कार्यों के लिए अनुमति मांगी गई थी। हर बार इसकी मंजूरी वाटर कमीशन रिसर्च सेंटर द्वारा ही दी जाती है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब रिसर्च सेंटर की तरफ से अनुमति नहीं मिली।
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सिंचाई विभाग की तरफ से लगाए गए सूचना पटों को भी लोग अनदेखा कर यमुना में उतर रहे हैं। यहां कुछ लोग मछलियां पकड़ रहे हैं तो कुछ नहा रहे हैं, लेकिन विभाग की तरफ से अलर्ट जारी किया हुआ है कि कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर यमुना में उतर रहे हैं।
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सिंचाई विभाग यमुना जल सेवाएं के एसडीओ धर्मपाल सिंह ने बताया कि हथिनी कुंड बैराज के नीचे व आसपास मरम्मत कार्य करवाने के लिए पुणे के रिसर्च सेंटर से अनुमति लेनी पड़ती है। हर वर्ष हथिनी कुंड बैराज पर लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिवर्ष मरम्मत कार्य होता आया है। हमने प्रपोजल बनाकर रिसर्च सेंटर भेजा हुआ है। जैसे ही अनुमति मिलेगी तो बरसात के सीजन के बाद मरम्मत कार्य करवा दिया जाएगा। अभी बारिश चल रही है, इसलिए कार्य संभव नहीं है। हथिनी कुंड बैराज पुल की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है।