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इस बार दीपावली पर छाया स्वदेशी प्रेम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Oct 2022 12:33 AM IST
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This time on Deepawali, the shadow of indigenous love
जगाधरी। इस बार दीपावली पर स्वदेशी प्रेम खूब छाया हुआ है। बाजार से चाइनीज माल की छुट्टी हो गई है और देसी उत्पादों की बिक्री चार गुणा बढ़ गई है। देसी माल की बनावट, गुणवत्ता लोगों को खूब पसंद आ रही है। बाजार में तमाम तरह की मूर्तियां, झालर, सजावटी फूल व अन्य सजावट का सामान जो चाइना निर्मित होता था, वह बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है। उसकी जगह देसी सामान की खूब बिक्री हो रही है।
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भारत चाइना की सबसे बड़ी मंडी है। भारतीय त्योहारों पर चाइना में बना करोड़ों का माल हर बिकता था। इस कारण देसी कंपनियों व उद्यमियों को नुकसान हो रहा था। अब चाइनीज माल को लोगों ने दरकिनार कर दिया है। दुकानदार भी देसी माल बेचकर खुश हैं। दुकानदारों का कहना है देसी माल की गुणवत्ता चाइनीज से कहीं ज्यादा बेहतर है। टिकाऊ माल होने व देश के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लोग देसी माल की खरीदारी कर रहे हैं। इन दिनों दुकानों के अलावा जगाधरी के विभिन्न बाजारों में स्टॉल पर भी यह सामान उपलब्ध है।
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मिट्टी की मूर्तियां लोगों की पसंद
जगाधरी के दुकानदार प्रमोद कुमार ने बताया कि दीपावली भारतवासियों का सबसे प्रमुख त्योहार है। पूजन सहित तमाम खाद्य पदार्थों की खूब बिक्री होती है। कई सालों से बाजार पर चाइनीज माल का कब्जा था। सस्ते होने के चलते इनकी मांग बढ़ती जा रही थी। यहां तक की दीपावली पर मां लक्ष्मी, मां सरस्वती व भगवान गणेश की प्रतिमा तक मेक इन चाइना होती थी। यह केमिकल व सिंथेटिक फाइबर से बनी होती थीं। जो देखने में बहुत आकर्षक लगती थीं। यह पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाती थीं। अब लोगों ने मिट्टी की मूर्तियां लेना शुरू कर दिया है। हालांकि, यह मूर्तियां चाइनीज माल से 20 से 25 रुपये महंगी हैं लेकिन लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। वोकल फॉर लोकल का नारा लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इससे देसी माल की मांग बहुत बढ़ गई है।
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सजावटी सामान की भारी मांग
दीपावली पर हर व्यक्ति अपना घर, प्रतिष्ठान, कार्यालय सजाता है। रंगोली देश की पारंपरिक सजावटी पद्धति है। अब रंगों, मिट्टी, बुरादा से रंगोली कम बनाई जाती है। इसके लिए बाजार में कई तरह के विकल्प उपलब्ध हैं। इसमें डिजाइन के छापों की भारी मांग है। यह छाप दस रुपये लेकर 30 रुपये तक बिक रहे हैं। वहीं रंगों की विभिन्न किस्में भी हैं।
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