{"_id":"6771b5963bff60f12c0f2388","slug":"third-eye-will-prove-to-be-a-device-of-restraint-for-the-blind-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-130654-2024-12-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: नेत्रहीन के लिए तीसरी आंख साबित होगा संयम का डिवाइस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: नेत्रहीन के लिए तीसरी आंख साबित होगा संयम का डिवाइस
Mon, 30 Dec 2024 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 30 Dec 2024 02:18 AM IST
विज्ञापन
साहिल घई साढौरा (यमुनानगर)। राजकीय आदर्श संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 11वीं नॉन मेडिकल के विद्यार्थी संयम अग्रवाल की ओर से तैयार किया गया डिवाइस दृष्टिहीनों के लिए तीसरी आंख साबित हो सकता है। संयम अग्रवाल राई स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में चल रही 51वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में अपनी इस डिवाइस का प्रदर्शन कर रहे हैं।
खंड एवं जिला स्तर की प्रदर्शनियों में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद संयम अग्रवाल को इस राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए विशेष निमंत्रण दिया गया था। इस प्रदर्शनी में देश के करीब 600 बाल वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। इस प्रदर्शनी का निरीक्षण करने आए उच्चतर शिक्षा विभाग के निदेशक जितेंद्र कुमार ने भी संयम अग्रवाल की सराहना करते हुए उसे शाबाशी दी।
राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल गुरदीप गुलाटी ने बताया कि विज्ञान शिक्षक कंवलजीत सैनी के मार्गदर्शन में विद्यालय के छात्र संयम अग्रवाल ने यह डिवाइस तैयार की है। चश्मे के ऊपर ही माइक्रो कंप्यूटर सेंसर, अल्ट्रासोनिक सेंसर और कैमरे का इस्तेमाल करके संयम अग्रवाल ने यह डिवाइस बनाई है।
विज्ञापन
ये डिवाइस अल्ट्रासोनिक तरंगों का इस्तेमाल करके आसपास की चीजों के बारे में जानकारी देता है। चश्मे की तरह धारण की जा सकने वाली यह डिवाइस नेत्रहीनों को उनके रास्ते में आने वाली बाधाओं के बारे में बताता है। जब कोई वस्तु डिवाइस धारक के सामने आती है, तो डिवाइस बीप करके उसे सचेत कर देता है। वस्तु की दूरी कम होने के साथ डिवाइस से बीप की ध्वनि बढ़ जाती है और कंपन भी शुरू हो जाता है। डिवाइस का कैमरा गूगल और एआई की मदद से दृष्टिहीन को इस वस्तु व दूरी के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करता है।
कंवलजीत सैनी ने बताया कि इस डिवाइस में माइक्रो यंत्रों का इस्तेमाल किए जाने के कारण इसका वजन भी सहन करने योग्य ही है। इस डिवाइस पर लगभग चार हजार का खर्च आया है। व्यापक स्तर पर इसका निर्माण करने पर इसकी लागत और अधिक कम हो सकती है। पारिवारिक साधनों की कमी के बावजूद संयम अग्रवाल इस डिवाइस की खोज से अत्यंत उत्साहित है। उसके पिता अमृत लाल अग्रवाल ने कहा कि अगर मदद मिली तो इस डिवाइस का पेटेंट करवाने का प्रयास किया जाएगा। संयम अग्रवाल शिक्षा में अग्रणी रहने के साथ-साथ विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि में सक्रिय भागीदारी करता है।
अभी हाल ही में हुई खंड स्तरीय स्कूली खेलों में वह बेडमिंटन चैंपियन बना है। यही नहीं उसके द्वारा तैयार रडार के मॉडल ने पिछले साल खंड व जिला में प्रथम रहने के बाद राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में भी खूब वाहवाही जुटाई थी। संवाद
विज्ञापन
खंड एवं जिला स्तर की प्रदर्शनियों में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद संयम अग्रवाल को इस राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए विशेष निमंत्रण दिया गया था। इस प्रदर्शनी में देश के करीब 600 बाल वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। इस प्रदर्शनी का निरीक्षण करने आए उच्चतर शिक्षा विभाग के निदेशक जितेंद्र कुमार ने भी संयम अग्रवाल की सराहना करते हुए उसे शाबाशी दी।
विज्ञापन
राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल गुरदीप गुलाटी ने बताया कि विज्ञान शिक्षक कंवलजीत सैनी के मार्गदर्शन में विद्यालय के छात्र संयम अग्रवाल ने यह डिवाइस तैयार की है। चश्मे के ऊपर ही माइक्रो कंप्यूटर सेंसर, अल्ट्रासोनिक सेंसर और कैमरे का इस्तेमाल करके संयम अग्रवाल ने यह डिवाइस बनाई है।
विज्ञापन
ये डिवाइस अल्ट्रासोनिक तरंगों का इस्तेमाल करके आसपास की चीजों के बारे में जानकारी देता है। चश्मे की तरह धारण की जा सकने वाली यह डिवाइस नेत्रहीनों को उनके रास्ते में आने वाली बाधाओं के बारे में बताता है। जब कोई वस्तु डिवाइस धारक के सामने आती है, तो डिवाइस बीप करके उसे सचेत कर देता है। वस्तु की दूरी कम होने के साथ डिवाइस से बीप की ध्वनि बढ़ जाती है और कंपन भी शुरू हो जाता है। डिवाइस का कैमरा गूगल और एआई की मदद से दृष्टिहीन को इस वस्तु व दूरी के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करता है।
कंवलजीत सैनी ने बताया कि इस डिवाइस में माइक्रो यंत्रों का इस्तेमाल किए जाने के कारण इसका वजन भी सहन करने योग्य ही है। इस डिवाइस पर लगभग चार हजार का खर्च आया है। व्यापक स्तर पर इसका निर्माण करने पर इसकी लागत और अधिक कम हो सकती है। पारिवारिक साधनों की कमी के बावजूद संयम अग्रवाल इस डिवाइस की खोज से अत्यंत उत्साहित है। उसके पिता अमृत लाल अग्रवाल ने कहा कि अगर मदद मिली तो इस डिवाइस का पेटेंट करवाने का प्रयास किया जाएगा। संयम अग्रवाल शिक्षा में अग्रणी रहने के साथ-साथ विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि में सक्रिय भागीदारी करता है।
अभी हाल ही में हुई खंड स्तरीय स्कूली खेलों में वह बेडमिंटन चैंपियन बना है। यही नहीं उसके द्वारा तैयार रडार के मॉडल ने पिछले साल खंड व जिला में प्रथम रहने के बाद राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में भी खूब वाहवाही जुटाई थी। संवाद