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Yamuna Nagar News: दिवाली पर मालिकाना हक मिलने की थी आस, पर अफसर नहीं दे रहे जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Nov 2023 01:19 AM IST
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There was hope of getting ownership rights on Diwali, but officers are not giving answers
शहर के सबसे पुराने मीराबाई बाजार में 20 साल या उससे पुराने किरायेदारों को दिवाली पर नगर निगम की दुकानों का मालिकाना हक मिलने की आस थी, पर ऐसा होता नहीं दिख रहा। क्योंकि यहां मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना का लाभ मिलने से ऐन पहले जमीनी पेंच फंस गया, जिसका मसला गत आठ माह में भी नहीं सुलझ पाया है। ऐसे में बाजार के करीब 50 किरायेदारों को योजना के तहत आवेदन करने के दो वर्षों में भी दुकानों का मालिकाना हक नहीं मिला। उनका आरोप है कि एक साल से निगम अफसरों के दफ्तरों के चक्कर लग रहे हैं, पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा कि योजना लाभ मिलेगा या नहीं। बता दें कि जून-2021 में सीएम मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना शुरू की थी। इसके तहत नगर निगम की दुकानों के 20 या उससे अधिक वर्ष पुराने किरायेदारों को कलेक्टर रेट पर दुकानों का मालिकाना हक देने का प्रावधान है। इसमें 31 दिसंबर 2020 को 20 साल पूरे होने की अवधि निर्धारित की गई थी। इस हिसाब से नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत 1545 किरायेदार योजना के पात्र माने गए, पर लांच किए पोर्टल पर 674 ने ही आवेदन किए। इसमें करीब 50 मीराबाई बाजार से हैं, जिन्हें योजना लाभ मिलने से पहले जमीनी पेंच फंसा हुआ है। क्योंकि योजना के तहत जब किरायेदारों को दुकानें बेचने का समय आया, तब अफसरों ने यहां की जमीन रेलवे की बता दी थी। साथ ही यहां के किरायेदारों को योजना का लाभ कैसे दिया जाए, इस संबंध में मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया था।
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मीराबाई बाजार व्यापार एसोसिएशन के प्रेस प्रवक्ता राजकुमार शर्मा ने बताया कि मीराबाई बाजार में करीब 600 किरायेदार हैं, जिसमें करीब 60 ने स्वामित्व योजना में आवेदन किया। जिन्होंने कलेक्टर रेट पर दुकानें खरीदने के लिए दो साल पहले दस्तावेज से लेकर धन राशि जुटाने के लिए खूब एड़ियां घिसी। अब अन्य जगह के किरायेदारों की दुकानों की रजिस्ट्रियां हो रही हैं, पर मीराबाई बाजार से आवेदन करने वाले किरायेदारों को यहां की जमीन रेलवे की बताकर योजना लाभ से वंचित रख दिया गया। जबकि पहले बाजार में फड़ी-दुकानें लगाने के एवज में नगर पालिका व नगर निगम ने तहबाजारी और किराये भी वसूले। किरायेदार सालभर से दुकानों की रजिस्ट्री अपने नाम कराने के लिए लोन व ब्याज पर पैसा उठाए बैठे हैं, जिन्हें दिवाली तक दुकानों का मालिकाना हक मिलने की आस थी, पर अफसर स्पष्ट जवाब भी नहीं दे रहे हैं कि उन्हें योजना लाभ मिलेगा या नहीं।
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इस बारे में संबंधित अफसरों से बात करेंगे। जो भी नियमानुसार कार्रवाई बनेगी, वह अमल में लाई जाएगी।
- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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