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Yamuna Nagar News: तीन मंजिला कार्यालय में नहीं रैंप, दिव्यांग परेशान
Mon, 11 Aug 2025 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 11 Aug 2025 12:25 AM IST
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सिविल सर्जन कार्यालय में व्यक्ति का सहारा लेकर सीढि़यां चढ़ता दिव्यांग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सिविल सर्जन और पीएमओ कार्यालय में आने जाने वाले दिव्यांगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह सिविल सर्जन कार्यालय के मुख्य गेट पर दिव्यांगों के लिए रैंप ही नहीं है। रैंप न होने से दिव्यांगों को लोगों की मदद लेकर किसी तरह सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं।
रोजाना दिव्यांगों को इसी तरह जद्दोजहद करके सिविल सर्जन, पीएमओ कार्यालय में जाना पड़ रहा है। परंतु स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कभी लोगों की इस समस्या की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। सिविल सर्जन कार्यालय तीन मंजिला है। इसी भवन में पीएमओ कार्यालय भी है। साथ ही एंबुलेंस कंट्रोल रूम, आधार कार्ड केंद्र, एनएचएम कार्यालय, डिप्टी सिविल सर्जन कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण दफ्तर हैं।
सिविल सर्जन कार्यालय के मुख्य गेट दिव्यांगों के लिए रैंप की सुविधा ही नहीं है। इस भवन में रैंप केवल मीटिंग हॉल की तरफ बनाया गया है। यहां बने रैंप के पास जो दरवाजा लगा है वह अक्सर बंद ही रहता है। इसलिए दिव्यांग पहले इस रैंप के पास जाते हैं और दरवाजा बंद देख कर लौट जाते हैं। इसके बाद उन्हें कार्यालय के मुख्य गेट पर जाना पड़ता है, वहां पर रैंप ही नहीं है।
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सीढि़यां चढ़ने से ही दिव्यांग हांफने लगते हैं। रैंप तो है ही नहीं, साथ में यहां एक भी व्हील चेयर नहीं रखी गई है। यदि लिफ्ट बंद हो जाए तो कोई भी दिव्यांग सिविल सर्जन कार्यालय या फिर पीएमओ कार्यालय में पहुंच ही न पाएं, क्योंकि लिफ्ट के अलावा दूसरा एकमात्र विकल्प सीढि़यां ही हैं। दिव्यांगों को छह स्टेप चढ़ने में ही इतनी दिक्कत आती है तो खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तीन मंजिल तक जाने में दिव्यांगों पर क्या गुजरेगी।
रेडक्रॉस का कार्य केवल भारत सरकार की योजनाओं का पालना कराना है। किसी कार्यालय में रैंप क्यों नहीं बने या फिर वह गलत बने हैं इस बारे में सिविल सर्जन ही जानकारी दे सकते हैं। - रणदीप सिंह, सचिव, रेडक्रॉस यमुनानगर।
नक्शे के हिसाब से ही मेरे कार्यालय व अस्पताल में रैंप बना है। नक्शे के अनुसार भवन निर्माण पूरा होने पर ही पीडब्ल्यूडी से भवन टेकओवर किया गया था। रैंप में क्या दिक्कत है इस बारे में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं। - डॉ. मंजीत सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।
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यमुनानगर। सिविल सर्जन और पीएमओ कार्यालय में आने जाने वाले दिव्यांगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह सिविल सर्जन कार्यालय के मुख्य गेट पर दिव्यांगों के लिए रैंप ही नहीं है। रैंप न होने से दिव्यांगों को लोगों की मदद लेकर किसी तरह सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं।
रोजाना दिव्यांगों को इसी तरह जद्दोजहद करके सिविल सर्जन, पीएमओ कार्यालय में जाना पड़ रहा है। परंतु स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कभी लोगों की इस समस्या की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। सिविल सर्जन कार्यालय तीन मंजिला है। इसी भवन में पीएमओ कार्यालय भी है। साथ ही एंबुलेंस कंट्रोल रूम, आधार कार्ड केंद्र, एनएचएम कार्यालय, डिप्टी सिविल सर्जन कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण दफ्तर हैं।
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सिविल सर्जन कार्यालय के मुख्य गेट दिव्यांगों के लिए रैंप की सुविधा ही नहीं है। इस भवन में रैंप केवल मीटिंग हॉल की तरफ बनाया गया है। यहां बने रैंप के पास जो दरवाजा लगा है वह अक्सर बंद ही रहता है। इसलिए दिव्यांग पहले इस रैंप के पास जाते हैं और दरवाजा बंद देख कर लौट जाते हैं। इसके बाद उन्हें कार्यालय के मुख्य गेट पर जाना पड़ता है, वहां पर रैंप ही नहीं है।
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सीढि़यां चढ़ने से ही दिव्यांग हांफने लगते हैं। रैंप तो है ही नहीं, साथ में यहां एक भी व्हील चेयर नहीं रखी गई है। यदि लिफ्ट बंद हो जाए तो कोई भी दिव्यांग सिविल सर्जन कार्यालय या फिर पीएमओ कार्यालय में पहुंच ही न पाएं, क्योंकि लिफ्ट के अलावा दूसरा एकमात्र विकल्प सीढि़यां ही हैं। दिव्यांगों को छह स्टेप चढ़ने में ही इतनी दिक्कत आती है तो खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तीन मंजिल तक जाने में दिव्यांगों पर क्या गुजरेगी।
रेडक्रॉस का कार्य केवल भारत सरकार की योजनाओं का पालना कराना है। किसी कार्यालय में रैंप क्यों नहीं बने या फिर वह गलत बने हैं इस बारे में सिविल सर्जन ही जानकारी दे सकते हैं। - रणदीप सिंह, सचिव, रेडक्रॉस यमुनानगर।
नक्शे के हिसाब से ही मेरे कार्यालय व अस्पताल में रैंप बना है। नक्शे के अनुसार भवन निर्माण पूरा होने पर ही पीडब्ल्यूडी से भवन टेकओवर किया गया था। रैंप में क्या दिक्कत है इस बारे में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं। - डॉ. मंजीत सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।