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Yamuna Nagar News: कई पीढि़यों से मेले में स्नान, दीपदान की निभा रहे परंपरा
Wed, 13 Nov 2024 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 13 Nov 2024 02:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अंतरराज्यीय कपाल मोचन मेले के दूसरे दिन सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने व लौटने का सिलसिला रहा। क्योंकि काफी संख्या में श्रद्धालु मेला शुरू होने से एक-दो या तीन दिन पहले भी पहुंच गए थे। वहीं तमाम परिवार कई पीढि़यों से मेले में पहुंचने और स्नान, दीपदान व अन्य अनुष्ठान की परंपरा निभा रहे है।
पंजाब के लुधियाना से पहुंचे श्रद्धालु सरदूल सिंह, गुरसेवक ने बताया कि परिवार की कई पीढ़ियों से यहां कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में पहुंचने और स्नान, दीपदान व अन्य अनुष्ठान की परंपरा है। बड़े बुजुर्गों से तीर्थराज कपाल मोचन क्षेत्र व मेले का महत्व सुना है, जिसके बाद से हर साल मेले में आकर स्नान, दीपदान व अन्य अनुष्ठान जरूर करने पहुंचते हैं।
इस बार भी मेले में एकादशी पर स्नान किया और अब पूर्णिमा के स्नान तक यहां डेरा डाल लिया है। ऐसे ही मालेरकोटला से पहुंचे समेरचंद, भप्पी सिंह ने बताया कि दो दिन पहले ही यहां पहुंच गए थे और लगातार तीन दिन सरोवरों में स्नान, दीपदान सहित यहां बने तीर्थस्थलों के दर्शन करने के साथ यहां लगी दुकानों पर खरीदारी करने के बाद लौट रहे हैं।
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इसके अलावा हजारों श्रद्धालु मंगलवार को एकादशी पर तीनों पवित्र सरोवरों में स्नान करने के बाद तीर्थ स्थलों पर दीपदान, पूजन व दर्शन करने सहित खरीदारी कर लौटने लगे। साथ ही दूसरे दिन हजारों श्रद्धालुओं ने मेले में पहुंचकर पूर्णिमा के स्नान तक यहां लगे सैकड़ों तंबुओं और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं व संगठनों की धर्मशालाओं में डेरा डाल लिया है।
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यमुनानगर। अंतरराज्यीय कपाल मोचन मेले के दूसरे दिन सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने व लौटने का सिलसिला रहा। क्योंकि काफी संख्या में श्रद्धालु मेला शुरू होने से एक-दो या तीन दिन पहले भी पहुंच गए थे। वहीं तमाम परिवार कई पीढि़यों से मेले में पहुंचने और स्नान, दीपदान व अन्य अनुष्ठान की परंपरा निभा रहे है।
पंजाब के लुधियाना से पहुंचे श्रद्धालु सरदूल सिंह, गुरसेवक ने बताया कि परिवार की कई पीढ़ियों से यहां कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में पहुंचने और स्नान, दीपदान व अन्य अनुष्ठान की परंपरा है। बड़े बुजुर्गों से तीर्थराज कपाल मोचन क्षेत्र व मेले का महत्व सुना है, जिसके बाद से हर साल मेले में आकर स्नान, दीपदान व अन्य अनुष्ठान जरूर करने पहुंचते हैं।
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इस बार भी मेले में एकादशी पर स्नान किया और अब पूर्णिमा के स्नान तक यहां डेरा डाल लिया है। ऐसे ही मालेरकोटला से पहुंचे समेरचंद, भप्पी सिंह ने बताया कि दो दिन पहले ही यहां पहुंच गए थे और लगातार तीन दिन सरोवरों में स्नान, दीपदान सहित यहां बने तीर्थस्थलों के दर्शन करने के साथ यहां लगी दुकानों पर खरीदारी करने के बाद लौट रहे हैं।
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इसके अलावा हजारों श्रद्धालु मंगलवार को एकादशी पर तीनों पवित्र सरोवरों में स्नान करने के बाद तीर्थ स्थलों पर दीपदान, पूजन व दर्शन करने सहित खरीदारी कर लौटने लगे। साथ ही दूसरे दिन हजारों श्रद्धालुओं ने मेले में पहुंचकर पूर्णिमा के स्नान तक यहां लगे सैकड़ों तंबुओं और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं व संगठनों की धर्मशालाओं में डेरा डाल लिया है।