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Yamuna Nagar News: कथा में सुदामा और श्रीकृष्ण जी की मित्रता का प्रसंग सुनाया
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प्रवचन करती जीवानुगा शैलवासिनी दासी। संवाद
छछरौली। छछरौली में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता का समापन हो गया। श्री मद्भागवत कथामृत में वृंदावन से पधार कर प्रचारिका जीवानुगा शैलवासिनी दासी ने सातवें दिन की कथा में सुदामा, श्री कृष्ण जी का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण ने प्रेमवश सुदामा जी का चरणोदक भी पी लिया।
श्रीराम जी ने भी प्रेमवश ही शिवजी की पूजा की थी लेकिन भगवान इस सांसारिक जड़ प्रेम के वश में नहीं होते। जब कोई साधन भक्ति करते करते अंतःकरण की शुद्धि होने पर विशुद्ध सत्वमय प्राप्त कर लेता है। भगवान उस विशुद्ध सत्वमय प्रेम के वश होते हैं। हमें भगवान से प्रेम नहीं करना बल्कि भगवान का प्रेम प्राप्त करना है भगवान की भक्ति करके। कलयुग में भगवान की भक्ति करने का सबसे सरल उपाय हरिनाम है। हरिनाम जपने का अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति है।
मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य ही भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करना है। इस भव्य श्रीमद्भागवत कथामृत में विपुल अग्रवाल, कश्मीरी भारती, इंद्रसेन गुप्ता, विकास बंसल, रजत सिंगला, राकेश गुप्ता, संजय गोयल, विनय अग्रवाल, संजीव गुप्ता,सपन शर्मा और भक्तवृंद छछरौली के अन्य सदस्य सम्मिलित हुए।
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श्रीराम जी ने भी प्रेमवश ही शिवजी की पूजा की थी लेकिन भगवान इस सांसारिक जड़ प्रेम के वश में नहीं होते। जब कोई साधन भक्ति करते करते अंतःकरण की शुद्धि होने पर विशुद्ध सत्वमय प्राप्त कर लेता है। भगवान उस विशुद्ध सत्वमय प्रेम के वश होते हैं। हमें भगवान से प्रेम नहीं करना बल्कि भगवान का प्रेम प्राप्त करना है भगवान की भक्ति करके। कलयुग में भगवान की भक्ति करने का सबसे सरल उपाय हरिनाम है। हरिनाम जपने का अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति है।
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मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य ही भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करना है। इस भव्य श्रीमद्भागवत कथामृत में विपुल अग्रवाल, कश्मीरी भारती, इंद्रसेन गुप्ता, विकास बंसल, रजत सिंगला, राकेश गुप्ता, संजय गोयल, विनय अग्रवाल, संजीव गुप्ता,सपन शर्मा और भक्तवृंद छछरौली के अन्य सदस्य सम्मिलित हुए।
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