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Yamuna Nagar News: शिक्षा विभाग की सुस्ती अभिभावकों की जेब पर पड़ रही भारी
Fri, 28 Mar 2025 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:38 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिले के निजी स्कूलों की मनमानी अभिभावकों की जेब पर कैंची चला रही है। निजी स्कूलों में फीस ही नहीं बल्कि किताबों, कापी, डायरी, डाई-बेल्ट ही बल्कि जुराबों के नाम पर भी अभिभावकों से खूब पैसा ऐंठा जा रहा है। कार्रवाई करने वाले शिक्षा विभाग की चाल कछुआ से भी धीमी है। विभाग की लापरवाही अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है।
सबसे ज्यादा भार अभिभावकों पर किताबों का पड़ रहा है। प्री-नर्सरी, नर्सरी, केजी सहित पहली व दूसरी कक्षा की किताब पांच से सात हजार रुपये की मिल रही है। वर्कबुक के साथ एक किताब की कीमत 200 रुपये से कम नहीं है। यही नहीं स्पेशल लोगो वाली नोट बुक भी अभिभावकों को लेने के मजबूर किया जा रहा है। स्कूलों में इसके लिए विशेष टीम रखी गई है।
टीम के हर सदस्य की अलग ड्यूटी है। बच्चे का दाखिला आए अभिभावकों से यही विशेष टीम डील करती है। दाखिला करवाने के बाद अभिभावकों को किताबों व साल भर उपयोग की जाने वाली नोटबुक, ड्राइंग, डायरी सहित अन्य सामग्री की सूची दी जाती है। सूची देने के बाद टीम का एक सदस्य अभिभावकों को किताबें खरीदने के लिए निर्धारित दुकान के बारे जानकारी देता है।
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यही नहीं टीम सदस्य द्वारा अभिभावकों को कहा जाता है कि दुकान पर उसका नाम लेने से छूट भी मिलेगी। यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है और शिक्षा विभाग इसके प्रति आंखें मूंदें हुए है। जब तक विभाग जागृत अवस्था में लौटेगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। बता दें कि सभी स्कूलों की अपनी दुकानें निर्धारित हैं, जहां पर अभिभावकों को किताबें लेने के भेजा जाता है।
शिक्षा विभाग के पास इस पर कार्रवाई करने का अधिकार है। परंतु विभाग ऐसा नहीं करता है, बल्कि इसमें कानूनी पेंच फंसा देता है। इसके लिए अधिकारी कहते हैं कि अभिभावक ऐसे स्कूलों के खिलाफ शिकायत करें। शिकायत आने पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। परंतु अभिभावक ऐसा नहीं करना चाहते हैं, चूंकि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि वे संचालकों की शिकायत करते हैं तो स्कूलों में बच्चों को प्रताड़ित किया जाता है। यदि वे बच्चे का स्कूल भी बदलवा दें तो दूसरे स्कूल में भी यही हाल रहता है। चूंकि स्कूलों के नाम अलग हैं, जबकि सभी स्कूलों का प्रबंधन एक ही तरीके से काम करता है। वहीं इसमें स्कूलों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है। जिस कारण स्कूलों के हौसलें बुलंद हैं।
स्कूलों को मनमानी का अधिकार नहीं है। दाखिला सहित अन्य कार्य स्कूलों में निदेशालय के नियमों के अनुसार ही करवाने जरूरी है। अभिभावक किसी एक दुकान से किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसके लिए जांच दल गठित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - धर्मेंद्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। जिले के निजी स्कूलों की मनमानी अभिभावकों की जेब पर कैंची चला रही है। निजी स्कूलों में फीस ही नहीं बल्कि किताबों, कापी, डायरी, डाई-बेल्ट ही बल्कि जुराबों के नाम पर भी अभिभावकों से खूब पैसा ऐंठा जा रहा है। कार्रवाई करने वाले शिक्षा विभाग की चाल कछुआ से भी धीमी है। विभाग की लापरवाही अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है।
सबसे ज्यादा भार अभिभावकों पर किताबों का पड़ रहा है। प्री-नर्सरी, नर्सरी, केजी सहित पहली व दूसरी कक्षा की किताब पांच से सात हजार रुपये की मिल रही है। वर्कबुक के साथ एक किताब की कीमत 200 रुपये से कम नहीं है। यही नहीं स्पेशल लोगो वाली नोट बुक भी अभिभावकों को लेने के मजबूर किया जा रहा है। स्कूलों में इसके लिए विशेष टीम रखी गई है।
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टीम के हर सदस्य की अलग ड्यूटी है। बच्चे का दाखिला आए अभिभावकों से यही विशेष टीम डील करती है। दाखिला करवाने के बाद अभिभावकों को किताबों व साल भर उपयोग की जाने वाली नोटबुक, ड्राइंग, डायरी सहित अन्य सामग्री की सूची दी जाती है। सूची देने के बाद टीम का एक सदस्य अभिभावकों को किताबें खरीदने के लिए निर्धारित दुकान के बारे जानकारी देता है।
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यही नहीं टीम सदस्य द्वारा अभिभावकों को कहा जाता है कि दुकान पर उसका नाम लेने से छूट भी मिलेगी। यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है और शिक्षा विभाग इसके प्रति आंखें मूंदें हुए है। जब तक विभाग जागृत अवस्था में लौटेगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। बता दें कि सभी स्कूलों की अपनी दुकानें निर्धारित हैं, जहां पर अभिभावकों को किताबें लेने के भेजा जाता है।
शिक्षा विभाग के पास इस पर कार्रवाई करने का अधिकार है। परंतु विभाग ऐसा नहीं करता है, बल्कि इसमें कानूनी पेंच फंसा देता है। इसके लिए अधिकारी कहते हैं कि अभिभावक ऐसे स्कूलों के खिलाफ शिकायत करें। शिकायत आने पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। परंतु अभिभावक ऐसा नहीं करना चाहते हैं, चूंकि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि वे संचालकों की शिकायत करते हैं तो स्कूलों में बच्चों को प्रताड़ित किया जाता है। यदि वे बच्चे का स्कूल भी बदलवा दें तो दूसरे स्कूल में भी यही हाल रहता है। चूंकि स्कूलों के नाम अलग हैं, जबकि सभी स्कूलों का प्रबंधन एक ही तरीके से काम करता है। वहीं इसमें स्कूलों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है। जिस कारण स्कूलों के हौसलें बुलंद हैं।
स्कूलों को मनमानी का अधिकार नहीं है। दाखिला सहित अन्य कार्य स्कूलों में निदेशालय के नियमों के अनुसार ही करवाने जरूरी है। अभिभावक किसी एक दुकान से किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसके लिए जांच दल गठित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - धर्मेंद्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी।