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Yamuna Nagar News: चीरहरण पर भीष्म के मौन की बताई वजह
Tue, 10 Dec 2024 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 10 Dec 2024 12:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। महाभारत में द्रौपदी चीरहरण के समय भीष्म सहित कई वरिष्ठ जनों ने मौन धारण रखा। ऐसे में कई बार सवाल उठे कि आखिर भीष्म ने द्रौपदी का चीरहरण रोकने के प्रयास क्यों नहीं किए। आखिरकार बाणशैया पर लेटे भीष्म ने द्रौपदी को इसका कारण कलियुग की बुरी घटनाओं के सच से जोड़ कर बताया था। गोशाला में जारी श्री भागवत कथा के दूसरे दिन मथुरा की आनंदमूर्ति प्रिय किशोरी भारद्वाज ने इस प्रसंग का वृतांत सुनाया।
उन्होंने कहा कि महाभारत में भीष्म पितामह को बहुत ही आदरणीय माना जाता है, लेकिन महाभारत में जब भी द्रौपदी का उल्लेख किया जाता है, तो भीष्म के बारे में कहा जाता है कि जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, तो भीष्म मौन क्यों थे। भीष्म के मौन रहने से कई तरह के कारण बताए जाते हैं। कुछ लोगों का मत है कि भीष्म द्रौपदी को पसंद नहीं करते थे, इसलिए द्रौपदी के साथ हो रहे अत्याचार को देखते हुए भी भीष्म चुप रहे।
वेद व्यास रचित महाभारत में इसके कारण का उल्लेख भी किया गया है। महाभारत महाकाव्य के अनुसार भीष्म पितामह जब कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर बाण शय्या पर लेटे थे, तो द्रौपदी ने भीष्म के पास आकर हाथ जोड़कर अपने साथ हुए अत्याचार को रोकने का प्रयास न करने का कारण पूछा। तब भीष्म ने आत्मग्लानि व नम नेत्रों से द्रौपदी को बताया था कि उस समय मैं कौरवों की राजसभा में था।
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मैं दुर्योधन का दिया अन्न खा रहा था, जिसे दुर्योधन ने पाप कर्मों से कमाया था। इस कारण से मैं दुर्योधन का अन्न, नमक खाने की वजह से उसके अधीन हो गया था। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कह पाया। दूसरी बात यह है कि हम जिस भी इंसान का अन्न खाते हैं, कहीं न कहीं उसका प्रभाव हमारे मन मस्तिष्क पर भी पड़ता है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
भीष्म ने द्रौपदी से कहा कि मैं अपनी मृत्यु से पहले यह बात बताकर ही इस संसार से विदा होता, लेकिन मैं कुछ समय की प्रतीक्षा कर रहा था, जिससे कि मैं ऋणमुक्त होकर इस सत्य को बता सकूं। अर्जुन के बाणों से मेरे शरीर से सारा रक्त बह गया है। कथा वाचक ने बताया कि भीष्म इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि आगे कलियुग का आगमन होने व पर कुछ बुरी घटनाएं कई बड़े स्तर पर बढ़ती ही जाएंगी।
बुरे लोगों में और भी ज्यादा नकारात्मकता आती जाएगी। वर्तमान समय में भाई-भाई का दुश्मन बन रहा है, स्त्री का अपमान किया जा रहा है और लोग सत्य का साथ नहीं देते। महाभारत में जिस तरह भीष्म ने दुर्योधन जैसे बुरे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति का अन्न ग्रहण करके मौन धारण किया था। वर्तमान समय में भी हमें यही देखने को मिलता है। इस दौरान विहिप भारतीय गोवंश रक्षण एवं संवर्धन के प्रांत प्रमुख महंत शोभादास, रामकुमार निजामपुर, अमित सेतिया, सोनू पंवार, अमित सैनी व रामेश्वर दयाल भी मौजूद रहे।
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साढौरा। महाभारत में द्रौपदी चीरहरण के समय भीष्म सहित कई वरिष्ठ जनों ने मौन धारण रखा। ऐसे में कई बार सवाल उठे कि आखिर भीष्म ने द्रौपदी का चीरहरण रोकने के प्रयास क्यों नहीं किए। आखिरकार बाणशैया पर लेटे भीष्म ने द्रौपदी को इसका कारण कलियुग की बुरी घटनाओं के सच से जोड़ कर बताया था। गोशाला में जारी श्री भागवत कथा के दूसरे दिन मथुरा की आनंदमूर्ति प्रिय किशोरी भारद्वाज ने इस प्रसंग का वृतांत सुनाया।
उन्होंने कहा कि महाभारत में भीष्म पितामह को बहुत ही आदरणीय माना जाता है, लेकिन महाभारत में जब भी द्रौपदी का उल्लेख किया जाता है, तो भीष्म के बारे में कहा जाता है कि जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, तो भीष्म मौन क्यों थे। भीष्म के मौन रहने से कई तरह के कारण बताए जाते हैं। कुछ लोगों का मत है कि भीष्म द्रौपदी को पसंद नहीं करते थे, इसलिए द्रौपदी के साथ हो रहे अत्याचार को देखते हुए भी भीष्म चुप रहे।
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वेद व्यास रचित महाभारत में इसके कारण का उल्लेख भी किया गया है। महाभारत महाकाव्य के अनुसार भीष्म पितामह जब कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर बाण शय्या पर लेटे थे, तो द्रौपदी ने भीष्म के पास आकर हाथ जोड़कर अपने साथ हुए अत्याचार को रोकने का प्रयास न करने का कारण पूछा। तब भीष्म ने आत्मग्लानि व नम नेत्रों से द्रौपदी को बताया था कि उस समय मैं कौरवों की राजसभा में था।
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मैं दुर्योधन का दिया अन्न खा रहा था, जिसे दुर्योधन ने पाप कर्मों से कमाया था। इस कारण से मैं दुर्योधन का अन्न, नमक खाने की वजह से उसके अधीन हो गया था। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कह पाया। दूसरी बात यह है कि हम जिस भी इंसान का अन्न खाते हैं, कहीं न कहीं उसका प्रभाव हमारे मन मस्तिष्क पर भी पड़ता है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
भीष्म ने द्रौपदी से कहा कि मैं अपनी मृत्यु से पहले यह बात बताकर ही इस संसार से विदा होता, लेकिन मैं कुछ समय की प्रतीक्षा कर रहा था, जिससे कि मैं ऋणमुक्त होकर इस सत्य को बता सकूं। अर्जुन के बाणों से मेरे शरीर से सारा रक्त बह गया है। कथा वाचक ने बताया कि भीष्म इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि आगे कलियुग का आगमन होने व पर कुछ बुरी घटनाएं कई बड़े स्तर पर बढ़ती ही जाएंगी।
बुरे लोगों में और भी ज्यादा नकारात्मकता आती जाएगी। वर्तमान समय में भाई-भाई का दुश्मन बन रहा है, स्त्री का अपमान किया जा रहा है और लोग सत्य का साथ नहीं देते। महाभारत में जिस तरह भीष्म ने दुर्योधन जैसे बुरे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति का अन्न ग्रहण करके मौन धारण किया था। वर्तमान समय में भी हमें यही देखने को मिलता है। इस दौरान विहिप भारतीय गोवंश रक्षण एवं संवर्धन के प्रांत प्रमुख महंत शोभादास, रामकुमार निजामपुर, अमित सेतिया, सोनू पंवार, अमित सैनी व रामेश्वर दयाल भी मौजूद रहे।