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Yamuna Nagar News: पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध की मार से संकट में प्लाईवुड उद्योग
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यमुनानगर। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब यमुनानगर के प्रसिद्ध प्लाईवुड उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। प्लाईवुड निर्माण में इस्तेमाल होने वाले आवश्यक केमिकल की सप्लाई पिछले दो सप्ताह से लगभग ठप पड़ी है। इसके कारण फैक्टरियों में उत्पादन लागत तेजी से बढ़ गई है और कारोबारियों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
प्लाईवुड निर्माण के लिए फॉर्मेलिंग, फिनोल, मिथानोल और अन्य क्रूड ऑयल आधारित केमिकल का उपयोग किया जाता है। ये अधिकांश केमिकल अरब देशों से आयात होते हैं। लेकिन मौजूदा युद्ध के कारण इनकी सप्लाई बाधित हो गई है। जो स्टॉक बाजार में मौजूद है, वह भी सीमित मात्रा में और ऊंचे दामों पर मिल रहा है। इस संबंध में प्लाईवुड कारोबारियों का कहना है कि केमिकल के दामों में अचानक 50 से 75 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। पहले जो केमिकल 17 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता था, वह अब 28 से 29 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 80 रुपये प्रति किलो मिलने वाला केमिकल अब 100 से 125 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इन केमिकल और यूरिया की मदद से प्लाईवुड फैक्टरियों में ग्लू तैयार किया जाता है। यह ग्लू प्लाई की परतों को आपस में चिपकाने के काम आता है। जब फिनोल को यूरिया के साथ मिलाया जाता है तो वाटरप्रूफ प्लाई बनती है, जबकि यूरिया के साथ फॉर्मेलिंग मिलाने पर सामान्य प्लाई तैयार होती है।
कारोबारियों ने जताई चिंता : प्लाईवुड कारोबारी कमल गुप्ता, अंकुर जैन, मुकेश गुप्ता, मुदित अग्रवाल और विमल मलिक का कहना है कि विदेशों से आने वाले केमिकल की सप्लाई रुकने से उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। फैक्टरियों में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी केमिकल पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका फायदा उठाकर कुछ व्यापारी केमिकल ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। संवाद
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प्लाईवुड निर्माण के लिए फॉर्मेलिंग, फिनोल, मिथानोल और अन्य क्रूड ऑयल आधारित केमिकल का उपयोग किया जाता है। ये अधिकांश केमिकल अरब देशों से आयात होते हैं। लेकिन मौजूदा युद्ध के कारण इनकी सप्लाई बाधित हो गई है। जो स्टॉक बाजार में मौजूद है, वह भी सीमित मात्रा में और ऊंचे दामों पर मिल रहा है। इस संबंध में प्लाईवुड कारोबारियों का कहना है कि केमिकल के दामों में अचानक 50 से 75 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। पहले जो केमिकल 17 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता था, वह अब 28 से 29 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं 80 रुपये प्रति किलो मिलने वाला केमिकल अब 100 से 125 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इन केमिकल और यूरिया की मदद से प्लाईवुड फैक्टरियों में ग्लू तैयार किया जाता है। यह ग्लू प्लाई की परतों को आपस में चिपकाने के काम आता है। जब फिनोल को यूरिया के साथ मिलाया जाता है तो वाटरप्रूफ प्लाई बनती है, जबकि यूरिया के साथ फॉर्मेलिंग मिलाने पर सामान्य प्लाई तैयार होती है।
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कारोबारियों ने जताई चिंता : प्लाईवुड कारोबारी कमल गुप्ता, अंकुर जैन, मुकेश गुप्ता, मुदित अग्रवाल और विमल मलिक का कहना है कि विदेशों से आने वाले केमिकल की सप्लाई रुकने से उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। फैक्टरियों में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी केमिकल पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका फायदा उठाकर कुछ व्यापारी केमिकल ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। संवाद
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