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Yamuna Nagar News: बाल वाटिका में संवर रहा दिव्यांग बच्चों का जीवन
Tue, 22 Sep 2026 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:29 AM IST
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उत्थान संस्थान से जागरूकता रैली निकालते बच्चे व पदाधिकारी। संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। उत्थान विकास एवं अध्ययन संस्थान के अंतर्गत संचालित बाल वाटिका के माध्यम से डॉ. अंजू वाजपेयी दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को नई दिशा देने में जुटी हैं। कालिंदी कॉलोनी में संचालित पुनर्वास केंद्र में वर्तमान में करीब 52 बच्चे शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
डॉ. अंजू वाजपेयी वर्ष 1992 से संस्थान से जुड़ी हैं। इससे पहले वह शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पति प्रमोद कुमार वाजपेयी ने उन्हें दिव्यांग बच्चों के लिए समर्पित होकर काम करने की प्रेरणा दी। उनके पति प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और संस्थान के कार्यों में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। इसी सोच के साथ केंद्र में बच्चों को उनकी जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रयास जारी है।
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उनका मानना है कि बच्चों को समान अवसर, शिक्षा और सहयोग देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि संस्थान को सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती। समाज के सहयोग से बच्चों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं जुटा रही हैं। केंद्र में 12 सदस्यीय स्टाफ कार्यरत है, जिसमें प्रशिक्षित विशेष शिक्षक और ट्रेनर भी शामिल हैं।
स्टाफ की मदद से बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन से जुड़े कार्यों और आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान में बच्चों के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए धैर्य, अपनापन और नियमित प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।
भ्रमण से बढ़ाया जाता है आत्मविश्वास : डॉ. अंजू
डॉ. अंजू ने बताया कि बच्चों को शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। दिसंबर में बच्चों को विभिन्न संस्थानों, मंदिरों, हरिद्वार और थानों जैसे स्थानों का भ्रमण कराया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को सामाजिक परिवेश से परिचित कराना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करना है।
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यमुनानगर। उत्थान विकास एवं अध्ययन संस्थान के अंतर्गत संचालित बाल वाटिका के माध्यम से डॉ. अंजू वाजपेयी दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को नई दिशा देने में जुटी हैं। कालिंदी कॉलोनी में संचालित पुनर्वास केंद्र में वर्तमान में करीब 52 बच्चे शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
डॉ. अंजू वाजपेयी वर्ष 1992 से संस्थान से जुड़ी हैं। इससे पहले वह शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पति प्रमोद कुमार वाजपेयी ने उन्हें दिव्यांग बच्चों के लिए समर्पित होकर काम करने की प्रेरणा दी। उनके पति प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और संस्थान के कार्यों में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। इसी सोच के साथ केंद्र में बच्चों को उनकी जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रयास जारी है।
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उनका मानना है कि बच्चों को समान अवसर, शिक्षा और सहयोग देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि संस्थान को सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती। समाज के सहयोग से बच्चों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं जुटा रही हैं। केंद्र में 12 सदस्यीय स्टाफ कार्यरत है, जिसमें प्रशिक्षित विशेष शिक्षक और ट्रेनर भी शामिल हैं।
स्टाफ की मदद से बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन से जुड़े कार्यों और आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान में बच्चों के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए धैर्य, अपनापन और नियमित प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।
भ्रमण से बढ़ाया जाता है आत्मविश्वास : डॉ. अंजू
डॉ. अंजू ने बताया कि बच्चों को शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। दिसंबर में बच्चों को विभिन्न संस्थानों, मंदिरों, हरिद्वार और थानों जैसे स्थानों का भ्रमण कराया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को सामाजिक परिवेश से परिचित कराना, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करना है।

उत्थान संस्थान से जागरूकता रैली निकालते बच्चे व पदाधिकारी। संस्थान