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भगवान पार्श्वनाथ की महिमा अलौकिक : डॉ. स्वाति
Mon, 07 Oct 2024 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 07 Oct 2024 02:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 78वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति ने 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ के जाप की शृंखला में रविवार का जाप संपन्न कराया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री पार्श्वनाथ की महिला अलौकिक है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि पार्श्वनाथ जैन धर्म के तेइसवें (23वें) तीर्थंकर हैं। भगवान पार्श्वनाथ 30 वर्ष की आयु में ही गृह त्याग कर संन्यासी हो गए। 83 दिन तक कठोर तपस्या करने के बाद 84वें दिन उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। वाराणसी के सम्मेद पर्वत पर इन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था।
साध्वी ने बताया कि भारत का एक भी कोना ऐसा नहीं, जहां पार्श्वनाथ के मंत्र की गूंज सुनाई नहीं दें। पार्श्वनाथ धरती और अंबर का पुण्यशाली नाम है। निश्चित ही पार्श्वनाथ की महिमा ही अलौकिक है। यह तो वह पावन स्मरण है, जिसे जपने से पाप, ताप, संताप व अभिशाप सब दूर हो जाते हैं।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 78वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति ने 27 दिवसीय तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ के जाप की शृंखला में रविवार का जाप संपन्न कराया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री पार्श्वनाथ की महिला अलौकिक है।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि पार्श्वनाथ जैन धर्म के तेइसवें (23वें) तीर्थंकर हैं। भगवान पार्श्वनाथ 30 वर्ष की आयु में ही गृह त्याग कर संन्यासी हो गए। 83 दिन तक कठोर तपस्या करने के बाद 84वें दिन उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। वाराणसी के सम्मेद पर्वत पर इन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था।
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साध्वी ने बताया कि भारत का एक भी कोना ऐसा नहीं, जहां पार्श्वनाथ के मंत्र की गूंज सुनाई नहीं दें। पार्श्वनाथ धरती और अंबर का पुण्यशाली नाम है। निश्चित ही पार्श्वनाथ की महिमा ही अलौकिक है। यह तो वह पावन स्मरण है, जिसे जपने से पाप, ताप, संताप व अभिशाप सब दूर हो जाते हैं।
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