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Yamuna Nagar News: हुक्कों और ताश संग लग रही हार-जीत की बाजी
Fri, 20 Sep 2024 04:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 20 Sep 2024 04:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। विधानसभा चुनाव का खुमार लाेगों पर पूरी तरह से छाया हुआ है। मोहल्ले, पड़ोस से लेकर दुकानों और पार्कों में चार लोग जुटे नहीं की चुनाव में प्रत्याशियों की हार जीत के दावे परवान चढ़ने लगते हैं। इस वक्ता जहां देखो वहीं चुनाव के अलावा किसी और मुद्दे पर बात करने के लिए लोगों के पास न तो वक्त है और न ही दिलचस्पी। कहीं ताश की बाजी पर तो कहीं हुक्के की गड़गड़ाहट के बीच चुनाव पर चर्चा हो रही है।
चुनावी माहौल को परखते हुए अमर उजाला की टीम वीरवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे शहर के सेक्टर-15 से निकली। सेक्टर में पावर हाउस के नजदीक एक खाली दुकान में चारपाई पर बैठे कुछ लोग ताश खेलते दिखे। उनसे परिचय होने के बाद हम भी थोड़ी देर उनके पास बैठ गए। यहां पर किसान सन्नी, सचिन, दुकानदार टोनी, अजय, अरविंद समेत अन्य लोग बैठे थे। ताश की बाजी कब चुनाव में प्रत्याशियों की हार जीत में बदल गई कुछ पता ही नहीं लगा।
तभी दुकानदार टोनी हाथ में ताश का पत्ता पकड़ कर जोर से चारपाई पर फेंकते हुए बोला, ले तेरी पार्टी तो इस बार गई। इस बार तो हमारा बंदा जीतेगा। तभी अरविंद बोला, बंदा भले ही थारा जीत रहा हो लेकिन सरकार म्हारी ही बनेगी। जगाधरी, साढौरा, यमुनानगर व रादौर में विभिन्न पार्टियों की प्रत्याशियों की हार-जीत से होते-होते बात करनाल व रोहतक तक पहुंच गई। म्हारी पार्टी ने हरियाणा में यू काम कराया और थारी पार्टी ने कुछ नहीं कराया बात वर्तमान से इतिहास तक पहुंच गई।
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ताश खेल रहे लोगों ने चर्चा करते हुए बताया कि इस बार कौन सी पार्टी का प्रत्याशी जीत हासिल करेगा इस पर कुछ भी कहना मश्किल है। इस बार तो सारे ही मजबूत लग रहे हैं। किसी की शहर में अच्छी पकड़ है तो किसी की गांव में। कोई इस नेता के वोट काटेगा तो कोई दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाएगा। किसी की हार-जीत का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है। मतदान होने से दो-तीन दिन पहले बाजी पलटेगी। तब जिसकी हवा होगी उसकी ही सरकार बनेगी।
वहीं लोगों ने अपने शहर के मुद्दों पर भी बेबाकी से बात की। वह कहने लगे कि नगर निगम इस बार लोग परेशान कर दिए। इसका घर दूसरे के और दूसरे का तीसरे के नाम चढ़ा दिया। लोगों के चक्कर बहुत कटवाए। वहीं टूटी सड़कों, जलभराव, कॉलोनियों में अंधेरा जैसे प्रमुख मुद्दे रहे जिनका नेताओं व अधिकारियों ने कोई समाधान नहीं किया।
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यमुनानगर। विधानसभा चुनाव का खुमार लाेगों पर पूरी तरह से छाया हुआ है। मोहल्ले, पड़ोस से लेकर दुकानों और पार्कों में चार लोग जुटे नहीं की चुनाव में प्रत्याशियों की हार जीत के दावे परवान चढ़ने लगते हैं। इस वक्ता जहां देखो वहीं चुनाव के अलावा किसी और मुद्दे पर बात करने के लिए लोगों के पास न तो वक्त है और न ही दिलचस्पी। कहीं ताश की बाजी पर तो कहीं हुक्के की गड़गड़ाहट के बीच चुनाव पर चर्चा हो रही है।
चुनावी माहौल को परखते हुए अमर उजाला की टीम वीरवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे शहर के सेक्टर-15 से निकली। सेक्टर में पावर हाउस के नजदीक एक खाली दुकान में चारपाई पर बैठे कुछ लोग ताश खेलते दिखे। उनसे परिचय होने के बाद हम भी थोड़ी देर उनके पास बैठ गए। यहां पर किसान सन्नी, सचिन, दुकानदार टोनी, अजय, अरविंद समेत अन्य लोग बैठे थे। ताश की बाजी कब चुनाव में प्रत्याशियों की हार जीत में बदल गई कुछ पता ही नहीं लगा।
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तभी दुकानदार टोनी हाथ में ताश का पत्ता पकड़ कर जोर से चारपाई पर फेंकते हुए बोला, ले तेरी पार्टी तो इस बार गई। इस बार तो हमारा बंदा जीतेगा। तभी अरविंद बोला, बंदा भले ही थारा जीत रहा हो लेकिन सरकार म्हारी ही बनेगी। जगाधरी, साढौरा, यमुनानगर व रादौर में विभिन्न पार्टियों की प्रत्याशियों की हार-जीत से होते-होते बात करनाल व रोहतक तक पहुंच गई। म्हारी पार्टी ने हरियाणा में यू काम कराया और थारी पार्टी ने कुछ नहीं कराया बात वर्तमान से इतिहास तक पहुंच गई।
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ताश खेल रहे लोगों ने चर्चा करते हुए बताया कि इस बार कौन सी पार्टी का प्रत्याशी जीत हासिल करेगा इस पर कुछ भी कहना मश्किल है। इस बार तो सारे ही मजबूत लग रहे हैं। किसी की शहर में अच्छी पकड़ है तो किसी की गांव में। कोई इस नेता के वोट काटेगा तो कोई दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाएगा। किसी की हार-जीत का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है। मतदान होने से दो-तीन दिन पहले बाजी पलटेगी। तब जिसकी हवा होगी उसकी ही सरकार बनेगी।
वहीं लोगों ने अपने शहर के मुद्दों पर भी बेबाकी से बात की। वह कहने लगे कि नगर निगम इस बार लोग परेशान कर दिए। इसका घर दूसरे के और दूसरे का तीसरे के नाम चढ़ा दिया। लोगों के चक्कर बहुत कटवाए। वहीं टूटी सड़कों, जलभराव, कॉलोनियों में अंधेरा जैसे प्रमुख मुद्दे रहे जिनका नेताओं व अधिकारियों ने कोई समाधान नहीं किया।