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Yamuna Nagar News: सरकारी दफ्तरों में छह साल से फंसी जमीन से कब्जा हटाने की फाइल
Wed, 17 Dec 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 17 Dec 2025 01:01 AM IST
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औरंगाबाद में जमीन पर कब्जा कर की गई गेहूं की बिजाई। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर के औरंगाबाद में परिवहन विभाग की जिस जमीन पर आईडीटीआर (ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान) का भवन होना चाहिए था वहां पर ग्रामीणों ने गेहूं की बिजाई कर दी है। करीब छह साल पहले 4.70 करोड़ रुपये से खरीदी गई इस जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इस जमीन को कब्जा मुक्त कराने की फाइल सरकारी दफ्तरों में फंसी है।
अधिकारियों को निशानदेही करने से लेकर जमीन में लगे बिजली के पोल व लाइन और चहारदीवारी करने के लिए न केवल पत्र लिखे गए बल्कि पैसे भी जमा करवाए गए हैं। परंतु कोई भी इस गंभीरता से नहीं ले रहा। अधिकारी आते रहे और तबादला करवा कर जाते रहे, लेकिन कोई भी जमीन को कब्जा मुक्त नहीं करवा सका।
लोगों ने पहले इस जमीन पर रॉ मेटीरियल, गुहारे आदि रखे थे। जमीन खरीदने के बाद परिवहन विभाग ने जब इसकी निशानदेही कराई थी तो लोगों ने पिलर उखाड़ फेंके थे। आईडीटीआर के भवन निर्माण पर 30 से 40 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। हालांकि उस वक्त निशानदेही कराई गई तो जमीन कम निकली थी।
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इस चार कनाल 16 मरले जमीन के लिए परिवहन विभाग ने 28 लाख रुपये बाद में और जमा कराए थे। तहसीलदार को भी दोबारा निशानदेही के लिए जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की तरफ से पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन वह भी ढुलमुल रवैया अपनाए हुए हैं। जमीन की चहारदीवारी करने के लिए डीटीओ कार्यालय ने करीब 70 लाख रुपये नगर निगम को दे रखे हैं इसलिए वहां से भी काम में कोई प्रगति नहीं हुई। मामला सरकारी कार्यालयों में ही उलझा हुआ है।
जमीन मिले तो यहां तैयार होंगे प्रशिक्षित चालक
आईडीटीआर का भवन बनाने के लिए सरकार की तरफ से कंपनी से होंडा, मारुति व अशोक लीलैंड में से किसी एक साथ एमओयू साइन किया जाना है। भवन बनने के बाद आईडीटीआर में लोगों को हैवी ड्राइविंग लाइसेंस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अच्छे प्रशिक्षण से प्रशिक्षित चालक मिलेंगे और हादसों में कमी आएगी। टेस्टिंग ट्रैक पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देने और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने लिए इस केंद्र में एक ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक भी बनेगा। टेस्ट ट्रैक के अलावा आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और कंप्यूटरीकृत प्रणाली से युक्त क्लास रूम, वर्कशॉप, इंजन रूम, इलेक्ट्रॉनिक्स डिस्प्ले रूम बनाए जाएंगे। यहां से प्रशिक्षित चालकों का लाइसेंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य होगा। कहीं का भी चालक इसमें प्रशिक्षण ले सकता है। यहां ट्रक, बस जैसे यात्री व माल वाहक वाहनों के साथ ही क्रेन, पोकलेन, जेसीबी, बुलडोजर चलाने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
तहसीलदार से लेकर नगर निगम कार्यालय तक में पत्र लिखे जा चुके है। यहां तक की चहारदीवारी के लिए पैसा भी जमा करवा रखा है। अभी तक संबंधित विभागों की तरफ से इस मामले में अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आगामी रोड सेफ्टी की बैठक में इस मामले पर चर्चा की जाएगी। - हैरतजीत कौर, डीटीओ, यमुनानगर।
आईडीटीआर की जमीन पर यदि कब्जा है तो इसे जल्द ही मुक्त करवा कर डीटीओ को हैंडओवर कर दिया जाएगा। इस मामले में स्टाफ से अपडेट लिया जाएगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। शहर के औरंगाबाद में परिवहन विभाग की जिस जमीन पर आईडीटीआर (ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान) का भवन होना चाहिए था वहां पर ग्रामीणों ने गेहूं की बिजाई कर दी है। करीब छह साल पहले 4.70 करोड़ रुपये से खरीदी गई इस जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इस जमीन को कब्जा मुक्त कराने की फाइल सरकारी दफ्तरों में फंसी है।
अधिकारियों को निशानदेही करने से लेकर जमीन में लगे बिजली के पोल व लाइन और चहारदीवारी करने के लिए न केवल पत्र लिखे गए बल्कि पैसे भी जमा करवाए गए हैं। परंतु कोई भी इस गंभीरता से नहीं ले रहा। अधिकारी आते रहे और तबादला करवा कर जाते रहे, लेकिन कोई भी जमीन को कब्जा मुक्त नहीं करवा सका।
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लोगों ने पहले इस जमीन पर रॉ मेटीरियल, गुहारे आदि रखे थे। जमीन खरीदने के बाद परिवहन विभाग ने जब इसकी निशानदेही कराई थी तो लोगों ने पिलर उखाड़ फेंके थे। आईडीटीआर के भवन निर्माण पर 30 से 40 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। हालांकि उस वक्त निशानदेही कराई गई तो जमीन कम निकली थी।
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इस चार कनाल 16 मरले जमीन के लिए परिवहन विभाग ने 28 लाख रुपये बाद में और जमा कराए थे। तहसीलदार को भी दोबारा निशानदेही के लिए जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की तरफ से पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन वह भी ढुलमुल रवैया अपनाए हुए हैं। जमीन की चहारदीवारी करने के लिए डीटीओ कार्यालय ने करीब 70 लाख रुपये नगर निगम को दे रखे हैं इसलिए वहां से भी काम में कोई प्रगति नहीं हुई। मामला सरकारी कार्यालयों में ही उलझा हुआ है।
जमीन मिले तो यहां तैयार होंगे प्रशिक्षित चालक
आईडीटीआर का भवन बनाने के लिए सरकार की तरफ से कंपनी से होंडा, मारुति व अशोक लीलैंड में से किसी एक साथ एमओयू साइन किया जाना है। भवन बनने के बाद आईडीटीआर में लोगों को हैवी ड्राइविंग लाइसेंस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अच्छे प्रशिक्षण से प्रशिक्षित चालक मिलेंगे और हादसों में कमी आएगी। टेस्टिंग ट्रैक पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देने और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने लिए इस केंद्र में एक ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक भी बनेगा। टेस्ट ट्रैक के अलावा आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और कंप्यूटरीकृत प्रणाली से युक्त क्लास रूम, वर्कशॉप, इंजन रूम, इलेक्ट्रॉनिक्स डिस्प्ले रूम बनाए जाएंगे। यहां से प्रशिक्षित चालकों का लाइसेंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य होगा। कहीं का भी चालक इसमें प्रशिक्षण ले सकता है। यहां ट्रक, बस जैसे यात्री व माल वाहक वाहनों के साथ ही क्रेन, पोकलेन, जेसीबी, बुलडोजर चलाने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
तहसीलदार से लेकर नगर निगम कार्यालय तक में पत्र लिखे जा चुके है। यहां तक की चहारदीवारी के लिए पैसा भी जमा करवा रखा है। अभी तक संबंधित विभागों की तरफ से इस मामले में अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आगामी रोड सेफ्टी की बैठक में इस मामले पर चर्चा की जाएगी। - हैरतजीत कौर, डीटीओ, यमुनानगर।
आईडीटीआर की जमीन पर यदि कब्जा है तो इसे जल्द ही मुक्त करवा कर डीटीओ को हैंडओवर कर दिया जाएगा। इस मामले में स्टाफ से अपडेट लिया जाएगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।