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Yamuna Nagar News: उपायुक्त को लोगों की समस्याओं से कराया रूबरू

Fri, 28 Jun 2024 05:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 28 Jun 2024 05:14 AM IST
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The Deputy Commissioner was made aware of the problems of the people
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। शहर की समस्याओं को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी क्षेत्र के पूर्व पार्षद एक मंच पर आ गए हैं। इसे समस्त पूर्व पार्षद मंच नाम दिया है। मंच का प्रतिनिधिमंडल वीरवार को डीसी कैप्टन मनोज कुमार से मिला। इस दौरान डीसी को नगर निगम व पब्लिक हेल्थ से जुड़े कामों में कमियां गिनाई।
इससे सफाई, स्ट्रीट लाइट, प्रॉपर्टी आईडी, विकास शुल्क, जल निकासी, सड़कों के गड्ढों जैसी दिक्कतें रखीं। इन कामों में सुधार की मांग में पत्र भी सौंपा। साथ हीआरोप लगाया कि अधिकारी आपको (डीसी) शहर की समस्याएं नहीं बताते हैं। प्रतिनिधिमंडल में वार्ड नौ से भाजपा के निवर्तमान पार्षद प्रतिनिधि एवं पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर पवन बिट्टू, कांग्रेस से पूर्व डिप्टी मेयर रामपाल, इनेलो से निवर्तमान पार्षद रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निवर्तमान पार्षद प्रतिनिधि जसबीर सिंह, कांग्रेस से निवर्तमान पार्षद प्रतिनिधि अमरजीत सिंह कोहली, पूर्व पार्षद नीरज राणा शामिल रहे।
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प्रतिनिधिमंडल पहले एसडीएम फिर डीसी से मिला। डीसी के नाम दिए पत्र के माध्यम से बताया कि शहर में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। गलियों में महीनों से कोई झाड़ू लगाने नहीं आता। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं। जब किसी वीआईपी का दौरा हो तो सफाई हो जाती है अन्यथा नहीं होती। इसके लिए सफाई कर्मियों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है।
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करीब 15 वर्षों से सफाई कर्मचारी भर्ती नहीं किए गए, वहीं काफी सेवानिवृत्त भी हो गए। शहरी जनसंख्या के हिसाब से जितने सफाई कर्मचारी होने चाहिए, वह नहीं है। इससे सफाई व्यवस्था बिगड़ रही है। बताया कि शहरी क्षेत्र में याशी कंपनी संपत्ति सर्वे कर मोटा मुनाफा लेकर चली गई, पर सर्वे की गलतियों को निगम के अफसर व कर्मचारी ठीक कर रहे हैं।
वहीं इन अधिकारियों व कर्मचारियों का काम शहर की अन्य व्यवस्थाएं व काम देखना है, जो संपत्ति सर्वे की गलतियों में सुधार के काम के कारण प्रभावित हो रहे हैं। उनकी मांग है कि संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए एनडीसी की शर्त व विकास शुल्क को हटाया जाए। पुरानी कॉलोनियों पर भी विकास शुल्क नहीं लगना चाहिए, क्योंकि उनमें सड़क, पानी व अन्य सुविधाएं हो चुकी हैं। अभी सड़कों में गड्ढे हैं, इसलिए मरम्मत के लिए सभी वार्डों में 25-25 लाख रुपये की ई- निविदा लगाई जाए। साथ ही स्ट्रीट लाइट की वार्डवार ई-निविदा लगाई जानी चाहिए।

छोटे नाले हो पहले साफ, सीवरेज पर दिया जाए ध्यान
प्रतिनिधिमंडल ने मानसून नजदीक देख जलनिकासी का मुद्दा भी डीसी के समक्ष रखा। बताया कि जाम पड़े सीवर दस-दस दिन ठीक नहीं होते। आरोप लगाया कि इसकी वजह अधिकारियों का समस्या को गंभीरता से न लेना है। वार्डों के काफी घरों में सीवरेज का गंदा पानी आता है, जिस बारे अवगत कराने पर अधिकारी कहते हैं कि उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। जबकि संसाधन का प्रबंध मानसून से पहले होना चाहिए था। ऐसे ही शहर में नालों की सफाई का काम देरी से शुरू हुआ, पर उसमें छोटे नालों पर ध्यान नहीं है। उनकी मांग है कि मानसून की बारिश से पहले छोटे नाले व नालियों की सफाई हो।
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