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Yamuna Nagar News: हिमाचल से पर्यावरण मंजूरी न मिलने के कारण बांध का निर्माण अटका
Sat, 25 Oct 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 25 Oct 2025 12:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सरकार की हरियाणा, यूपी, हिमाचल व दिल्ली को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से हथिनी कुंड बैराज से चार किमी आगे हिमाचल की तरफ यमुना नदी के ऊपर करीब 6134 करोड़ रुपये की लागत से बांध बनाने की बड़ी परियोजना है।
हिमाचल की तरफ से पर्यावरण मंजूरी न मिलने के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना सिरे चढ़ नहीं पा रही। इस बांध के बनने से हिमाचल को भी काफी लाभ होगा। उधर, सिंचाई विभाग हिमाचल को पर्यावरण मंजूरी को लेकर चार बार पत्राचार कर चुका है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में स्थानीय विभाग ने अब इस मामले को सीएम नायब सिंह सैनी के समक्ष रखा है। उन्होंने विभाग को परियोजना के संबंध में हिमाचल के साथ वार्तालाप करने का आश्वासन दिया है।
2021 से अटकी पड़ी परियोजना : वर्ष 2021 की इस परियोजना को शुरू करने पर विचार किया गया था। चार साल बाद भी बांध बनाने की ये परियोजना अटकी पड़ी है।
परियोजना के पूरा होने से जहां चारों राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा, वहीं बाढ़ की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी। जिस जगह पर बांध बनाया जाना है, वहां सर्वे कराने के बाद जगह को पहले ही चिह्नित कर लिया गया है। ऐसे में यदि परियोजना सिरे चढ़ी तो यह हरियाणा का सबसे बड़ा बांध होगा। इस बांध के बनने से यमुना के किनारे बसे क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या से बड़ी राहत मिल सकेगी। इस परियोजना के तहत 250 मेगावाट बिजली उत्पादन भी की जाएगी।
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रिजर्व वायर का कुछ हिस्सा बनेगा हिमाचल : सिंचाई विभाग के मुताबिक यह बांध भी हरियाणा की सीमा में ही बनना है, किंतु रिजर्व वायर का कुछ हिस्सा हिमाचल के पांवटा साहिब तक जाएगा। बता दें इस परियोजना से जहां हरियाणा, यूपी, हिमाचल व दिल्ली को भी लाभ मिलता है, वहीं हरियाणा के साथ-साथ यूपी व दिल्ली को भी बाढ़ से छुटकारा मिलेगा।
वहीं बांध के बनने से बाढ़ का खतरा भी कम होगा। पानी को बांध पर स्टोर किया जाएगा जिससे मांग के अनुसार ही आगे छोड़ा जाएगा।
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यमुनानगर। सरकार की हरियाणा, यूपी, हिमाचल व दिल्ली को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से हथिनी कुंड बैराज से चार किमी आगे हिमाचल की तरफ यमुना नदी के ऊपर करीब 6134 करोड़ रुपये की लागत से बांध बनाने की बड़ी परियोजना है।
हिमाचल की तरफ से पर्यावरण मंजूरी न मिलने के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना सिरे चढ़ नहीं पा रही। इस बांध के बनने से हिमाचल को भी काफी लाभ होगा। उधर, सिंचाई विभाग हिमाचल को पर्यावरण मंजूरी को लेकर चार बार पत्राचार कर चुका है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में स्थानीय विभाग ने अब इस मामले को सीएम नायब सिंह सैनी के समक्ष रखा है। उन्होंने विभाग को परियोजना के संबंध में हिमाचल के साथ वार्तालाप करने का आश्वासन दिया है।
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2021 से अटकी पड़ी परियोजना : वर्ष 2021 की इस परियोजना को शुरू करने पर विचार किया गया था। चार साल बाद भी बांध बनाने की ये परियोजना अटकी पड़ी है।
परियोजना के पूरा होने से जहां चारों राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा, वहीं बाढ़ की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी। जिस जगह पर बांध बनाया जाना है, वहां सर्वे कराने के बाद जगह को पहले ही चिह्नित कर लिया गया है। ऐसे में यदि परियोजना सिरे चढ़ी तो यह हरियाणा का सबसे बड़ा बांध होगा। इस बांध के बनने से यमुना के किनारे बसे क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या से बड़ी राहत मिल सकेगी। इस परियोजना के तहत 250 मेगावाट बिजली उत्पादन भी की जाएगी।
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रिजर्व वायर का कुछ हिस्सा बनेगा हिमाचल : सिंचाई विभाग के मुताबिक यह बांध भी हरियाणा की सीमा में ही बनना है, किंतु रिजर्व वायर का कुछ हिस्सा हिमाचल के पांवटा साहिब तक जाएगा। बता दें इस परियोजना से जहां हरियाणा, यूपी, हिमाचल व दिल्ली को भी लाभ मिलता है, वहीं हरियाणा के साथ-साथ यूपी व दिल्ली को भी बाढ़ से छुटकारा मिलेगा।
वहीं बांध के बनने से बाढ़ का खतरा भी कम होगा। पानी को बांध पर स्टोर किया जाएगा जिससे मांग के अनुसार ही आगे छोड़ा जाएगा।