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Yamuna Nagar News: सरस्वतीनगर उप तहसील की सुधरेगी हालत
Sun, 19 Oct 2025 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 19 Oct 2025 11:15 PM IST
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सरस्वतीनगर उप तहसील की इमारत। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बदहाल सरस्वतीनगर उप तहसील की अब जल्द ही दशा सुधरेगी। इसके मरम्मत के लिए 40 लाख रुपये का बजट मंजूर हो चुका है। दिवाली के बाद पीडब्ल्यूडी के माध्यम से इसका ठेका भी हो जाएगा। इस बजट से सफाई कार्य से लेकर नायब तहसीलदार की कोर्ट, भवन, बाथरूम तथा अन्य कार्य होंगे।
वर्ष 2008 के बाद अब पहली बार इस उप तहसील का मरम्मत कार्य होगा। उल्लेखनीय है खंड सरस्वती नगर की उप तहसील का तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने वर्ष 2008 में उद्धाटन किया था। शुरुआती दौर में उप तहसील परिसर में काफी सफाई रहती थी। जैसे-जैसे समय गुजरता गया तहसील परिसर की हालत भी बदहाल होती चली गई।
मुख्य द्वार पर उप तहसील के नाम का बोर्ड भी एक बार टूटने के बाद दोबारा से नया नहीं लगाया गया। बोर्ड पूरी तरह से टूटा पड़ा है। यहां तक मुख्य द्वार पर तो इतनी बड़ी झाड़ियों उग चुकी हैं, की उप तहसील परिसर की दीवार भी दिखाई नहीं देती। बता दें लोग यहां पर रजिस्ट्री करवाने, जाति प्रमाण पत्र, डोमिसेल इत्यादि कार्य करवाने के लिए आते हैं। यहां के हालात को देखकर हर कोई अधिकारियों को कोसना नहीं छोड़ते हैं।
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उप तहसील में नायब तहसीलदार होता है, जोकि क्षेत्र का मजिस्ट्रेट भी होता है। ऐसे में तहसील परिसर में आने वाले जो केस होते हैं नायब तहसीलदार अपनी कोर्ट में सुनते हैं, लेकिन नायब तहसीलदार की कोर्ट की हालत किसी से छुपी नहीं है। इससे उन्हें केसों की सुनवाई करने में परेशानी होती है।
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यमुनानगर। बदहाल सरस्वतीनगर उप तहसील की अब जल्द ही दशा सुधरेगी। इसके मरम्मत के लिए 40 लाख रुपये का बजट मंजूर हो चुका है। दिवाली के बाद पीडब्ल्यूडी के माध्यम से इसका ठेका भी हो जाएगा। इस बजट से सफाई कार्य से लेकर नायब तहसीलदार की कोर्ट, भवन, बाथरूम तथा अन्य कार्य होंगे।
वर्ष 2008 के बाद अब पहली बार इस उप तहसील का मरम्मत कार्य होगा। उल्लेखनीय है खंड सरस्वती नगर की उप तहसील का तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने वर्ष 2008 में उद्धाटन किया था। शुरुआती दौर में उप तहसील परिसर में काफी सफाई रहती थी। जैसे-जैसे समय गुजरता गया तहसील परिसर की हालत भी बदहाल होती चली गई।
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मुख्य द्वार पर उप तहसील के नाम का बोर्ड भी एक बार टूटने के बाद दोबारा से नया नहीं लगाया गया। बोर्ड पूरी तरह से टूटा पड़ा है। यहां तक मुख्य द्वार पर तो इतनी बड़ी झाड़ियों उग चुकी हैं, की उप तहसील परिसर की दीवार भी दिखाई नहीं देती। बता दें लोग यहां पर रजिस्ट्री करवाने, जाति प्रमाण पत्र, डोमिसेल इत्यादि कार्य करवाने के लिए आते हैं। यहां के हालात को देखकर हर कोई अधिकारियों को कोसना नहीं छोड़ते हैं।
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उप तहसील में नायब तहसीलदार होता है, जोकि क्षेत्र का मजिस्ट्रेट भी होता है। ऐसे में तहसील परिसर में आने वाले जो केस होते हैं नायब तहसीलदार अपनी कोर्ट में सुनते हैं, लेकिन नायब तहसीलदार की कोर्ट की हालत किसी से छुपी नहीं है। इससे उन्हें केसों की सुनवाई करने में परेशानी होती है।