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Yamuna Nagar News: खतरों के बीच बरसाती नदी पारकर स्कूल जाते हैं नगला गांव के बच्चे
Sat, 05 Jul 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 05 Jul 2025 12:57 AM IST
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कौशिक खान
छछरौली। पथराला नदी हर साल विकराल रूप लेकर कस्बे में तबाही मचाती है। वहीं पढ़ने वाले बच्चों के लिए कभी भी मौत की नदी बन सकती है। दरअसल नगला गांव के बच्चों को जान जोखिम में डाल कर रोजाना इस नदी को पार करना पड़ रहा है। बच्चे रोजाना नदी को पार कर दूसरे छोर बसे गांव जैतपुर के सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है।
ऐसा नहीं नगला गांव में स्कूल नहीं, बल्कि यहां अध्यापक न होने के चलते अभिभावक को बच्चों के भविष्य को देखते हुए नदी पार कर सरकारी स्कूल में भेज रहे हैं। ग्रामीणों को भी इसी तरह से नदी को पार करना पड़ रहा है। सप्ताहभर पहले पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश के चलते यह नदी उफान पर आ गई थी। ऐसे में नदी के दोनों छोर बसे गांवों का संपर्क आपस में टूट गया।
ग्रामीणों का कहना है पथराला नदी पर पुल निर्माण के लिए 20 साल से मांग कर रहे हैं। जब चुनाव आते हैं वे जनप्रतिनिधियों के सामने पुल के निर्माण की बात रखते हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिलता। वैसे तो ये पथराला बरसाती नदी है, लेकिन मानसून के दिनों में यह उफान पर आ जाती है, ऐसे में दोनों छोर के गांवों का आपस में संपर्क टूट जाता है और आवश्यक कार्य करते नदी के पानी के बीच से होकर दूसरी तरफ जाना पड़ता है।
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गांव के जुल्फान बताते हैं पिछले दो दशक से ग्रामीण नदी पर पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन पुल बनना तो दूर कोई प्रशासनिक अधिकारी उनका दुखड़ा सुनने के लिए तक नहीं पहुंचा। हमारे बच्चे जान जोखिम में डाल नदी को पार कर रहे, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। पता नहीं हम लोगों को कितना और दुख झेलना होगा।
ग्रामीण इकराम ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या नदी पर पुल न होना है। आम आदमी तो जैसे कैसे नदी के पानी से निकलकर चला ही जाता है। स्कूल में स्टाफ न होने की वजह से बच्चे नदी पार के दूसरे गांव में पढ़ने के लिए जाते हैं। तीन महीने तक बच्चों को इसी तरह से नदी को पार करना पड़ता है। हर समय डर लगा रहता है कि कोई अनहोनी न हो जाए। संवाद
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छछरौली। पथराला नदी हर साल विकराल रूप लेकर कस्बे में तबाही मचाती है। वहीं पढ़ने वाले बच्चों के लिए कभी भी मौत की नदी बन सकती है। दरअसल नगला गांव के बच्चों को जान जोखिम में डाल कर रोजाना इस नदी को पार करना पड़ रहा है। बच्चे रोजाना नदी को पार कर दूसरे छोर बसे गांव जैतपुर के सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है।
ऐसा नहीं नगला गांव में स्कूल नहीं, बल्कि यहां अध्यापक न होने के चलते अभिभावक को बच्चों के भविष्य को देखते हुए नदी पार कर सरकारी स्कूल में भेज रहे हैं। ग्रामीणों को भी इसी तरह से नदी को पार करना पड़ रहा है। सप्ताहभर पहले पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश के चलते यह नदी उफान पर आ गई थी। ऐसे में नदी के दोनों छोर बसे गांवों का संपर्क आपस में टूट गया।
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ग्रामीणों का कहना है पथराला नदी पर पुल निर्माण के लिए 20 साल से मांग कर रहे हैं। जब चुनाव आते हैं वे जनप्रतिनिधियों के सामने पुल के निर्माण की बात रखते हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिलता। वैसे तो ये पथराला बरसाती नदी है, लेकिन मानसून के दिनों में यह उफान पर आ जाती है, ऐसे में दोनों छोर के गांवों का आपस में संपर्क टूट जाता है और आवश्यक कार्य करते नदी के पानी के बीच से होकर दूसरी तरफ जाना पड़ता है।
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गांव के जुल्फान बताते हैं पिछले दो दशक से ग्रामीण नदी पर पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन पुल बनना तो दूर कोई प्रशासनिक अधिकारी उनका दुखड़ा सुनने के लिए तक नहीं पहुंचा। हमारे बच्चे जान जोखिम में डाल नदी को पार कर रहे, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। पता नहीं हम लोगों को कितना और दुख झेलना होगा।
ग्रामीण इकराम ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या नदी पर पुल न होना है। आम आदमी तो जैसे कैसे नदी के पानी से निकलकर चला ही जाता है। स्कूल में स्टाफ न होने की वजह से बच्चे नदी पार के दूसरे गांव में पढ़ने के लिए जाते हैं। तीन महीने तक बच्चों को इसी तरह से नदी को पार करना पड़ता है। हर समय डर लगा रहता है कि कोई अनहोनी न हो जाए। संवाद